Joint Pain Reasons: आज के समय में जोड़ों का दर्द सिर्फ बुजुर्गों की समस्या बनकर नहीं रह गयी है. यह एक ऐसी प्रॉब्लम बन चुकी है जिससे 25 से 30 की उम्र के लोग भी काफी ज्यादा परेशान रहने लग गए हैं. बड़े बुजुर्गों की बात अलग है लेकिन जब कम उम्र के लोगों को भी यह प्रॉब्लम होती है तो समझ में नहीं आता है कि इसके पीछे कारण क्या है. अगर आपकी उम्र कम है लेकिन फिर भी आपके साथ ऐसा हो रहा है तो आज की यह आर्टिकल आपके काम की है. बता दें अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आपकी गलत आदतें हैं. अगर आप इन आदतों को समय रहते सुधारते नहीं हैं तो इसका काफी बुरा असर आपके जोड़ों के कार्टिलेज पर पड़ता है. आपकी इन आदतों की वजह से आपके कार्टिलेज सिर्फ डैमेज नहीं होते हैं, उनमें सूजन भी बढ़ने लगती है. अगर आप लंबे समय तक इन गलतियों को सुधारते नहीं हैं तो आगे चलकर ये ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गंभीर प्रॉब्लम डेवलप कर सकते हैं. तो चलिए इन गलतियों के बारे में विस्तार से जानते हैं ताकि आप इन्हें आज के आज ही सुधार लें.
लंबे समय तक एक ही कंडीशन में बैठे रहना
आजकल लोग एक ही जगह पर घंटों बैठे हए रहते हैं, चाहे बात ऑफिस डेस्क पर बैठकर घंटों काम करने की हो या फिर चेयर पर बैठकर मोबाइल या फिर लैपटॉप का इस्तेमाल करना. कई स्टडीज में यह पाया गया है कि लगातार एक ही जगह पर घंटों बैठे रहने से जोड़ों के आसपास का ब्लड सर्कुलेशन स्लो हो जाता है और सिनोवियल फ्लूइड, जिसका काम जोड़ों को चिकनाई देने का होता है, उसका नेचुरल फ्लो कम हो जाता है. अगर ऐसा हो तो इसकी वजह से आपके घुटनों, कमर और गर्दन में जकड़न की प्रॉब्लम होने लग जाती है. धीरे-धीरे यही कंडीशन आपके जोड़ों के घिसने का कारण बन सकती है.
फिजिकल एक्टिविटीज की कमी
अगर आपके शरीर को रेगुलर मूवमेंट करने का मौका नहीं मिलता है, तो कुछ ही समय में आपके मसल्स कमजोर होने लग जाते हैं. ऐसा होने की वजह से सारा का सारा प्रेशर जोड़ों पर पड़ने लगता है. कई रिसर्च इस बात की तरफ भी इशारा करती हैं कि अगर फिजिकल एक्टिविटी में कमी हो तो इसकी वजह से भी घुटनों और कूल्हों के जॉइंट्स जल्दी खराब हो सकते हैं. खासकर आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में जब लोगों ने चलना-फिरना तक काफी कम कर दिया है, तो इस प्रॉब्लम के बढ़ने की संभावना और भी ज्यादा बढ़ जाती है. अगर आप नहीं चाहते हैं कि ऐसा हो तो अपनी डेली रूटीन में लाइट एक्सरसाइज, वॉकिंग और योगा जैसी चीजों को शामिल करना जरूर शुरू कर दें.
शरीर का गलत वजन और मोटापा
जब आपके शरीर का वजन काफी ज्यादा बढ़ जाता है तो इसका डायरेक्ट असर आपके जोड़ों पर पड़ता है. खासतौर पर घुटनों और टखनों पर प्रेशर सबसे ज्यादा पड़ता है. कई साइंटिफिक रिसर्च में यह भी पाया गया है कि जब आपका वजन बढ़ा हुआ होता है तो आपके हर स्टेप लेने पर आपके जोड़ों पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है. ऐसा होने की वजह से आपके कार्टिलेज तेजी से घिसने लग जाते हैं. यह एक बड़ी वजह है कि जो लोग मोटापे से ग्रसित रहते हैं उन्हें जोड़ों में दूसरों से ज्यादा दर्द होता है और साथ ही ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा भी बढ़ जाता है. एक बैलेंस्ड डाइट और रेगुलर एक्सरसाइज से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
गलत पोश्चर और खराब बॉडी मैकेनिक्स
हर समय झुककर बैठे रहना, एक तरफ झुककर खड़े रहना या फिर गलत तरीके से किसी भी हैवी सामान को उठाना, आपके जोड़ों पर आसमान प्रेशर डालता है. मेडिकल फिजियोथेरेपी के अनुसार अगर आपका बॉडी पोश्चर हमेशा ही गलत रहे, तो इससे आपका नेचुरल स्ट्रक्चर अफेक्ट होने लगता है. इसकी वजह से दर्द, सूजन और शरीर को हिलाते-डुलाते समय आपको दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसा न हो इसके लिए आपको बैठने का सही पोश्चर अपनाना चाहिए, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना चाहिए और साथ ही भारी वजन उठाते समय एक सही तकनीक अपनाना शुरू कर देना चाहिए.
ठंडा माहौल और इर्रेगुलर लाइफस्टाइल भी हैं कारण
जब आप ठंडे माहौल में लंबे समय तक रहते हैं, तो आपके शरीर को पर्याप्त गर्माहट नहीं मिलती और इस वजह से भी आपके जोड़ों में जकड़न की प्रॉब्लम बढ़ सकती है. इसके अलावा कम पानी पीने की वजह से आपको डिहाइड्रेशन होती है जो आगे चलकर सिनोवियल फ्लूइड की क्वालिटी को अफेक्ट करती है. कई रिसर्च में यह पाया गया है, जब आपका शरीर हाइड्रेटेड रहता है तो इससे आपके जोड़ों को फ्लेक्सिबल और हेल्दी बने रहने में मदद मिलती है.
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