Dhakai Jamdani Saree: र्गा पूजा में अगर आप भी अपनी पसंदीदा ढाकाई जामदानी साड़ी पहनने की तैयारी कर रही हैं, तो इसे पहनने से पहले इसकी सही देखभाल जानना जरूरी है. ढाकाई जामदानी पहनते ही पूरा लुक निखर जाता है, लेकिन इसकी महीन बुनाई और नाजुक डिजाइन को देखते हुए इसे संभालना बाकी साड़ियों जितना आसान नहीं होता. खासकर साड़ी की सफाई और स्टोरेज में थोड़ी सी लापरवाही इसे नुकसान पहुंचा सकती है. कंटेंट क्रिएटर डॉ. खोनिका गोपे ने जामदानी की देखभाल को लेकर कुछ जरूरी बातें बताई हैं. आइए जानते हैं इसे कैसे साफ करें और ऐसे रखें कि दुर्गा पूजा में पहनने पर साड़ी बिल्कुल नई जैसी दिखे.
जामदानी गंदी हो जाए तो क्या करें ?
- जामदानी गंदी हो जाए तो क्या करें
- घर पर साड़ी को पानी में भिगोकर साफ करने से बचें.
- जिस विक्रेता से साड़ी खरीदी है, उससे सफाई के सही तरीके के बारे में पूछें.
- जरूरत होने पर इसे काटा वॉश के लिए भेजा जा सकता है.
क्या है काटा वॉश ?
- इस तरीके में साड़ी को एक फ्रेम पर फैलाकर साफ किया जाता है.
- इससे कपड़े को मरोड़ने या निचोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती.
- सफाई के दौरान महीन बुनाई और डिजाइन को संभालकर रखा जाता है.
- कुछ पारंपरिक तरीकों में रीठा जैसे हल्के क्लीनिंग एजेंट का इस्तेमाल भी किया जाता है.
क्या हर जामदानी को काटा वॉश ही चाहिए
हर जामदानी एक जैसी नहीं होती. कपड़े, धागे, रंग, बुनाई और जरी के हिसाब से उसकी देखभाल बदल सकती है. इसलिए महंगी या पुरानी जामदानी को साफ करने से पहले विक्रेता या हैंडलूम एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर है.
घर पर धोना हो तो इन बातों का रखें ध्यान
- केवल जरूरत होने पर ही धोएं.
- ठंडे पानी और हल्के, pH-न्यूट्रल डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें.
- साड़ी को रगड़ें या स्क्रब न करें.
- इसे मरोड़कर या निचोड़कर पानी न निकालें.
- वॉशिंग मशीन में जामदानी डालने से बचें.
- साड़ी को छांव वाली और हवादार जगह पर सुखाएं.
जरी वाली जामदानी कैसे रखें ?
- साड़ी को मोड़ते समय जरी वाला हिस्सा अंदर की तरफ रखें.
- बहुत कसकर मोड़कर या दबाकर न रखें.
- साड़ी को प्लास्टिक या पॉलीथिन में लंबे समय तक बंद न रखें.
- मुलायम मलमल या कॉटन के कपड़े में लपेटकर रखें.
- अलमारी में रखने से पहले साड़ी पूरी तरह सूखी होनी चाहिए.
काटा वॉश में कितना समय और खर्च
काटा वॉश में कुछ दिन से लेकर करीब एक सप्ताह तक लग सकता है. सिर्फ सफाई का खर्च कुछ सौ रुपये से शुरू हो सकता है, जबकि मरम्मत या पुराने कपड़े को ठीक करने की जरूरत होने पर खर्च बढ़ सकता है. साड़ी की उम्र और बुनाई के हिसाब से भी कीमत अलग हो सकती है.
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