जबड़े में है दर्द तो करें मातंगी मुद्रा, होगा दूर

II डॉ रमेश पुरी II योग विशेषज्ञ ओशोधारा, सोनीपत मुंह में अक्लदाढ़ सबसे बाद में निकलता है. तब तक बाकी दांत निकल चुके होते हैं, जिसके कारण अक्लदाढ़ से बाकी दांतों पर दबाव बनता है. इससे मसूढ़े में सूजन, मसूढ़े का लाल पड़ जाने, भोजन चबाने में परेशानी तो होती ही है,बुखार और दांतों से […]

II डॉ रमेश पुरी II

योग विशेषज्ञ

ओशोधारा, सोनीपत

मुंह में अक्लदाढ़ सबसे बाद में निकलता है. तब तक बाकी दांत निकल चुके होते हैं, जिसके कारण अक्लदाढ़ से बाकी दांतों पर दबाव बनता है. इससे मसूढ़े में सूजन, मसूढ़े का लाल पड़ जाने, भोजन चबाने में परेशानी तो होती ही है,बुखार और दांतों से मवाद भी आ सकता है. अक्लदाढ़ निकलते समय मुंह खोलना-बंद करना मुश्किल हो जाता है और इतना दर्द होता है कि खाना-पीना मुश्किल हो जाता है.

अक्लदाढ़ या किसी भी अन्य कारण से जबड़े के दर्द में होनेवाली असहनीय पीड़ा में भी यह मुद्रा शक्तिशाली इंजेक्शन की तरह दो-तीन मिनट में ही असर दिखाती है. इस मुद्रा से आंतरिक संतुलन बनता है और हृदय, आमाशय, पित्त की थैली, तिल्ली, अग्नाशय और गुर्दे क्रियाशील होते हैं. इस मुद्रा में नाभि के पीछे रीढ में स्थित मणिपुर चक्र पर ध्यान लगाना होता है, जिससे उसके आसपास प्राणशक्ति बढ़ जाती है. इससे हृदय की धड़कन ठीक होती है और तनाव में भी कमी आती है, जिसका हमारी पाचनशक्ति पर सकारात्मक असर पड़ता है.

कैसे करें: दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें, लेकिन मध्यमा उंगलियों को सीधा रखकर आपस में मिला लें. इस प्रकार मुद्रा बनाकर हाथों को पेट पर रखें. फिर अपने ध्यान को मणिपुर चक्र (नाभि) पर केंद्रित करें.

अवधिः दिन में तीन बार 4-4 मिनट के लिए.

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