जयपुर का 400 साल पुराना गुलाल गोटा फिर हुआ वायरल, जानें क्यों है खास

जयपुर का 400 साल पुराना 'गुलाल गोटा' सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा वायरल? जानें इस शाही और इको-फ्रेंडली परंपरा की पूरी कहानी और देखें इसके बनाने का खास वीडियो.

Jaipur Gulal Gota Tradition Holi 2026: इस साल होली के मौके पर सोशल मीडिया और Instagram पर जयपुर की एक ऐसी परंपरा छाई हुई है, जिसने मॉडर्न रंगों के क्रेज को भी पीछे छोड़ दिया है. हम बात कर रहे हैं 400 साल पुराने गुलाल गोटा की, जो जयपुर के राजा-महाराजाओं की शाही होली का एक खास हिस्सा रहा है. लाख की बहुत पतली और नाजुक परतों के अंदर खुशबूदार गुलाल भरकर तैयार होने वाले ये गोटे जब हवा में फूटते हैं, तो रंगों की एक जादुई फुहार छोड़ते हैं. पुरानी यह कला आज न केवल एक Viral Trend बन चुकी है, बल्कि अपने शाही अंदाज की वजह से देश-दुनिया के लोगों और इन्फ्लुएंसर्स की पहली पसंद बनी हुई है.

क्या है गुलाल गोटा? (What is Gulal Gota)

गुलाल गोटा लाख (Lac) से बनी एक छोटी और बेहद नाजुक गेंद होती है. यह इतनी हल्की होती है कि किसी को मारने पर भी उसे चोट नहीं लगती, बल्कि टकराते ही यह गेंद फूट जाती है और अंदर भरा गुलाल हवा में बिखर जाता है.

गुलाल गोटा क्यों है इतना खास?

  • पूरी तरह इको-फ्रेंडली: इसे बनाने में लाख और हर्बल गुलाल का इस्तेमाल होता है, जो स्किन के लिए सुरक्षित है.
  • बेहद हल्का वजन: एक गुलाल गोटा का वजन मात्र 4 से 5 ग्राम होता है.
  • शाही एहसास: पुराने समय में जयपुर के महाराजा हाथी पर बैठकर जनता पर इन गोटों को फेंकते थे.
  • मेहनत का काम: इसे मशीनों से नहीं, बल्कि अनुभवी कारीगरों द्वारा फूंक मारकर तैयार किया जाता है.

जयपुर के कारीगर कैसे फूंक मारकर तैयार करते हैं यह जादुई गुलाल गोटा

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मेकिंग प्रोसेस: देखें कैसे कारीगर फूंक मारकर लाख को एक पतले बुलबुले का रूप देते हैं.

रंगों का धमाका: वीडियो में देखें जब यह गोटा हवा में फूटता है, तो कितना शानदार दृश्य (Aesthetic Look) बनता है.

कारीगरों की जुबानी: सुनिए जयपुर के पुराने मनिहारों से इस 400 साल पुरानी विरासत की कहानी.

कैसे बनाया जाता है यह ‘जादुई गोला’?

इसे बनाना किसी कलाकारी से कम नहीं है. जयपुर के मनिहारों के पास यह हुनर पीढ़ियों से चला आ रहा है

  • सबसे पहले लाख को गर्म करके पिघलाया जाता है.
  • इसके बाद एक पतली नली के जरिए फूंक मारकर उसे एक बुलबुले की तरह फुलाया जाता है.
  • जब यह एक पतली कांच जैसी परत बन जाती है, तो इसमें अच्छी क्वालिटी का गुलाल भरा जाता है.
  • अंत में इसे कागज की मदद से सील कर दिया जाता है.

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लेखक के बारे में

By Shubhra Laxmi

शुभ्रा लक्ष्मी लाइफस्टाइल और हेल्थ राइटर हैं। प्रभात खबर के साथ एक साल से जुड़ाव। हेल्थ, फैशन, फूड और न्यूमरोलॉजी में गहरी रुचि। इमोशनल डेप्थ और मोटिवेशनल इनसाइट्स के साथ लिखने का शौक।

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