Bacterial Vaginosis in Periods: मासिक धर्म केवल रक्तस्राव को नियंत्रित करने तक ही सीमित नहीं है. यह वह समय भी है जब योनि का वातावरण अधिक संवेदनशील हो जाता है. भारत की आर्द्र जलवायु में, लंबे समय तक पैड का इस्तेमाल, गर्मी, नमी और घर्षण के साथ मिलकर योनि के नाजुक माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकता है. इसके सबसे गंभीर परिणामों में से एक जीवाणु संक्रमण (बैक्टीरियल वेजिनोसिस) है. यीस्ट संक्रमण पर तो व्यापक रूप से चर्चा होती है, लेकिन प्रजनन आयु की महिलाओं में सबसे सामान्य योनि संबंधी समस्याओं में से एक होने के बावजूद जीवाणु संक्रमण को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता है.
बैक्टीरियल वेजिनोसिस तब होता है जब योनि में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का स्तर कम होने होने से बैक्टीरिया का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और हानिकारक एनारोबिक बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है. बैक्टीरियल वेजिनोसिस या बीवी के सामान्य लक्षणों में पतला, धूसर-सफेद स्राव, तेज मछली जैसी गंध (जो अक्सर मासिक धर्म के बाद अधिक महसूस होती है), हल्की जलन या खुजली शामिल है. कई मामलों में तो कोई लक्षण ही नहीं दिखाई देते हैं.
मासिक धर्म के दौरान, अंतरंग क्षेत्र में पर्यावरणीय परिवर्तनों के कारण जोखिम बढ़ सकता है. सैनिटरी पैड, विशेष रूप से लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर, एक गर्म और नम सूक्ष्म वातावरण बनाते हैं. भारत की पहले से ही आर्द्र परिस्थितियों में, यह प्रभाव और भी तीव्र हो जाता है.
भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए), गाजियाबाद की अध्यक्ष डॉ. अल्पना कंसल कहती हैं, “मासिक चक्र के दौरान लंबे समय तक घर्षण, नमी और पसीने के कारण जननांग क्षेत्र के आसपास की विशेष रूप से नाजुक त्वचा में मासिक चक्र के दौरान जलन होने की आशंका अधिक होती है. हमारे पास आने वाली अधिकतर महिलाएं जलन की शिकायत करती हैं. ऐसे में सांस लेने योग्य, त्वचा के अनुकूल और सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकित सैनिटरी पैड असुविधा को कम करने में मदद कर सकते है, बशर्ते वे नियामक और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों.”
विशेषज्ञों का मानना है कि मोरिंगा युक्त सैनिटरी पैड घर्षण से होने वाली जलन को कम करने और त्वचा को आराम देने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि इसमें सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं. इसके रोगाणुरोधी गुण पैड की सतह पर हानिकारक रोगाणुओं की वृद्धि को सीमित करके एक स्वस्थ बाहरी वातावरण बनाने में योगदान दे सकते हैं. मोरिंगा के एंटीऑक्सीडेंट यौगिक नम परिस्थितियों में त्वचा की सुरक्षात्मक परत को होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं.
2025 में लाइफ पत्रिका में मौरिंगा पर हुआ एक अध्ययन प्रकाशित हुआ जिसमें इसके पत्तों के कुछ अर्क के सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुणों की प्रयोगशाला में पुष्ठि होने की बात कही गई है. इसमें मजबूत एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव भी पाए जाते हैं. शोधकर्ताओं ने इन गुणों का श्रेय फ्लेवोनोइड्स, पॉलीफेनोल्स, क्वेरसेटिन और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे जैव-सक्रिय यौगिकों को दिया. जो अंतरंग स्वच्छता और मासिक धर्म की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
