Premanand Ji Maharaj: रिश्तों में प्रेम, समर्पण और उम्मीदें स्वाभाविक हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम दिल से किसी से प्यार करते हैं, उसके लिए सब कुछ करते हैं, फिर भी वह व्यक्ति हमारे भाव नहीं समझ पाता. ऐसे में मन टूट जाता है, निराशा और पीड़ा बढ़ती जाती है.
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, यह स्थिति दुख नहीं बल्कि ईश्वर की कृपा का संकेत भी हो सकती है. उनका संदेश है कि संसार का प्रेम अक्सर स्वार्थ से जुड़ा होता है, जबकि सच्चा प्रेम केवल भगवान से जुड़कर ही स्थायी बनता है.
Premanand Ji Maharaj के अनुसार, जब कोई आपकी फीलिंग्स और प्यार ना समझें तो क्या करें?
जब आपका प्रेम सामने वाला न समझे, तो सबसे पहले अपने प्रेम की भावना को परखें. क्या वह प्रेम है या अपेक्षा? यदि हम बदले में समझ, सम्मान और अपनापन चाहते हैं, तो वह प्रेम कम और अपेक्षा अधिक है. सच्चा प्रेम देने का नाम है, मांगने का नहीं.
महाराज जी कहते हैं – यदि कोई आपके प्रेम को ठुकराता है, तो इसे कृपा मानें, क्योंकि इससे आपको संसार के अस्थायी रिश्तों का सत्य समझ में आता है. इससे मन भगवान की ओर मुड़ता है, जहां प्रेम निस्वार्थ और अटूट है.
परिवार, जीवनसाथी और अपनों से प्रेम जरूर करें, लेकिन उनके भीतर परमात्मा का अंश देखकर. सेवा का भाव रखें, पर अपना संपूर्ण हृदय किसी नश्वर व्यक्ति पर निर्भर न करें.
अपनी ऊर्जा को नाम जप, सत्संग और अच्छे आचरण में लगाएं. खुद को इतना मजबूत बनाएं कि किसी के व्यवहार से आपका जीवन डगमगाए नहीं.
सच्चा प्रेम वही है जहां त्याग है, धैर्य है और ईश्वर का आधार है. जब प्रेम भगवान से जुड़ जाता है, तब टूटन नहीं, केवल शांति मिलती है.
यह भी पढ़ें: Premanand Ji Maharaj Quotes: अच्छे लोग ही क्यों अकेले रह जाते हैं? प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं वजह
यह भी पढ़ें: Premanand Ji Maharaj: हालात से घबराओ मत, जीवन में जो होगा अच्छे के लिए होगा
