Premanand Ji Maharaj Quotes: अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि जब वे भजन, पूजा या ध्यान में बैठते हैं तो मन भटकने लगता है और अजीब-अजीब विचार आने लगते हैं. इस विषय पर प्रेमानंद जी महाराज ने बेहद सरल शब्दों में मन की प्रकृति और उससे पार पाने का मार्ग बताया है. उनके अनुसार आध्यात्मिक मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बाहरी दुनिया नहीं, बल्कि हमारा अपना मन होता है.
मन – आत्मा का चतुर मंत्री
महाराज जी मन की तुलना एक चतुर मंत्री से करते हैं और आत्मा को भोला राजा बताते हैं. यह मंत्री (मन) इंद्रियों के सुख की ओर भागता है और राजा (आत्मा) को भी उसी दिशा में ले जाने की कोशिश करता है. परिणामस्वरूप व्यक्ति सही-गलत जानते हुए भी कई बार भटक जाता है.
मन कभी सत्संग और भजन की प्रेरणा देता है, तो कभी अचानक सांसारिक इच्छाओं में उलझा देता है.
क्या साधना के समय आते हैं उल्टे-सीधे विचार? जानिए प्रेमानंद जी महाराज की सीख (Premanand Ji Maharaj Quotes)
प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि जब व्यक्ति नाम जप और साधना शुरू करता है तो मन विद्रोह करता है. बेचैनी, आलस्य, नकारात्मक विचार – ये सब मन की चालें हैं. लेकिन निरंतर अभ्यास से मन धीरे-धीरे वश में आने लगता है और विवेक (सही निर्णय लेने की शक्ति) जागृत होता है.
मन पर कैसे पाएं काबू?
- नियमित नाम जप करें.
- सत्संग सुनें.
- इंद्रियों पर संयम रखें.
- नकारात्मक विचारों से न घबराएं.
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