बच्चे को ज्यादा देर थमाया स्मार्टफोन तो हो सकते हैं भेंगेपन के शिकार, रिपोर्ट में खुलासा

मुंबई में हुए एक शोध और न्यूरोफथाल्मोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट की मानें तो मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. बच्चे यदि 04 घंटे से अधिक मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वे भेंगेपन का भी शिकार हो सकते हैं....

मोबाइल हमारी आवश्यक जरूरतों में से एक बनती जा रही है. बच्चे भी इसकी चपेट में है. लेकिन, किसी भी चीज का अत्याधिक उपयोग आपके सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. ऐसे में मुंबई में हुए एक शोध और न्यूरोफथाल्मोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के बारे जानकर शायद आप सतर्क हो जाएं…

आपने मोबाइल से सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में कई बार सुना होगा. लेकिन, किसी शोध में यह नहीं बताया जाता कि आपको कितने समय के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए. यह बात तो सच है कि आज के जमाने में यदि आप मोबाइल धारक नहीं है तो आप आउटडेटेड हैं. यहां तक कि बहुत सारी सुख-सुविधाओं का लाभ भी नहीं उठा पाएंगे.

वहीं यह भी कहना गलत नहीं होगा कि कई लोगों कि जिंदगी, रोजी-रोटी सब मोबाइल के माध्यम से ही चल रही है. ऐसे में मुबंई में हाल ही में हुए एक शोध में जो खुलासा हुआ है वह बेहद चौंकाने वाला है.

30 मीनट से ज्यादा मोबाइल का उपयोग खतरनाक

शोध में शामिल हुए डॉक्टर्स की मानें तो मोबाइल से निकलने वाली रेडियो फ्रिक्वेंसी आपको उच्च रक्तचाप का मरीज बना रही है. यही नहीं डॉक्टरों की मानें तो दिनभर में 30 मिनट से ज्यादा मोबाइल का उपयोग सेहत को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. जो लोग प्रतिदिन 30 मिनट्स से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं वे हाई बीपी का शिकार हो रहे हैं.

हाई बीपी कई रोगों का कारण

आपको बता दें कि हाई बीपी कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है. इसे समय पर कंट्रोल नहीं किया गया तो यह हार्ट स्ट्रोक, ब्रेन स्ट्रोक आंखों का धुंधलापन, किडनी की समस्या समेत अन्य रोगों को बढ़ाने का कार्य करता है.

चार घंटे से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल, भेंगेपन का शिकार

यही नहीं हाल ही में न्यूरोफथाल्मोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे यदि चार घंटे से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वे भेंगेपन के शिकार हो सकते हैं.

लगातार मोबाइल के इस्तेमाल से ये बीमारियां भी संभव

अन्य शोधों के मुताबिक मोबाइल का लगातार उपयोग करने से आंखों को नुकसान पहुंचता है. मोबाइल की स्क्रीन पर लगातार आंख गड़ाए रहने से रोशनी कमजोर होती है. साथ ही साथ व्यक्ति हमेशा खुद को तनावग्रस्त भी महसूस करता है. कलाई का सुनापन और नींद की समस्या या उससे होने वाले चिड़चिड़ेपन का भी शिकार होना पड़ता है.

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