Former women Naxals in Bastar: एक वक्त था, जब इन हाथों में बंदूक थी. आज वही हाथ साड़ी का पल्लू संभालते हुए रैंप पर तालियों के बीच आगे बढ़ रहे थे. चेहरे पर मुस्कान थी, कदमों में आत्मविश्वास और पहनावे में बस्तर की मिट्टी की खुशबू. रायपुर में National Handloom Day के मौके पर जब पूर्व महिला नक्सलियों ने Ramp Walk किया, तो यह सिर्फ फैशन का एक पल नहीं था. यह उन जिंदगियों की तस्वीर थी, जिन्होंने अतीत को पीछे छोड़कर खुद के लिए एक नई पहचान चुनी.
सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो में महिलाएं पारंपरिक साड़ियों में रैंप पर वॉक करती नजर आ रही हैं. उनके साथ नजर आ रहा है Chhattisgarh का Handloom और Kosa Silk. लेकिन इस पूरे दृश्य में सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है उनका आत्मविश्वास. क्योंकि यहां सिर्फ साड़ी नहीं चल रही थी, एक बदली हुई जिंदगी रैंप पर कदम बढ़ा रही थी.
Bastar Women Naxals: कभी बंदूक थी पहचान, अब साड़ी बनी पहचान
बस्तर का नाम सुनते ही दिमाग में घने जंगल, नक्सलवाद और संघर्ष की तस्वीर उभरती है. लेकिन बस्तर की कहानी सिर्फ इतनी नहीं है. इस जमीन की अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति है, अपनी कला है, अपने रंग हैं और सदियों पुरानी बुनकरी की परंपरा है.
गोंड, मुरिया, मारिया समेत कई आदिवासी समुदायों की संस्कृति बस्तर को अलग पहचान देती है. Handloom, Kosa Silk, हस्तशिल्प और पारंपरिक पहनावे इसी पहचान का हिस्सा हैं.
इसीलिए जब पूर्व महिला नक्सलियों ने इन्हीं पारंपरिक साड़ियों को पहनकर रैंप पर कदम रखा, तो तस्वीर का मतलब सिर्फ इतना नहीं था कि उन्होंने फैशन शो में हिस्सा लिया. इसके पीछे एक लंबा सफर था, संघर्ष से मुख्यधारा तक का, बंदूक से हुनर तक का और अतीत से नई पहचान तक का.
रैंप पर ग्लैमर कम, आत्मविश्वास ज्यादा दिखा
रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक साड़ियों के साथ सिल्वर ज्वेलरी, झुमके और देसी हेयरस्टाइल को चुना. कोई भारी-भरकम ग्लैमरस लुक नहीं, बल्कि वही अंदाज जिसमें छत्तीसगढ़ की मिट्टी और संस्कृति साफ दिखाई दे रही थी.
लेकिन इस पूरे लुक से ज्यादा खूबसूरत था उनका कॉन्फिडेंस
रैंप पर चलते हुए उनकी मुस्कान और बेझिझक अंदाज बता रहा था कि वे अब अपने अतीत से डरकर नहीं, बल्कि उसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं. कैमरों के सामने खड़े होने से लेकर लोगों की तालियों के बीच रैंप पर चलने तक, यह पल उनके लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं था.
यह सिर्फ फैशन शो नहीं, एक नई शुरुआत थी
किसी व्यक्ति की जिंदगी में बदलाव सिर्फ एक फैसले से नहीं आता. उसके लिए मौका चाहिए, भरोसा चाहिए और सबसे जरूरी है, समाज में दोबारा अपनी जगह बनाने का अवसर. नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाली इन महिलाओं के लिए यह रैंप वॉक उसी नई शुरुआत की एक झलक है. कभी जिनसे समाज डरता था, आज वही महिलाएं लोगों के सामने अपने आत्मविश्वास के साथ खड़ी हैं.
यही वजह है कि इस कार्यक्रम को सिर्फ Handloom को प्रमोट करने वाला आयोजन मानना कहानी को छोटा कर देना होगा. असली कहानी उन महिलाओं की है, जिन्हें यह मंच कह रहा था कि *आपका अतीत आपकी पूरी पहचान नहीं है.
साड़ी के हर धागे में छिपी है बस्तर की कहानी
रैंप पर दिखाई दीं साड़ियां सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं थीं. उनके हर रंग और हर धागे के पीछे स्थानीय बुनकरों की मेहनत और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत जुड़ी है.
Kosa Silk और Handloom को सामने रखकर आयोजित यह कार्यक्रम उस स्थानीय हुनर को भी मंच देता है, जो लंबे समय से बस्तर की पहचान रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार उस पहचान को पेश करने वाली महिलाएं भी एक ऐसी कहानी लेकर सामने आईं, जो खुद बदलाव की मिसाल है.
Dr. Anushka Sone ने भी साझा किया खास पल
Femina Miss India East 2026 Dr. Anushka Sone ने भी इस खास पल को अपने Instagram Reel के जरिए साझा किया. उन्होंने इस अनुभव को नई शुरुआत और नई पहचान से जोड़ते हुए बताया कि जब किसी इंसान को सही मौका और सही दिशा मिलती है, तो उसकी जिंदगी की कहानी बदल सकती है.
