बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 को ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है. इसके तहत मेडिकल स्टोर पर CCTV कैमरे लगाना जरूरी करने का प्रस्ताव रखा गया है.
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब लोकल सर्कल्स के एक सर्वे में दवाओं की बिक्री को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई. सर्वे में देशभर के 327 जिलों से 1 लाख 6 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया.
क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?
ड्राफ्ट के मुताबिक ड्रग्स रूल 65(2) के बाद नया सब रूल 2A जोड़ने का प्रस्ताव है. इसके तहत डॉक्टर की पर्ची पर दी जाने वाली दवाओं की बिक्री CCTV कैमरे की निगरानी में करने की बात कही गई है. इसका मकसद खास तौर पर शेड्यूल H, H1 और X दवाओं की बिक्री पर नजर रखना और बिना वैध पर्ची इनके इस्तेमाल को रोकना है.
इस प्रस्ताव पर ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी में चर्चा हो चुकी है. इसके बाद इसे ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से मंजूरी भी मिल चुकी है. अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं.
शेड्यूल H की दवाओं पर खास नजर
शेड्यूल H में कई ऐसी दवाएं शामिल हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना लेना ठीक नहीं माना जाता. इनमें कैंसर, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और एलर्जी जैसी समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं. इनका गलत इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है.
सर्वे में क्या सामने आया?
लोकल सर्कल्स के सर्वे के मुताबिक 64 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके मेडिकल स्टोर पर कभी या बहुत कम ही डॉक्टर की पर्ची मांगी जाती है. वहीं सिर्फ 15 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनका केमिस्ट ज्यादातर या हमेशा पर्ची देखकर ही दवा देता है.
सर्वे में यह भी सामने आया कि सिर्फ 31 प्रतिशत लोगों को ज्यादातर बार किसी क्वालिफाइड फार्मासिस्ट से मदद मिली. वहीं 13 प्रतिशत लोगों ने बताया कि दुकान पर मदद करने वाला व्यक्ति क्वालिफाइड फार्मासिस्ट नहीं था.
CCTV की अनिवार्यता का प्रस्ताव लागू होने पर दवाओं की बिक्री पर निगरानी बढ़ सकती है और बिना पर्ची मिलने वाली कुछ दवाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है.
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