प्रेग्नेंसी से पहले की बीमारी क्या बन सकती है चिंता की वजह? स्टडी में सामने आए ये जोखिम

Pregnancy with with chronic Illness: प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ये बीमारियां होने पर मिसकैरेज और कॉम्प्लिकेशंस का जोखिम बढ़ सकता है. जानिए प्रेग्नेंसी के दौरान सुरक्षित रहने और देखभाल के जरूरी टिप्स.

Pregnancy with with chronic Illness: प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के लिए बेहद खास समय होता है. लेकिन अगर महिला पहले से किसी लंबे समय की बीमारी से जूझ रही है, तो प्रेग्नेंसी के दौरान थोड़ी ज्यादा सावधानी की जरूरत पड़ सकती है. हाल ही में सामने आई एक स्टडी में भी प्रेग्नेंसी की शुरुआत में पहले से मौजूद कई बीमारियों और कुछ pregnancy complications के बीच संबंध पाया गया है.

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पहले से कोई बीमारी होने पर मिसकैरेज या दूसरी परेशानी होना (Pregnancy with with chronic Illness) तय है. हर महिला की स्थिति अलग होती है. ऐसे में घबराने के बजाय सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और बीमारी को कंट्रोल में रखना ज्यादा जरूरी है.

कई बीमारियां होने पर बढ़ सकता है मिसकैरेज का जोखिम

द लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित रिसर्च में किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने प्रेग्नेंसी की शुरुआत में महिलाओं की पहले से मौजूद कई स्वास्थ्य समस्याओं और प्रेग्नेंसी आउटकम्स के बीच संबंध देखा. स्टडी के मुताबिक, कई लंबे समय से चली आ रही बीमारियों के साथ प्रेग्नेंसी शुरू करने वाली महिलाओं में मिसकैरेज (Pregnancy with with chronic Illness) का जोखिम करीब 20 प्रतिशत ज्यादा पाया गया.

सिर्फ मिसकैरेज ही नहीं, दूसरी परेशानियां भी

स्टडी में कुछ दूसरी प्रेगनेंसी कॉम्प्लिकेशन का जोखिम भी ज्यादा पाया गया. ऐसी महिलाओं में गंभीर nausea और vomiting यानी बहुत ज्यादा जी मिचलाने और उल्टी की समस्या का जोखिम करीब 69 प्रतिशत अधिक पाया गया.

वहीं, pre-eclampsia यानी प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी गंभीर स्थिति का जोखिम करीब 42 प्रतिशत ज्यादा देखा गया. इसलिए अगर महिला को पहले से कोई बीमारी है, तो प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित जांच को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

दो या उससे ज्यादा बीमारियां होने पर भी रखें ध्यान

रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी से पहले दो या उससे ज्यादा लंबे समय से चली आ रही बीमारियां थीं, उनमें anxiety और depression जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी ज्यादा पाया गया.

वहीं, तीन या उससे ज्यादा chronic conditions वाली महिलाओं में venous thromboembolism यानी नसों में खून का थक्का बनने से जुड़ी गंभीर समस्या का जोखिम भी ज्यादा देखा गया. इन आंकड़ों का मकसद डर पैदा करना नहीं है, बल्कि यह समझाना है कि ऐसी प्रेग्नेंसी में थोड़ी ज्यादा मेडिकल मॉनिटरिंग की जरूरत हो सकती है.

प्रेग्नेंसी के दौरान इन बातों को न करें नजरअंदाज

प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित चेकअप कराना, डॉक्टर की सलाह के मुताबिक जांच करवाना और बीमारी को कंट्रोल में रखना जरूरी है. अगर बहुत ज्यादा उल्टी हो, तेज सिरदर्द, नजर धुंधली होना, अचानक सूजन, सांस लेने में परेशानी, तेज पेट दर्द या ब्लीडिंग जैसी कोई समस्या हो, तो इसे सामान्य समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए. साथ ही अपनी दवा, डाइट या इलाज में खुद से बदलाव करने से बचें.

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By स्मिता दे

स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग इनकी रुचि है. ये लाइफस्टाइल, फूड, हेल्थ और ट्रेंडिंग टॉपिक्स कवर करती है. रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी उपयोगी और रोचक जानकारी रीडर्स तक पहुंचाना इन्हें पसंद है.

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