दोपहर का वक्त था. फिल्म सिटी के भव्य सेट पर 'खलनायक' के सुपरहिट गाने 'चोली के पीछे क्या है..' की शूटिंग चल रही थी. कैमरा रुका, डायरेक्टर ने "कट" कहा और बड़े सितारे अपनी-अपनी वैनिटी वैन में लौट गए. लेकिन एक चेहरा फिर भीड़ में खो गया. वह थीं रुबीना खान. वही रुबीना, जिन्होंने सितारों के साथ स्क्रीन शेयर की, मगर खुद हमेशा उन बैकग्राउंड डांसर्स में गिनी गईं, जिनकी मेहनत तो हर फ्रेम में दिखती है, लेकिन नाम फिल्म के आखिरी क्रेडिट्स में भी शायद ही कभी नजर आते हैं.
चार दशक... यानी पूरे 40 साल बाद एक वीडियो आता है. उसमें अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, ऋषि कपूर, करीना कपूर जैसे कई बड़े सितारों संग ताल से ताल मिलाती नजर आती हैं. इसी के बाद रूबीना, भीड़ से निकलकर रूबीना खान हो जाती हैं. 17 जून 2026 से पहले रूबीना को शायद ही कोई ठीक से पहचान भी पाता. और पहचानता भी कैसे, तालियां तो हमेशा सितारों के हिस्से आईं, रूबीना भीड़ का हिस्सा रहीं.
17 जून 2026 को कुछ नया हुआ, आपने देखा? 2 करोड़ से ज्यादा व्यूज आ चुके हैं
किसी ने रूबीना से एक दिन कहा कि तुम डांस तो अच्छा करती ही हो, अपना वीडियो इंस्टा पर क्यों नहीं डालती. हमने उनकी प्रोफाइल देखी. कुछ 20 मिनट तक स्क्रॉल करते रहे. हम 22 जून 2022 तक पहुंचे. हमने देखा कि रूबीना ने यहां भी कम स्ट्रगल नहीं किया. वो हर तरह के वीडियोज डालती रहीं, लेकिन किसी पर 200, किसी पर 250 व्यूज आते रहे. फिर आया 17 जून 2026… रूबीना ने नए वीडियो बनाने की बजाए अपने वो वीडियोज ढूढ़े जिनमें कहीं दिव्या भारती तो कभी रवीना टंडन के पीछे वो डांस कर रही थीं. उन्होंने अपने चेहरे पर गोला बनाया और पोस्ट कर दिया. लोगों ने लिखा, "अरे, ये तो हर दौर के गानों में दिखती थीं." लेकिन वीडियो के पीछे छिपी उनकी असली जिंदगी ने व्यूवर्स को सोचने पर मजबूर कर दिया.
अब रूबीना के पास इंटरव्यूज देने के लिए कॉल आने लगीं. रूबीना शायद ’एंफ्लूएंसर’ हो गई हैं. जब हम यह खबर लिख रहे हैं तो उनके 13.9 हजार फॉलोवर भी हो चुके हैं.
लेकिन 17 जून से पहले के 40 साल कैसे थे…
बॉलीवुड को 40 साल देने वाली रुबीना आज जब मुंबई की लोकल ट्रेन से निकलती है तो मन में सिर्फ एक सवाल कि "शायद आज काम मिल जाए."
महीने में मुश्किल से एक या दो प्रोजेक्ट मिलते हैं. पूरी कमाई 20 से 25 हजार रुपये के बीच सिमट जाती है.
वह कहती हैं, "मुंबई जैसे शहर में 20 हजार रुपये में घर कैसे चले? किराया, राशन, बिजली, दवाई... सबकुछ इसी में करना पड़ता है. मैं सिंगल मदर हूं. बेटी की पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. इसलिए चाहे कितनी भी थक जाऊं, अगले दिन फिर लोकल ट्रेन पकड़कर निकलना ही पड़ता है." बताते चलें वह मुंबई के नालासोपारा में किराए के 1RK घर में रहती हैं, जिसका किराया ही करीब 5 हजार रुपये है. सीमित काम और कम आमदनी के कारण रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन भी उनके लिए आसान नहीं है. चार दशक तक इंडस्ट्री का हिस्सा रहने के बावजूद उनकी जिंदगी आज भी संघर्ष के साथ आगे बढ़ रही है.
