Chanakya Niti: भारतीय ज्ञान परंपरा में नीति और व्यवहार की बात आते ही चाणक्य का नाम सबसे पहले लिया जाता है. उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जितनी सदियों पहले थीं. चाणक्य नीति में जीवन, संबंध और सामाजिक व्यवहार से जुड़े ऐसे नियम बताए गए हैं, जो व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा दोनों दिलाते हैं. इन्हीं में एक महत्वपूर्ण शिक्षा है – कुछ लोगों के बीच कभी नहीं बोलना चाहिए और न ही उनके बीच से गुजरना चाहिए.
चाणक्य नीति का श्लोक (Chanakya Niti Shlok)
विप्रयोर्विप्रवह्न्योश्च दम्पत्योः स्वामिभृत्ययोः।
अन्तरेण न गन्तव्यं हलस्य वृषभस्य च॥
श्लोक का अर्थ
इस श्लोक में बताया गया है कि दो ब्राह्मणों के बीच, ब्राह्मण और अग्नि के बीच, पति-पत्नी के बीच, स्वामी और सेवक के बीच तथा हल और बैल के बीच से कभी नहीं गुजरना चाहिए.
किन लोगों के बीच में कभी नहीं बोलना चाहिए?
- पति-पत्नी के बीच – जब वे आपस में बात कर रहे हों, तो उनके बीच बोलना या दखल देना विवाद को बढ़ा सकता है.
- गुरु या विद्वानों के बीच – दो ज्ञानी व्यक्तियों की चर्चा में बिना पूछे बोलना असम्मान माना जाता है.
- मालिक और कर्मचारी के बीच – आधिकारिक बातचीत में हस्तक्षेप करना आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है.
- दो लोगों की निजी बातचीत में – बिना अनुमति बीच में बोलना सामाजिक शिष्टाचार के खिलाफ है.
क्यों दी गई है यह सीख?
चाणक्य का मानना था कि हर परिस्थिति की एक मर्यादा होती है. गलत समय पर बोलना न केवल अपमानजनक हो सकता है, बल्कि आपके लिए खतरे या विवाद की वजह भी बन सकता है. इसलिए समझदारी इसी में है कि व्यक्ति माहौल को देखकर ही प्रतिक्रिया दे.
आज के दौर में भी यह नीति उतनी ही जरूरी है – सही समय पर चुप रहना भी एक बड़ी बुद्धिमानी है.
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