Speech Delay in Children: 2 से 3 साल की उम्र तक ज्यादातर बच्चे छोटे-छोटे वाक्य बोलने लगते हैं और अपनी जरूरत भी बताने लगते हैं. लेकिन अगर आपका बच्चा इस उम्र में भी ठीक से नहीं बोल रहा है, तो सिर्फ यह सोचकर इंतजार न करें कि वह अपने आप बोलने लगेगा. कई बार इसके पीछे ऐसी वजह होती है, जिसे समय रहते समझना जरूरी होता है. इस बारे में डॉ. आर. के. चतुर्वेदी ने बताया कि बच्चा देर से क्यों बोलता है.
हर बच्चा एक जैसा नहीं होता
डॉ. चतुर्वेदी कहते हैं कि हर बच्चा अलग होता है. कुछ बच्चे जल्दी बोलना शुरू कर देते हैं, तो कुछ को थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. लेकिन अगर 2 से 3 साल की उम्र तक भी बच्चा बहुत कम बोल रहा है या बिल्कुल नहीं बोल रहा है, तो डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं.
गले या मुंह की बनावट भी हो सकती है वजह
कुछ बच्चों के गले में आवाज बनने वाली जगह (वोकल कॉर्ड) की बनावट सामान्य से अलग हो सकती है. वहीं, कुछ बच्चों की नाक में छोटी-सी गांठ या जन्म से बनी कोई रुकावट भी हो सकती है. इसकी वजह से उन्हें बोलने में परेशानी हो सकती है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर जांच करके सही वजह पता करते हैं और उसी के अनुसार इलाज या सलाह देते हैं.
कम सुनाई देना बन सकता है वजह
अगर बच्चे को आवाज साफ सुनाई नहीं देती, तो उसके लिए नए शब्द सीखना भी मुश्किल हो जाता है. इसलिए डॉक्टर जरूरत पड़ने पर सुनने की जांच करवाने की सलाह देते हैं. इससे पता चल जाता है कि बच्चे को सुनने में कोई दिक्कत है या नहीं.
बच्चे के लिए थेरेपी भी होती है
अगर जरूरत हो, तो बच्चे के लिए स्पीच थेरेपी कराई जाती है. इसमें बच्चे को खेल-खेल में बोलना सिखाया जाता है. साथ ही हियरिंग एक्सरसाइज भी कराई जाती है. इसमें बच्चे को अलग-अलग आवाज पहचानना, आवाज किस तरफ से आ रही है यह समझना, शब्द दोहराना और तस्वीर देखकर बोलने की कोशिश करना सिखाया जाता है. यह सब बच्चे की जरूरत के हिसाब से कराया जाता है.
कुछ बच्चों में परिवार से जुड़ी वजह भी हो सकती है
डॉ. चतुर्वेदी बताते हैं कि कुछ बच्चों में यह परेशानी परिवार से जुड़ी वजहों की वजह से भी हो सकती है. यानी अगर परिवार में पहले किसी बच्चे को देर से बोलने की समस्या रही है, तो दूसरे बच्चे में भी ऐसा देखने को मिल सकता है. ऐसे मामलों में डॉक्टर पूरी जांच करने के बाद आगे की सलाह देते हैं.
माता-पिता क्या करें?
अगर आपका बच्चा देर से बोल रहा है, तो घबराएं नहीं. उससे रोज बात करें. कहानी सुनाएं. गाने सुनाएं. तस्वीर दिखाकर चीजों के नाम बताएं. बच्चे को बोलने का मौका दें और उसकी हर छोटी कोशिश की तारीफ करें. सबसे जरूरी बात, बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा इंतजार न करें. समय पर सही जांच और सही मदद मिलने से कई बच्चों में अच्छा सुधार देखा जाता है.
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