नवरात्र को लेकर मंदिरों उमड़ रहा आस्था का सैलाब जितेंद्र सिंह, गढ़वा शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही गढ़वा जिले का माहौल भक्तिमय हो गया है. खासकर ऐतिहासिक मां गढ़देवी मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. कलश स्थापना के बाद मंदिर में 26 श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया है कि वे पूरे नौ दिनों तक नियमित रूप से पाठ और पूजा-अर्चना करेंगे. सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं और मां गढ़देवी के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज रहा है. गढ़देवी मंदिर का इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है. राजा अमर दयाल सिंह ने पुत्र प्राप्ति की कामना से इसकी स्थापना करवाई थी. मनोकामना पूर्ण होने पर उन्होंने 1914 से बंगाली पद्धति पर आधारित दुर्गा पूजा की शुरुआत की. यही परंपरा आज भी निरंतर जारी है और गढ़वा की धार्मिक पहचान बन चुकी है. देवी के विभिन्न स्वरूपों को होती है पूजा मंदिर के पुजारी चिंटू पांडेय ने बताया कि सप्तमी से नवमी तक देवी के विभिन्न स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना होती है. इस दौरान विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं. पूजा से घर में सुख-शांति का होता है वास श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां गढ़देवी की पूजा-अर्चना से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है. संकल्पित श्रद्धालु पूरे नवरात्र व्रत रखते हुए प्रतिदिन पाठ और आरती में शामिल हो रहे हैं. नवरात्र की पूर्णाहुति पर विजयादशमी के दिन मां की प्रतिमा का विसर्जन भव्य शोभायात्रा के साथ किया जाता है. नंगे पांव श्रद्धालु कंधे पर प्रतिमा लेकर जलाशय तक जाते हैं, रास्ते में जगह-जगह आरती और पुष्पवर्षा से देवी को विदाई दी जाती है.
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