बढ़ते वजन से ना हों परेशान, हिमाचली आटा करेगा मोटापा कंट्रोल, जानें खासियत

हिमाचल के गवेधुक के आटे से बनीं रोटियां खाकर अब मोटापा घटाया जा सकेगा. इस आटे की रोटियों के सेवन के बाद शरीर में चर्बी कम करने को मंहगी दवाओं के साथ-साथ जटिल चिकित्सीय उपचार की जरूरत नहीं होगी.

शिमला: अब मोटापा आपको जिन्दगी की दौड़ में पीछे होने को विवश नहीं कर पाएगा. मोटापे से तंग लोगों के लिए खुशखबरी है. हिमाचल के गवेधुक के आटे से बनीं रोटियां खाकर अब मोटापा घटाया जा सकेगा. इस आटे की रोटियों के सेवन के बाद शरीर में चर्बी कम करने को मंहगी दवाओं के साथ-साथ जटिल चिकित्सीय उपचार की जरूरत नहीं होगी.

हिमाचल सरकार इस विशेष तरह के प्राकृतिक फल का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली है. गवेधुक पौधे से चावल के आकार का दाना प्राप्त होता है. गवेधुक की खेती 1500 मीटर की ऊंचाई पर मध्य हिमालयी क्षेत्र में आसानी से की जा सकती है.

यहां किया गया है आटे पर अध्ययन

जोगिंद्रनगर के भारतीय चिकित्सा पद्धति अनुसंधान संस्थान के द्रव्य गुण एवं औषधीय पौध उत्कृष्टता केंद्र ने प्राचीन औषधीय पौधे गवेधुक पर शोध करने के बाद उसे खाने वाले आटे में तब्दील किया है. पिछले तीन वर्षों में विशेषज्ञ इस शोध में लगे थे, जिसमें अब कामयाबी मिली है.

मोटापे के समस्या से शर्तिया निजात

संस्थान के सूत्रों का कहना है कि इस आटे की रोटी खाने मोटापे की समस्या से तो निजात मिलेगी ही साथ ही शरीर में वसा की मात्रा भी कम की जा सकेगी. गवेधुक प्रकृति से कड़वा, तीखा, मधुर, शीतल, रूखा, लघु, कफ -पित्त को कम करने वाला और वातनाशन में सहायक होता है. गवेधुक का फल बुखार, जोड़ों के दर्द में भी लाभदायक होता है.

किसानों के लिए बनेगा आय का स्त्रोत

द्रव्य गुण एवं औषधीय पौध उत्कृष्टता केंद्र के प्रधान अन्वेषक डॉ. पंकज पालसरा ने बताया कि पांच हजार वर्ष पुराने आयुर्वेद की चरक संहिता में इस पौधे का उल्लेख है. संस्थान में इस पौधे पर पिछले तीन वर्षों से लगातार कार्य करते हुए संस्थान के अन्वेषकों ने प्राकृतिक तौर पर इसकी फसल तैयार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है

अब न केवल गवेधुक की खेती को किसान बड़े स्तर पर कर सकेगा बल्कि किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत भी साबित होगा.

Posted By- Suraj Thakur

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