suniel shetty :फिल्म वेलकम टू द जंगल सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. इस मल्टीस्टारर फिल्म का अहम हिस्सा अभिनेता सुनील शेट्टी भी हैं. इस फिल्म, कॉमेडी विधा और अक्षय कुमार के साथ उनके काम करने के अनुभवों पर उर्मिला कोरी के साथ हुई बातचीत
वेलकम टू द जंगल का हिस्सा बहुत बड़ी कास्ट है , इसकी शूटिंग का अनुभव कैसा रहा?
निश्चित तौर पर यह आसान नहीं था. सब कुछ स्क्रिप्ट और आपके आस-पास के एक्टर्स पर निर्भर करता है. फिल्म के सभी कलाकार काफी मंझे हुए हैं। कॉमेडी की सभी को अच्छी समझ थी. सभी एक दूसरे को जानते थे इसलिए एक्टर्स के लिए मुश्किल नहीं था, लेकिन प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और अक्षय के लिए इसे एक फ़ॉर्मैट में ढालना और शूट करना मुश्किल था. इसमें 30 एक्टर्स हैं और तालमेल बिठाना मुश्किल था क्योंकि सबको एक साथ लेकर शूटिंग करना आसान नहीं था, लेकिन निर्देशक अहमद खान ने इतनी बड़ी को कास्ट को बहुत खूबसूरती से पेश किया.
वेलकम टू द जंगल में एक बार फिर आप और अक्षय कुमार साथ नज़र आ रहे हैं ?
अक्षय की मस्ती ऑन कैमरा हो या ऑफ कैमरा रूकती नहीं है. एक बार मैं उनके ऑफिस में डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ बातचीत कर रहा था. हम मज़ाक-मस्ती कर रहे थे, तभी एक कॉल आया.अक्षय ने मोबाइल फ़ोन उठाया और फ़ोन पर बहुत अजीब तरीके से बातें कीं. मैंने पूछा कि वह किसके साथ बात कर रहा था ? फ़ोन पर कौन था ? तो उसने जवाब दिया कि उन्हें भी कोई अंदाज़ा नहीं है क्योंकि उन्होंने अपना नहीं मेरा फ़ोन उठाया था, इसलिए आप फ़ोन पर अब चेक करो कि कौन था.
जब आप वेलकम टू द जंगल जैसी मल्टी-स्टारर फ़िल्में करते हैं, तो क्या आपको इस बात की कोई असुरक्षा होती है कि आपको कितना स्क्रीन टाइम मिलेगा?
मैं एक बहुत ही सिक्योर इंसान हूँ. अगर आप अंदर से सुरक्षित महसूस करते हैं, तो आप इस तरह की चीजों को आसानी से संभाल सकते हैं. आप दो सीन को भी बेहतर बनाकर अपनी छाप छोड़ सकते हैं. मल्टी-स्टार कास्ट वाली फ़िल्मों की यही ख़ूबसूरती है, जिसे आज की पीढ़ी नहीं समझती है. इंडस्टी जिस तरह के बुरे दौर से जूझ रही है. टिकट खिड़की पर फिल्में कमाल नहीं कर पा रही हैं. मुझे लगता है कि मल्टीस्टारर फिल्में एकमात्र सफलता का रास्ता हैं
एक बार फिर परदे पर एक्शन फिल्मों की डिमांड बढ़ी हैं.क्या आप अपने एक्शन हीरो के अवतार में फिर से दिखना चाहेंगे ?
मैं ऐसा करना चाहूँगा, लेकिन इसके लिए किसी को फ़िल्म में पैसा लगाना होगा. यह समझना ज़रूरी है कि आज आपकी क्या स्थिति है. हमें अपनी मार्केट वैल्यू समझनी चाहिए और यह भी कि प्रोड्यूसर कैसे आपको सही तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि वे हर तरह की फ़िल्में बना सकें. इस तरह का हिसाब-किताब रखना ज़रूरी है और मेरा मानना है कि अब दुनिया बदल गई है. शाहरुख़, आमिर, सलमान या सनी देओल जैसे कलाकार फ़िल्म से जुड़ते हैं और फ़िल्म पूरी होने पर अपनी फ़ीस लेते हैं. वहीं अजय जैसे कलाकार भी हैं जो फ़िल्म में पूरी तरह शामिल होते हैं और एक अच्छी फ़िल्म बनाते हैं.
आजकल एक्शन फ़िल्मों में हिंसा को बहुत ही वीभत्स तरीके से दिखाया जाता है, आप इसे कितना सही मानते हैं ?
अगर फ़िल्म किसी सच्ची कहानी या असल घटनाओं पर आधारित होती है, तो सच्चाई दिखाने की कोशिश होती है क्योंकि वे असल ज़िंदगी के करीब होती हैं। यह सब विषय पर निर्भर करता है। अगर आप पूरी ईमानदारी नहीं दिखाते, तो बात नहीं बनत
आप अभी भी बेहद फिट हैं, किस तरह से अपनी फिटनेस का ख्याल रखते हैं?
मुझे लगता है कि अपनी सेहत और फ़िटनेस के मामले में मैं हमेशा खुद के प्रति ईमानदार रहा हूँ। मुझे अपने माता-पिता से अच्छे जींस मिले हैं। मैं एक घंटा जिम में बिताता हूँ और तीन से चार घंटे अपनी नातिन के साथ रहता हूँ, जो एक तरह से भारी कार्डियो वर्कआउट ही है.
