रात को बिस्तर पर जाते ही याद आने लगती हैं पुरानी बातें? दिमाग शांत करने के लिए जरूर अपनाएं ये 5 तरीके

Overthinking at Night: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि दिनभर थकने के बाद जैसे ही बिस्तर पर जाते हैं, पुरानी बातें और छोटी-बड़ी टेंशन दिमाग में घूमने लगती हैं? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं. कुछ आसान बदलाव आपकी इस आदत को कम कर सकते हैं और रात की नींद को सुकून भरा बना सकते हैं.

Overthinking at Night: दिनभर की भागदौड़, काम के स्ट्रेस और पूरी तरह थकने के बाद जब हम रात को सोने के लिए बिस्तर पर लेटते हैं, तो हमें लगता है कि अब तो तुरंत ही नींद आ जाएगी. लेकिन अक्सर लोगों के साथ ऐसा होता है कि वे बिस्तर पर लेट जाते हैं और नींद आने का इंतजार करने लगते हैं. इस समस्या से तो हममें से बहुत से लोग कभी न कभी गुजरे ही हैं कि जैसे ही सिर तकिए पर रखते हैं, हमारा दिमाग एकदम एक्टिव हो जाता है और पुरानी बातें, गलतियां या फिर किसी भी तरह की कोई बुरी बात हमें याद आने लगती है. कई बार तो हम इस बात को लेकर टेंशन में आ जाते हैं कि कल क्या होगा, या फिर काश! मैंने उस सिचुएशन में ऐसा किया होता.

अगर आपके साथ भी हर रात ऐसा ही होता है, तो इसी प्रॉब्लम को 'ओवरथिंकिंग' करना कहा जाता है. रात के सन्नाटे में ये बातें दिमाग में रील की तरह चलने लगती हैं और हमारी नींद को गायब कर देती हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको 5 बहुत ही आसान तरीके बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप रात को सोते समय अपने दिमाग को पूरी तरह से शांत कर सकते हैं.

दिमाग की सारी बातों को डायरी में लिख डालें

रात को जब आपके दिमाग में एक के बाद एक ख्याल आने लग जाएं, तो उन्हें अपने दिमाग में इधर से उधर घुमाने से बेहतर होगा कि आप उन बातों को एक डायरी या फिर कॉपी में लिख लें. आसान भाषा में इसे ही अपने दिमाग को खाली करना कहा जाता है. जब आप सभी टेंशन की बातों को कॉपी या डायरी में लिख लेते हैं, तो आपके दिमाग को लगने लगता है कि अब इन बातों को याद रखने की आपको जरूरत नहीं है, क्योंकि इन बातों को आपने संभालकर रख लिया है. इससे दिमाग को तुरंत आराम मिलता है और वह एक ही बात को बार-बार सोचना बंद कर देता है.

4-7-8 ब्रीदिंग फॉर्मूला अपनाएं

जब हम चीजों को हद से ज्यादा सोचने लग जाते हैं, तो हमारा दिमाग और शरीर स्ट्रेस में आ जाता है. इसे शांत करने का सबसे आसान और कारगर तरीका है सही तरीके से सांस लेना. सबसे पहले 4 सेकेंड तक नाक से सांस अंदर खींचें, फिर 7 सेकेंड तक सांस को रोककर रखें, और उसके बाद 8 सेकेंड में मुंह से धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें. इस प्रोसेस को 4 से 5 बार रिपीट करें. ऐसा करने से आपके दिमाग को सही मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है, बॉडी रिलैक्स होती है और दिमाग को सिग्नल मिलता है कि अब सोने का टाइम हो गया है.

सोने से 1 घंटे पहले फोन और टीवी बंद कर दें

आजकल हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि हम सोने से ठीक पहले तक फोन में कुछ न कुछ करते रहते हैं. अगर आपकी भी यही आदत है, तो बता दें कि स्मार्टफोन और टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे दिमाग को धोखा देती है. दिमाग को लगता है कि अभी भी दिन ही है, इसलिए वह नींद लाने वाले केमिकल यानी कि मेलाटोनिन को बनाना बंद कर देता है. रात में सोशल मीडिया देखने से दिमाग शांत होने के बजाय और ज्यादा एक्टिव हो जाता है. इस प्रॉब्लम से बचने के लिए रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन को खुद से दूर रख दें.

20 मिनट वाला रूल फॉलो करें

अगर आप बिस्तर पर लेटे हुए हैं और 20 मिनट बाद भी आपको नींद नहीं आ रही है, तो कभी भी आपको जबरदस्ती आंखें बंद करके लेटे रहने की गलती नहीं करनी चाहिए. बेहतर होगा कि आप बिस्तर से उठ जाएं और कमरे की लाइट धीमी करके किसी कुर्सी या फर्श पर बैठ जाएं. कोई हल्की-फुल्की किताब पढ़ लें या कोई शांत म्यूजिक सुन लें. जब आपको लगने लगे कि अब आंखें भारी हो रही हैं और थकान लग रही है, तभी वापस बिस्तर पर जाएं. इससे आपका दिमाग समझ जाएगा कि बिस्तर सिर्फ सोने के लिए है, फालतू बातें सोचने के लिए नहीं.

सोने और उठने का एक फिक्स टाइम सेट करें

हम सभी के शरीर के अंदर एक नेचुरल घड़ी होती है. अगर आप किसी दिन रात को 10 बजे सोने जाएंगे और दूसरे ही दिन रात के 2 बजे, तो इसकी वजह से आपका शरीर और दिमाग दोनों ही कंफ्यूज हो जाएंगे. इस प्रॉब्लम से बचने के लिए हर रात को एक ही फिक्स टाइम पर सोने जाएं और सुबह भी एक तय टाइम पर ही उठें. जब आपकी बॉडी को इस रूटीन की आदत हो जाएगी, तो रात को बिस्तर पर जाते ही आपको अपने आप नींद आने लगेगी और फालतू बातें सोचने का मौका ही नहीं मिलेगा.

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By सौरभ पोद्दार

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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