वाशिंगटन: वसा और सामान्य शर्करा की अधिकता वाले पश्चिमी आाहर से छोटी आंत में ऐसा बैक्टीरिया पनपता है जो वसा का पाचन एवं अवशोषण बढ़ा देता है. एक अध्ययन में यह दावा किया गया है. जर्नल सेल होस्ट एंड माक्रोब में प्रकाशित इस अध्ययन में यह तय किया गया है कि वसा के पाचन एवं अशोषण के लिए सूक्ष्मजीवी जरूरी हैं या नहीं. अमेरिका के मिडवेस्टर्न विश्वविद्याल के शोधकर्ताओं ने इस बात का आकलन किया कि वे कौन से बैक्टीरिया होते हैं और आहार से पनपने वाले सूक्ष्मजीवों का वसा के पाचन एवं ग्रहण में क्या भूमिका होती है.
शोधकर्ताओं ने विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से दर्शाया कि सूक्ष्मजीवी रहित माहौल में पले – बढ़े चूहे पारंपरिकरूप से पले-बढ़े चूहों की तुलना में आहार जनित मोटापा से बचे होते हैं और वे वसा का अवशोषण नहीं कर पाते हैं.
मिडवेस्टर्न विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर क्रिस्टिना मार्टिनेज गुरयर्न ने कहा कि जब इन सूक्ष्मजीव रहित जीवों की आंत में उच्च वसा दशाओं में बैक्टीरिया का अंश प्रविष्ट कराया जाता है तो वे भी वसा का अवशोषण करने में समर्थ हो जाते हैं. इस अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि ये सूक्ष्मजीव छोटी आंत में ऐसे इंजाइम का स्राव करते हैं जो आहार वसा को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है और उसका तीव्र अवशोषण होता है.
