दूसरे कमरे में गए और भूल गए क्या करने आए थे, क्या आपके साथ भी होता है ऐसा? जानिए इसके पीछे का कारण

Doorway Effect: क्या आप भी कभी किसी काम से दूसरे कमरे में जाते हैं और वहां पहुंचते ही भूल जाते हैं कि आखिर यहां क्यों आए थे? फिर वापस अपनी जगह पर आते ही सब कुछ याद आ जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो जानिए ऐसा क्यों होता है और इससे बचने के आसान तरीके.

Doorway Effect: क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? आप अपने ड्राइंग रूम में बैठे-बैठे सोचते हैं कि चलो किचन से पानी की बोतल लेकर आते हैं, या फिर बगल वाले कमरे से फोन का चार्जर ले आते हैं. लेकिन जैसे ही आप अपनी जगह से उठकर किचन या बगल वाले कमरे में जाते हैं, वहां पहुंचते ही आप शांत खड़े होकर सोचने लग जाते हैं. आप सोचते हैं कि आखिर मैं यहां किस काम से आया था? काफी देर खड़े होकर आप अपने दिमाग पर जोर डालते रहते हैं, लेकिन फिर भी कुछ याद नहीं आता है. आखिर में आप हार मानकर वापस अपने कमरे में आ जाते हैं. लेकिन सबसे मजेदार बात तो यह है कि जैसे ही आप अपनी कुर्सी या बिस्तर पर जाकर बैठते हैं, तुरंत आपको याद आ जाता है कि आप किस काम से दूसरे कमरे में गए थे.

अगर आपके साथ भी हर बार ऐसा होता है, तो आपको टेंशन लेने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है. इस चीज से सिर्फ आप अकेले परेशान नहीं हैं. इस परेशानी से दुनिया का लगभग हर इंसान जूझता है. साइंस की भाषा में इसे "डोरवे इफेक्ट" कहते हैं. यह कोई बीमारी नहीं है और न ही इससे यह पता चलता है कि आपकी याददाश्त कमजोर हो रही है. यह सिर्फ हमारे दिमाग के काम करने का एक मजेदार तरीका है, जिसके बारे में हम में से बहुत कम लोग जानते हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपको डोरवे इफेक्ट के बारे में कुछ बेहद दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं इनके बारे में.

डोरवे इफेक्ट क्या है और यह क्यों होता है?

हमारा दिमाग एक ही समय में बहुत सारी चीजों और ख्यालों को हैंडल कर रहा होता है. जब आप किसी कमरे में बैठे हुए होते हैं, तो आपका दिमाग वहां की लाइट, वहां रखी चीजों, टीवी की आवाज और माहौल को एक साथ समझ रहा होता है. लेकिन जैसे ही आप उस कमरे के दरवाजे को पार करते हैं और किसी दूसरे कमरे में कदम रखते हैं, तो आपका दिमाग उस दरवाजे को एक बाउंड्री समझ लेता है. साइंटिफिक रिसर्च के अनुसार हमारे दिमाग की एक आदत होती है. जैसे ही हम एक नया दरवाजा पार करते हैं, हमारा दिमाग पिछले कमरे की बातों को समेटकर एक फाइल बना लेता है. फिर वह उसे दिमाग के पिछले हिस्से में स्टोर कर देता है. हमारा दिमाग ऐसा इसलिए करता है ताकि नए कमरे के माहौल को समझने के लिए वह थोड़ी जगह बना सके. इसी वजह से जो छोटा सा काम आप दूसरे कमरे में करने गए थे, वह पुरानी फाइल के साथ आपके दिमाग के बैकग्राउंड में शिफ्ट हो जाता है और आप चीजें भूल जाते हैं.

दिमाग की वर्किंग मेमोरी

अगर बात करें अपने दिमाग की तो इसके पास एक वर्किंग मेमोरी होती है. इसे आप एक तरह से छोटी सी डायरी या फिर रफ कॉपी भी समझ सकते हैं. इसमें आप एक बार में सिर्फ थोड़ी सी जानकारी ही स्टोर करके रख सकते हैं. जब आप सोचते हैं कि मुझे बगल वाले कमरे से जाकर चार्जर लेकर आना है या फिर किचन से पानी की बोतल लेकर आनी है, तो यह बात दिमाग की उस रफ कॉपी में लिख जाती है. लेकिन जब आप रास्ते में चल रहे होते हैं और उसी समय आपका फोन रिंग कर जाता है, या कोई आपसे कुछ पूछ लेता है, या रास्ते में पड़ी किसी चीज पर आपका ध्यान चला जाता है, तो आपका दिमाग तुरंत चार्जर और पानी वाली बात को मिटाकर उस नयी चीज को रफ कॉपी में लिखकर रख लेता है. इसी का नतीजा होता है कि आप दूसरे कमरे में पहुंचकर पूरी तरह से ब्लैंक हो जाते हैं.

वापस पुरानी जगह आते ही सब याद क्यों आ जाता है?

जब आप बगल वाले कमरे से खाली हाथ वापस अपने पुराने कमरे में लौट आते हैं, तो आपका दिमाग फिर से उसी माहौल में पहुंच जाता है जहां आपने पहली बार चार्जर या फिर पानी की बोतल लाने के बारे में सोचा था. वहां का माहौल, वहां रखी चीजें और आपके बैठने की जगह आपके दिमाग के लिए बिल्कुल एक हिंट या सिग्नल की तरह काम करती हैं. इससे आपका दिमाग तुरंत उस पुरानी फाइल को खोल लेता है. और फिर आपको यह याद आ जाता है कि आप किस काम के लिए अपने कमरे से दूसरे कमरे में गए थे.

इस भूलने की आदत से कैसे बचें?

अगर आप चाहते हैं कि आपके साथ ऐसा बार बार न हो, तो आप ये बहुत ही आसान तरीके अपना सकते हैं. जब आप इन तरीकों को अपनाना शुरू कर देंगे, तो आपको फर्क खुद ही महसूस होने लग जाएगा.

  • बोल-बोल कर याद रखें: जब आप किसी काम से दूसरे कमरे में जाने लगें, तो मन ही मन में या धीरे से उस काम का नाम दोहराते रहें. जैसे कि चार्जर लाना है, चार्जर लाना है. ऐसा करने से आपका दिमाग भटकता नहीं है.
  • दिमाग में फोटो बनाएं: सिर्फ शब्द सोचने के बजाय, अपने दिमाग में एक छोटी सी फोटो या फिल्म बना लें कि आप जाकर चार्जर उठा रहे हैं. हमारा दिमाग शब्दों से ज्यादा फोटो को याद रखता है.
  • एक बार में एक ही काम करें: चलते समय फोन मत चलाइए और न ही बहुत सारी चीजें एक साथ सोचिए. जब ध्यान भटकता है, तभी आप बात और चीजों को भूलते हैं.
  • पुरानी जगह को याद करें: अगर आप दूसरे कमरे में जाकर भूल जाएं, तो घबराएं नहीं. बस जिस दरवाजे से आप आए थे, उसकी तरफ देखें या सोचें कि आप कहां बैठे थे. ऐसा करते ही आपके दिमाग को तुरंत हिंट मिल जाएगा.

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By सौरभ पोद्दार

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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