रात को फोन कमरे से बाहर रखने का ट्रेंड क्यों हो रहा है पॉपुलर? वजह जानकर आप भी आजमा सकते हैं ये तरीका

Phone Free Bedroom: रात में फोन देखने की आदत सिर्फ नींद ही नहीं, बल्कि आपके रिश्तों को भी प्रभावित कर सकती है. सोने के समय फोन को बेडरूम से बाहर रखने का चलन इसी वजह से चर्चा में है इससे पार्टनर या परिवार के साथ बातचीत के लिए ज्यादा समय मिल सकता है और रात की रूटीन में भी बदलाव महसूस हो सकता है.

Phone Free Bedroom: आज के समय में फोन हमारे दिन का ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिससे कुछ घंटे दूर रहना भी मुश्किल लगता है. सुबह आंख खुलते ही फोन देखना और रात को सोने से पहले आखिरी बार स्क्रीन चेक करना बहुत लोगों की रोज की आदत बन चुकी है. लेकिन अब इसी आदत में एक छोटा सा बदलाव करने पर जोर दिया जा रहा है. रात में सोने के समय फोन को बेडरूम से बाहर रखना. इसे फोन फ्री बेडरूम का तरीका कहा जा रहा है. इसका मकसद सिर्फ स्क्रीन टाइम कम करना नहीं है, बल्कि सोने से पहले फोन की लगातार मौजूदगी से खुद को दूर रखना है. खास बात यह है कि यह छोटी सी आदत आपकी नींद, रिश्तों और सुबह की दिनचर्या में भी बदलाव ला सकती है. भारत में बढ़ता डिजिटल यूसेज भी इस ट्रेंड को समझने की एक बड़ी वजह है. डिजिटल 2026 इंडिया के मुताबिक, 2025 के अंत तक भारत में 1.03 अरब इंटरनेट यूजर्स थे.

बेडरूम से फोन बाहर रखने का नया ट्रेंड क्या है?

फोन फ्री बेडरूम रूटीन का मतलब है कि सोने से करीब 30 से 60 मिनट पहले फोन को चार्जिंग के लिए बेडरूम से बाहर रख दिया जाए. इसके बाद रात में फोन देखने, सोशल मीडिया चलाने या बार बार नोटिफिकेशन चेक करने से बचा जाए. यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए कारगर हो सकता है जिन्हें रात में फोन हाथ में लेने के बाद पता ही नहीं चलता कि आधा या एक घंटा कब निकल गया.

सिर्फ स्क्रीन टाइम नहीं, फोन की मौजूदगी भी क्यों मायने रखती है?

सिर्फ ऐप लिमिट या स्क्रीन टाइम की सीमा लगाना एक तरीका है, लेकिन इसमें फोन आपके पास ही रहता है. ऐसे में नोटिफिकेशन, मैसेज या सोशल मीडिया देखने का मन फिर हो सकता है. इसके उलट फोन को दूसरे कमरे में रखने से उसे बार बार उठाने का मौका ही कम हो जाता है. यही वजह है कि डू नॉट डिस्टर्ब और फोन फ्री बेडरूम में प्रैक्टिकल फर्क है. पहले तरीके में फोन पास है लेकिन शांत है, जबकि दूसरे में फोन आपकी सोने की जगह से ही बाहर है.

रात में फोन और नींद के बीच क्या संबंध है?

रात में फोन इस्तेमाल और नींद के बीच संबंध पर कई रिसर्च हुए हैं. खासकर बच्चों और किशोरों में सोने के समय स्क्रीन इस्तेमाल को कम नींद और खराब नींद की क्वालिटी से जोड़ा गया है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फोन देखने वाला हर व्यक्ति खराब नींद का शिकार होगा. हाल के एक बड़े स्टडी में रोजाना स्क्रीन इस्तेमाल और नींद के बीच कुछ संबंध मिले, लेकिन असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं था. सोने के समय के आसपास स्क्रीन इस्तेमाल का संबंध ज्यादा ध्यान देने लायक पाया गया.

ओईसीडी के 14 देशों के स्टडी में भारत भी शामिल था. इसमें पाया गया कि पर्सनल इस्तेमाल के लिए रोजाना दो घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम रखने वाले लोगों में खराब पर्सनल वेल-बीइंग की पॉसिबिलिटी ज्यादा थी. साथ ही, नींद की कमी और कम फिजिकल एक्टिविटी जैसे लाइफस्टाइल से जुड़े कारणों का संबंध भी खुशहाली से मजबूत पाया गया.

अलग उम्र में फोन की आदत अलग हो सकती है

  • किशोर: रात में सोशल मीडिया, चैट और वीडियो देखने की आदत ज्यादा परेशानी पैदा कर सकती है.
  • युवा: काम के बाद भी मैसेज, सोशल मीडिया और मनोरंजन के लिए फोन इस्तेमाल करने से सोने का समय आगे खिसक सकता है.
  • बड़े लोग: फोन का इस्तेमाल कम हो सकता है, लेकिन रात में खबरें, वीडियो या मैसेज देखने की आदत नींद के समय को प्रभावित कर सकती है.

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में भी डिजिटल एडिक्शन को लेकर चिंता जताई गई है. इसमें जरूरत से ज्यादा डिजिटल इस्तेमाल को नींद में परेशानी, फोकस में कमी, बेचैनी और स्ट्रेस जैसी समस्याओं से जोड़ा गया है.

कपल्स और परिवार कैसे शुरू करें फोन फ्री बेडरूम रूटीन?

इसे अचानक बहुत सख्त नियम बनाने की जरूरत नहीं है. आप शुरुआत ऐसे कर सकते हैं.

  • सोने से 30 मिनट पहले फोन बाहर रखने का नियम बनाएं.
  • फोन को बेड के पास चार्ज करने की जगह किसी दूसरे कमरे में रखें.
  • सुबह अलार्म के लिए अलग अलार्म घड़ी इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • सोने से पहले 15 से 20 मिनट बातचीत, किताब पढ़ने या हल्का संगीत सुनने का समय रखें.
  • पूरे परिवार के लिए एक ही फोन फ्री समय फिक्स करें.

7 दिन का फोन फ्री बेडटाइम रूटीन आजमाएं

अगर आपको लगता है कि फोन आपकी रात की रूटीन बिगाड़ रहा है, तो सिर्फ 7 दिन का प्रयोग करके देखें. हर रात सोने से 30 से 60 मिनट पहले फोन बाहर रखें और सुबह उठकर तीन चीजें नोट करें. आप कितनी जल्दी सोए, सुबह कैसा महसूस हुआ और रात में पार्टनर या परिवार के साथ कितना समय बातचीत में बीता. सात दिन बाद खुद तुलना पहले दिन से करें. ऐसा जरूर हो सकता है आपको कोई बड़ा बदलाव न दिखे, लेकिन अगर नींद, सुबह की ताजगी या परिवार के साथ बातचीत में थोड़ा भी फर्क महसूस होता है, तो यह आदत आपके लिए काम कर सकती है. सबसे जरूरी बात यह है कि फोन को बेडरूम से बाहर रखना कोई जादुई इलाज नहीं है. हर व्यक्ति की जरूरत और फोन इस्तेमाल करने की वजह अलग होती है. लेकिन अगर रात में फोन बार बार आपका ध्यान खींचता है, तो उसे कुछ घंटों के लिए दूर रखना एक आसान और कम खर्च वाला प्रयोग जरूर साबित हो सकता है.

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लेखक के बारे में

By सौरभ पोद्दार

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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