घर से निकलने से पहले दही-शक्कर क्यों खिलाते हैं बड़े-बुजुर्ग? जानिए इसके पीछे की वजह

Dahi Shakkar Tradition: भारत में किसी भी शुभ काम, परीक्षा, इंटरव्यू या यात्रा से पहले दही-शक्कर खाने की परंपरा काफी पुरानी है. इसे सिर्फ एक रिवाज नहीं माना जाता, बल्कि इसके पीछे कई रोचक वजहें भी बताई जाती हैं.

Dahi Shakkar Tradition: आपने अक्सर देखा होगा कि जब कोई व्यक्ति परीक्षा देने, इंटरव्यू में जाने या किसी जरूरी काम के लिए घर से निकलता है, तो घर के बड़े उसे दही-शक्कर खिलाकर भेजते हैं. भारतीय परिवारों में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. माना जाता है कि दही-शक्कर खाने से दिन की शुरुआत अच्छी होती है और मन में अच्छा महसूस होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस परंपरा के पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं कि दही-शक्कर को इतना खास क्यों माना जाता है और इसका शरीर व मन पर क्या असर पड़ता है.

दही-शक्कर को क्यों माना जाता है शुभ?

भारतीय संस्कृति में दही और शक्कर दोनों को खास माना जाता है. दही को सुकून और पवित्रता से जोड़ा जाता है, जबकि शक्कर मिठास और खुशी का प्रतीक मानी जाती है. यही वजह है कि किसी नए या खास काम की शुरुआत से पहले दही-शक्कर खाने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है. इसी सोच के साथ लोग दही-शक्कर खाकर घर से निकलते हैं.

सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है दही-शक्कर

दही-शक्कर सिर्फ परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. दही में कैल्शियम, प्रोटीन और अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो पाचन को बेहतर रखने में मदद करते हैं. वहीं शक्कर शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है. जब कोई व्यक्ति किसी जरूरी काम के लिए निकलता है, तो उसे फुर्ती और फोकस की जरूरत होती है. ऐसे में दही-शक्कर मददगार साबित हो सकती है.

शरीर को देता है एनर्जी और कंफर्ट

दही की तासीर ठंडी मानी जाती है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है. दूसरी तरफ शक्कर तुरंत एनर्जी देने का काम करती है. इन दोनों का कॉम्बिनेशन शरीर को बैलेंस महसूस कराने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि कई लोग सुबह या किसी खास काम पर जाने से पहले दही-शक्कर खाना पसंद करते हैं.

मन में बढ़ाता है अच्छा एहसास

दही-शक्कर खाने की इस परंपरा का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि मन पर भी पड़ता है. जब कोई व्यक्ति बड़ों का आशीर्वाद लेकर घर से निकलता है, तो उसके अंदर एक अच्छा और पॉजिटिव एहसास आता है. यह एहसास उसका कॉन्फिडेंस बढ़ाने में मदद कर सकता है. कई बार किसी काम को बेहतर तरीके से करने में हमारी सोच और मन की स्थिति भी बड़ी भूमिका निभाती है. ऐसे में यह छोटी-सी परंपरा मन को अच्छा महसूस कराने और आत्मविश्वास बढ़ाने का काम करती है.

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By Anushka singh

अनुष्का सिंह प्रभात खबर डिजिटल में लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं. वह फैशन, ब्यूटी, स्किनकेयर, होम डेकोर, गार्डनिंग, घरेलू टिप्स और रोजमर्रा की लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर खबरें लिखती हैं. इसके अलावा वह बदलते लाइफस्टाइल ट्रेंड्स, मौसमी देखभाल, हेल्थ टिप्स और घर को बेहतर बनाने से जुड़ी उपयोगी जानकारी भी पाठकों तक पहुंचाती हैं. उन्होंने एमिटी यूनिवर्सिटी, रांची से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को आसान भाषा में सटीक, भरोसेमंद और उपयोगी जानकारी मिले, जिसे वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपना सकें.

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