Bizarre Video Trending : अयोध्या में गरुड़देव ने की भगवान राम लला की परिक्रमा

Bizarre Video भगवान की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में कई चमत्कारिक घटनाएं हुईं हैं, उनमें से यह भी एक घटना है. इससे पहले एक बंदर भी भगवान की आरती के समय मंदिर पहुंच गया था,

Bizarre Video : भगवान श्रीराम के अयोध्या स्थित नवनिर्मित मंदिर में एक बाज ने भगवान की मूर्ति की परिक्रमा की और फिर बाहर चला गया. बाज को गरुड़ प्रजाति का पक्षी माना जाता है और इसे रामायण के गरुड़देव से जोड़कर देखा जा रहा है. यही वजह है कि राम मंदिर का यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है. इसे बीजेपी नेता संबित पात्रा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट किया है, साथ ही श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस वीडियो को एक्स पर पोस्ट किया गया.

रामायण में है जटायु का जिक्र


गौरतलब है कि बुधवार को यह पक्षी भगवान के गर्भ गृह में प्रवेश किया और भगवान की परिक्रमा करने के बाद वहां से चला गया. परिक्रम के बाद वह पक्षी कुछ देर के लिए प्रतिमा पर बैठा भी. रामायण में जटायु का जिक्र है जिसने माता सीता को रावण से बचाने के लिए युद्ध किया था. गरुड़ को भगवान विष्णु की सवारी भी माना जाता है.

बंदर ने किया भगवान का दर्शन


भगवान की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में कई चमत्कारिक घटनाएं हुईं हैं, उनमें से यह भी एक घटना है. इससे पहले एक बंदर भी भगवान की आरती के समय मंदिर पहुंच गया था, जिसे भगवान के परम भक्त हनुमान के रूप में देखा जा रहा है. गौरतलब है कि 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा स्थापित की गई है. जिसे अरुण योगिजराज ने बनाया है. उनका भी यह कहना है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रभु श्रीराम की मूर्ति की आंखें जीवंत हो गई हैं.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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