वो दिन, जब नाश्ता करने के पैसे नहीं थे…
रुबीना की आवाज उस वक्त भर आती है, जब वह 2020 से 2023 को याद करती हैं. बताने की जरूरत नहीं है ये वही समय था जब कोविड के चलते फिल्में कम बनीं. वह कहती हैं कि चार साल तक काम लगभग पूरी तरह बंद हो गया था. जो थोड़ी-बहुत बचत थी, वह धीरे-धीरे खत्म हो गई. हालत ऐसी हो गई कि कई बार घर में राशन खरीदने तक के पैसे नहीं बचे.
"ऐसे दिन भी आए, जब समझ नहीं आता था कि कल खाना कैसे बनेगा. कई रातें इसी चिंता में बीतीं. उस वक्त डांसर्स यूनियन ने कभी दो हजार रुपये दिए, तो कभी राशन का बैग पहुंचाया. अगर यूनियन साथ नहीं खड़ी होती, तो शायद हालात और भी खराब हो जाते."
यह कहते हुए रुबीना मानो उन दिनों में लौट जाती हैं, जब चमकती फिल्मी दुनिया से जुड़े होने के बावजूद उनके अपने घर का चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया था.
'मेहनत हमारी, पैसा कोई और ले जाता था'
संघर्ष सिर्फ काम मिलने का नहीं था. रुबीना बताती हैं कि शुरुआती दिनों में कई कॉन्ट्रैक्टर डांसर्स की मेहनत की कमाई का हिस्सा खुद रख लेते थे. कई बार पूरा मेहनताना भी नहीं मिलता था.
"गुस्सा बहुत आता था, लेकिन बोल नहीं सकते थे. डर रहता था कि अगर आवाज उठाई तो अगली बार काम ही नहीं मिलेगा. इसलिए चुप रहकर सब सहना पड़ता था."
'पहले अपनापन था, अब सब बदल गया'
उनके मुताबिक, पुराने दौर के कई बड़े कलाकार बैकग्राउंड डांसर्स को भी सम्मान देते थे. उनसे बात करते थे, हालचाल पूछते थे और उन्हें अपनी टीम का हिस्सा मानते थे. हालांकि उनका अनुभव हर किसी के साथ ऐसा नहीं रहा. उन्होंने बताया कि दिव्या भारती और ममता कुलकर्णी ने कभी उनसे ढंग से बात नहीं की.
वहीं आज की पीढ़ी को लेकर वह कहती हैं कि इंडस्ट्री पहले जैसी नहीं रही. "अब सब अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं. पहले जैसा अपनापन और सम्मान बहुत कम महसूस होता है." हाल ही में उन्होंने शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान के साथ एक विज्ञापन में काम किया और फिल्म आर्चीज में भी नजर आईं.
पर्दे पर मुस्कान, असल जिंदगी में संघर्ष
आज भी जब टीवी पर कोई पुराना सुपरहिट गाना चलता है, तो कहीं न कहीं उसी फ्रेम में रुबीना खान मुस्कुराती हुई नजर आ जाती हैं. दर्शक गाना देखते हैं, सितारों की तारीफ करते हैं, लेकिन शायद ही कोई सोचता होगा कि उसी गाने में नजर आने वाली यह कलाकार अगली सुबह लोकल ट्रेन में सीट मिलने की उम्मीद लेकर सफर करती है.
कैमरे के सामने जिन कदमों ने करोड़ों लोगों का मनोरंजन किया, वही कदम आज भी स्टूडियो के बाहर काम का इंतजार करते हैं. जिन हाथों ने बॉलीवुड के सबसे बड़े गानों को यादगार बनाया, वही हाथ महीने के आखिर में घर का बजट जोड़ते हैं.
रुबीना खान की कहानी सिर्फ एक बैकग्राउंड डांसर की नहीं है. यह उन हजारों गुमनाम कलाकारों की कहानी है, जिनकी मेहनत पर बॉलीवुड की चमक खड़ी है, लेकिन जिनके हिस्से में न शोहरत आती है, न दौलत.
बॉलीवुड अपने सितारों को हमेशा याद रखता है, लेकिन उन चेहरों को अक्सर भुला देता है, जिन्होंने उन सितारों की चमक को और भी बड़ा बनाया. रुबीना खान की कहानी उसी भूली हुई दुनिया का आईना है... जहां तालियां किसी और के हिस्से में जाती हैं और संघर्ष किसी और की किस्मत बन जाता है.
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