Parenting Praise: बच्चों को आगे बढ़ाने में माता-पिता की कही छोटी-सी बात भी काफी मायने रखती है. जब बच्चा कोई नया काम सीखता है, अपनी परेशानी खुद हल करता है या किसी काम में पूरी कोशिश करता है, तो उसकी तारीफ करना उसका हौसला बढ़ा सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि तारीफ के लिए इस्तेमाल किए गए शब्द भी बच्चे की सोच पर असर डाल सकते हैं?
कई बार हम बच्चे को खुश करने के लिए तुरंत “बहुत होशियार हो” या “तुम तो सबसे अच्छे हो” कह देते हैं. वहीं, बच्चे ने किसी काम को पूरा करने के लिए कितनी मेहनत की, इस पर बात करना भी जरूरी है. आइए समझते हैं कि बच्चे की तारीफ करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
हर बार सिर्फ ‘शाबाश’ कहना जरूरी नहीं
बच्चे ने ड्रॉइंग बनाई और आपने कहा, "वाह, तुम तो बहुत अच्छे आर्टिस्ट हो." उसने कोई मुश्किल सवाल हल किया तो आपने कहा, "म बहुत स्मार्ट हो." ऐसी बातें सुनकर बच्चा खुश जरूर होता है, लेकिन तारीफ को थोड़ा और खास बनाया जा सकता है.
मिसाल के लिए, "तुमने इस ड्रॉइंग को बनाने में बहुत मेहनत की" या "तुमने सवाल समझने के लिए दोबारा कोशिश की" कहना ज्यादा बेहतर हो सकता है. इसमें बच्चे को यह पता चलता है कि उसकी कोशिश पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
मनोविज्ञान में इसे Person Praise और Process Praise के तौर पर समझाया जाता है. Person Praise में बच्चे की क्षमता की तारीफ होती है, जैसे “तुम बहुत होशियार हो.” वहीं Process Praise में बच्चे की मेहनत, तरीका और कोशिश की तारीफ की जाती है.
बच्चे की मेहनत पर ध्यान देना क्यों जरूरी है
अगर बच्चे को बार-बार यह सुनने को मिले कि वह बहुत स्मार्ट है या बहुत टैलेंटेड है, तो वह अपनी पहचान को उसी चीज से जोड़ सकता है. ऐसे में जब कोई काम मुश्किल हो जाए या उससे गलती हो जाए, तो उसे लग सकता है कि वह उतना अच्छा नहीं है.
इसके बजाय अगर आप उसकी मेहनत पर ध्यान देते हैं, तो बच्चे को यह समझ आता है कि किसी काम में अच्छा करने के लिए कोशिश करना भी जरूरी है. उदाहरण के लिए, बच्चा साइकिल चलाना सीख रहा है और गिरने के बाद फिर से उठता है, तो आप कह सकते हैं, “तुम गिरने के बाद फिर से कोशिश कर रहे हो, ये बहुत अच्छी बात है.”
इस तरह की बात बच्चे को यह समझने में मदद करती है कि गलती होने पर रुकना नहीं है.
रिसर्च में भी तारीफ के इस तरीके पर जोर
बच्चों की तारीफ को लेकर हुई रिसर्च में Process Praise पर काफी ध्यान दिया गया है. इसमें बच्चे की मेहनत, उसके तरीके और कोशिश को सराहा जाता है.
अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन से जुड़ी जानकारी में भी बच्चों की मेहनत और उनके काम करने के तरीके की तारीफ को चुनौती वाले कामों के लिए फायदेमंद बताया गया है.
2025 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह भी सामने आया कि 4 से 5 साल के बच्चे यह समझना शुरू कर देते हैं कि किसी की तारीफ उसके काम से कितनी जुड़ी हुई है. यानी बच्चों के लिए सिर्फ तारीफ सुनना ही जरूरी नहीं है, वे यह भी समझ सकते हैं कि उनकी तारीफ किस बात के लिए की जा रही है.
‘तुम बहुत होशियार हो’ कहने की जगह क्या बोलें
मान लीजिए बच्चे ने कोई मुश्किल पहेली पूरी की है. ऐसे में सिर्फ “तुम बहुत तेज हो” कहने के बजाय आप कह सकते हैं, “तुमने ध्यान से सारे टुकड़े देखे और फिर सही जगह लगाई.”
इसी तरह अगर बच्चे ने अच्छे नंबर पाए हैं तो सिर्फ “तुम बहुत होशियार हो” कहने के बजाय पूछ सकते हैं, “तुमने इस बार पढ़ाई कैसे की?” या “तुमने पढ़ने के लिए कौन सा तरीका अपनाया?”
इससे बच्चे का ध्यान सिर्फ रिजल्ट पर नहीं बल्कि उस मेहनत पर भी जाता है जो उसने वहां तक पहुंचने के लिए की है.
गलती होने पर भी सोच-समझकर बोलें
बच्चे से गलती होना बिल्कुल सामान्य है. ऐसे समय पर माता-पिता के शब्द बहुत मायने रखते हैं.
अगर बच्चा गणित का सवाल गलत कर देता है तो “तुम गणित में कमजोर हो” कहने के बजाय आप कह सकते हैं, “कहां गलती हुई, चलो फिर से देखते हैं.”
इस तरह बच्चे को अपनी गलती से सीखने का मौका मिलता है. उसे यह भी लगता है कि एक गलती का मतलब यह नहीं है कि वह किसी काम में खराब है.
बच्चे की तारीफ बंद करने की जरूरत नहीं
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि माता-पिता बच्चे की तारीफ करना बंद कर दें. बच्चे को प्यार और हौसला देना जरूरी है. बस तारीफ करते समय थोड़ा ध्यान रखें कि आप किस चीज के लिए उसकी तारीफ कर रहे हैं.
“तुम बहुत अच्छे हो” कहना गलत नहीं है. लेकिन इसके साथ अगर आप कहें, “तुमने बहुत कोशिश की” या “तुमने मुश्किल काम को छोड़ने के बजाय फिर से किया”, तो बच्चे को अपनी मेहनत की अहमियत भी समझ आती है.
छोटी-सी बात लगने वाली यह आदत बच्चे को मुश्किल कामों से भागने के बजाय उन्हें समझने और दोबारा कोशिश करने के लिए हौसला दे सकती है.
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