Success Story: जन्म से ही शारीरिक विकृति से पीड़ित चांदनी अपने पैरों पर ठीक से खड़ी नहीं हो पाती थी. चलना-फिरना उसके लिए बेहद कठिन था और उसका बचपन लगातार संघर्षों में बीता. बिहार के मधुबनी जिले की 18 वर्षीय चांदनी तीन वर्ष की उम्र से ही दोनों पैरों के घुटनों से मुड़े और तिरछे होने की गंभीर दिव्यांगता से जूझ रही थी. उम्र बढ़ने के साथ उसकी परेशानियाँ भी बढ़ती गईं, और उसे हर समय किसी सहारे की आवश्यकता पड़ती थी.
आर्थिक तंगी और इलाज की मुश्किलें
चांदनी अपने माता-पिता और चार भाई-बहनों के साथ रहती है. कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण परिवार बेहतर और महंगे इलाज की व्यवस्था नहीं कर सका. तमाम प्रयासों के बावजूद हर जगह से निराशा ही हाथ लगी.
उम्मीद की नई किरण
इसी बीच मीडिया और पारिवारिक संपर्कों के जरिए परिवार को उदयपुर स्थित नारायण सेवा संस्थान द्वारा किए जा रहे निःशुल्क पोलियो उपचार की जानकारी मिली. इससे परिवार के भीतर एक नई उम्मीद जगी.
नारायण सेवा संस्थान में सफल इलाज
मई 2024 में चांदनी को संस्थान लाया गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उसकी जांच की और निःशुल्क सर्जरी शुरू की. लगभग चार ऑपरेशन और दो बार इलिजारोव तकनीक से उसका सफल इलाज किया गया.
जीवन में आया बड़ा बदलाव
दिसंबर 2025 के फॉलोअप के दौरान चांदनी पहले से काफी बेहतर स्थिति में पाई गई. अब वह अधिक आत्मविश्वास के साथ खड़ी हो पा रही है और अपने भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही है.
उम्मीद और आत्मबल की मिसाल
चांदनी की यह कहानी केवल शारीरिक सुधार की नहीं, बल्कि नए जीवन, आत्मविश्वास और आशा की एक प्रेरणादायक शुरुआत है.
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