Infertility Awareness: आज के समय में “इलाज से पहले बचाव” की सोच एक स्वस्थ समाज की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है. सही जानकारी, समय पर जांच और जागरूकता के जरिए हम कई बीमारियों को पहले ही रोक सकते हैं. इसी दिशा में काम करते हुए डॉ. सार्थक बक्शी ने न सिर्फ इलाज पर ध्यान दिया, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का भी महत्वपूर्ण प्रयास किया है. डॉ. सार्थक बक्शी Risaa IVF के संस्थापक और सीईओ हैं, जिनके पास 14 से ज्यादा वर्षों का अनुभव है. उन्होंने भारत, नेपाल और बांग्लादेश में हजारों परिवारों को माता-पिता बनने में मदद की है. साथ ही, Neos Angels के माध्यम से वे 35 से ज्यादा स्टार्टअप्स को सपोर्ट कर चुके हैं. आइए, आज हम आपको बताएंगे कि कैसे वे “इलाज से पहले बचाव” की सोच को आगे बढ़ाते हुए एक स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान दे रहे हैं.
बचाव की सोच, स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी
डॉ. सार्थक बक्शी का मानना है कि इन्फर्टिलिटी का इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी रोकथाम पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. आज की बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, देर से फैमिली प्लानिंग और गलत खान-पान जैसी आदतें धीरे-धीरे फर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं. ऐसे में अगर समय रहते अपने स्वास्थ्य को समझा जाए और सही कदम उठाए जाएं, तो कई समस्याओं से बचा जा सकता है. वे यह भी जोर देते हैं कि इसमें किसी तरह की शर्म महसूस करने की जरूरत नहीं है. एक बेहतर भविष्य के लिए महिला और पुरुष, दोनों को अपनी फर्टिलिटी की जांच करानी चाहिए. जागरूकता, सही लाइफस्टाइल और समय पर जांच से न केवल समस्याओं को रोका जा सकता है, बल्कि एक स्वस्थ और खुशहाल परिवार की नींव भी रखी जा सकती है. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए, वे कई सामाजिक पहलों से जुड़े हैं और हेल्थ-फोकस्ड टॉक्स, सेमिनार्स व पब्लिक प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लोगों तक सही जानकारी पहुंचा रहे हैं, ताकि लोग पहले से ही जागरूक होकर एक बेहतर और स्वस्थ भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सकें.
एक स्वस्थ भारत की ओर बढ़ते कदम
एक स्वस्थ भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए केवल इलाज को बेहतर बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक जागरूक, सुलभ और रोकथाम-आधारित बनाना भी उतना ही जरूरी है. डॉ. सार्थक बक्शी के विचारों के अनुसार, भविष्य का हेल्थकेयर ऐसा होना चाहिए जो जागरूकता, समय पर जांच और आधुनिक तकनीक, तीनों को साथ लेकर चले, ताकि हर व्यक्ति अपनी सेहत को लेकर पहले से ही सतर्क रह सके.
बचाव की सोच, स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी
- इलाज से पहले बचाव को प्राथमिकता देना, ताकि बीमारियों को शुरुआत में ही रोका जा सके.
- फर्टिलिटी और स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी हर वर्ग तक पहुंचाना, ताकि लोग बिना झिझक इस पर बात कर सकें.
- स्वास्थ्य सेवाओं को छोटे शहरों और दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना, जिससे हर व्यक्ति को समान सुविधा मिल सके.
- आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर इलाज को और अधिक सटीक व प्रभावी बनाना.
- सामाजिक पहलों, हेल्थ टॉक्स और जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को शिक्षित करना और समाज में फैले भ्रम को दूर करना.
छोटे कदम, बड़ा बदलाव
अंत में, एक स्वस्थ भारत की नींव तभी मजबूत हो सकती है जब हम “इलाज से पहले बचाव” को अपनी सोच और जीवनशैली का हिस्सा बनाएं. डॉ. बक्शी के विचार हमें यह समझाते हैं कि सही समय पर जागरूकता, खुलकर संवाद और नियमित जांच जैसे छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं. अगर हम आज अपनी सेहत को प्राथमिकता दें, तो आने वाला कल न केवल हमारे लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए अधिक सुरक्षित और स्वस्थ बन सकता है.
