holi 2026:भारतीय सिनेमा के सुपरहिट होली गीतों में कई ऐसे सदाबाहर गाने हैं. जिनके बिना दशकों बाद भी होली का जश्न अधूरा है.ऐसा ही एक गीत 1982 में राजश्री प्रोडक्शंस की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म नदिया के पार का “जोगी जी वाह “गीत है. ब्रज के लोकगीत की झलक लिए इस होली गीत की शूटिंग भी बेहद दिलचस्प रही है. इस गाने और फिल्म के होली सीक्वेंस पर फिल्म की अभिनेत्री साधना सिंह उर्फ गुंजा ने उर्मिला कोरी से कई दिलचस्प खुलासे किये. पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश
दिसंबर की ठण्ड में खेली गयी थी होली
फगुआ के आइकॉनिक गीतों में शुमार “जोगी जी वाह ” गाने की शूटिंग की बात करें तो शूटिंग दिसंबर की ठण्ड में हुई थी ,जैसा की सभी को पता है कि फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश के जौनपुर में की गई थी. मुख्य रूप से केराकत तहसील के बिजयपुर और राजेपुर गांवों में हुई थी.जहां दिसंबर में तामपान 10 डिग्री के नीचे पहुँच जाता था.अभिनेत्री साधना सिंह बताती हैं कि दिसंबर में होली खेलना आसान नहीं होगा. यह बात निर्देशक गोविन्द मूनिस और उनकी टीम जानती थी, इसलिए “जोगी जी” गाने की शूटिंग दोपहर में रखी गयी थी. धूप निकली थी तो अच्छा लग रहा था. वैसे भी उस गाने में पानी नहीं सिर्फ गुलाल इस्तेमाल किया गया था, लेकिन दिक्कत गाने के बाद के होली सीक्वेंस का था. सचिन पर सिर्फ एक लोटा भर रंग डाला गया था. मुझ पर बाल्टी भर रंग डाल दिया गया था.उसके बाद के सीन में फिल्म में मैं जबरदस्त कांप भी रही थी.वह बिलकुल असली था.
जोगी जी का आधा गाना मुंबई में इस वजह से हुआ था शूट
इस यादगार होली गीत से सिंगर हेमलता,चन्द्राणी मुखर्जी,जसपाल सिंह और सुशील कुमार जुड़े थे.संगीत स्वर्गीय रविंद्र जैन ने दिया था.अभिनेत्री साधना सिंह गाने की शूटिंग को याद करते हुए बताती हैं कि फिल्म में “जोगी जी” गाना दो जगहों पर हो रहा है. एक जगह चन्दन अपने दोस्तों के साथ बाहर डांस कर रहा है और दूसरी जगह गुंजा गांव की सभी औरतों के साथ मिलकर एक घर में डांस कर रही है .बाहर वाला पूरा सीक्वेंस जौनपुर के गांव में ही हुआ था,लेकिन महिलाओं के साथ गुंजा का सीक्वेंस मुंबई में शूट हुआ था. दरअसल गांव में उतनी तादाद में महिलाएं मिल नहीं रही थी इसलिए तय हुआ कि गाने का यह हिस्सा मुंबई जाकर शूट किया जायेगा.मुंबई के सेट पर ढेर सारी महिलाओं के बीच यह शूट हुआ.इस गाने की शूटिंग जौनपुर और मुंबई दोनों मिला दें तो दो से तीन दिन तक पूरी हुई थी.
रंगों से चेहरे ऐसे रंग गए थे कि दो दिन शूटिंग रोक दी गयी थी
अभिनेत्री साधना सिंह गाने से जुड़ी यादों को याद करते हुए बताती हैं कि “जोगी जी वाह” गीत के दौरान गुलाल का इस्तेमाल हुआ है लेकिन उसके बाद रंग और पानी से होली हुई है. सेट पर हमारे लिए वह असल होली बन गयी थी. यही वजह थी कि सीन खत्म होने के बाद भी हमारी होली जारी रही थी. उस ज़माने में इको फ्रेंडली रंग नहीं होते थे. पक्के होते थे तो लगभग पूरी कास्ट पक्के रंग से रंग गयी थी. जिसका कुछ घंटे में निकलना नामुमकिन था. जिस वजह से शूटिंग को दो दिन तक रोक दिया गया था ताकि हम अपने पुराने रंग में वापस आ जाए.होली सीक्वेंस की शूटिंग हेक्टिक भी थी, इसलिए दो दिन का रेस्ट भी सभी के लिए जरुरी था.
रंग से चन्दन के चेहरे पर दाढ़ी मूंछ बनाना साधना सिंह का था आईडिया
अभिनेत्री साधना सिंह की मानें तो निजी जिंदगी में वह गुंजा की तरह ही थी इसलिए निर्देशक गोविन्द मूनिस ने किरदार में बहुत हद तक साधना सिंह के व्यक्तित्व से जुड़ी चीजों को शामिल करने की कोशिश की थी.साधना सिंह कानपुर से थी इसलिए उन्हें बोलचाल के वक़्त भक बोलने की आदत थी. जिसे फिल्म में गूंजा के बोलचाल में भी जोड़ा गया था. फिल्म के होली सीक्वेंस की तैयारी को लेकर जब निर्देशक गोविन्द मुनीस साधना से बातचीत कर रहे थे तो उन्होंने बातों बात अपनी एक शरारत के बारे में बताया कि उनकी सहेली का भाई एक बार ड्रिंक करके सो गया था. उठ नहीं रहा था तो उन्होंने रंगों की मदद से उसका चेहरा बन्दर जैसा रंग दिया। गोविन्द मुनीस ने साधना सिंह की इस शरारत को अपनी इस फिल्म का भी हिस्सा बना लिया। जिस वजह से होली की सुबह सोते हुए चन्दन के चेहरे पर गुंजा भी रंगों से दाढ़ी मूंछ बनाती है.
इस वजह से साधना सिंह को छड़ी से पड़ी थी मार
साधना सिंह ने 17 साल की उम्र में राजश्री की इसी फिल्म ‘नदिया के पार ‘से अभिनय में अपनी शुरुआत की थी. वह सुरों की पक्की थी लेकिन एक्टिंग और डांसिंग की उन्हें समझ नहीं थी.उनकी बहन राजश्री की फिल्म पायल की झंकार का हिस्सा थी. अपनी बहन के साथ रहने के लिए वह छुट्टियों में कानपुर से मुंबई आयी थी और उस फिल्म के सेट पर निर्देशक गोविन्द मुनीस ने उन्हें देखा और कहा कि उन्हें उनकी गुंजा मिल गयी. फिल्म की शूटिंग के वक़्त साधना सिंह को कभी लगा ही नहीं वह एक्टिंग कर रही थी. उन्हें गुंजा का किरदार अपनी तरह का लगता था.सबसे मुश्किल उनके लिए डांस था. फिल्म के दूसरे गानों में डांस की ज्यादा जरूरत नहीं थी,लेकिन होली के “जोगी जी गीत” में ढेर सारा डांस था. जिसकी रिहर्सल मुंबई में कई दिनों तक चली थी.साधना सिंह की मानें तो डांस उनके लिए मुश्किल था. इसलिए कई बार वह स्टेप्स भूल जाती थी. खासकर ताली वाला. गाने के डांस टीचर बद्री प्रसाद जी एक पतली से छड़ी अपने पास रखते थे. जैसे ही साधना गलत स्टेप्स करती थी. उनके पैर पर वह छड़ी पड़ती थी.रिहर्सल में उनके पैर छड़ी की मार कई बार पड़ी थी,लेकिन चेहरे पर कोई शिकायत नहीं होती थी क्योंकि वह उनके लिए गुरु थे और उस वक़्त गुरु का सम्मान सबसे अहम होता था.
