Ohh My Dog Movie Review :इंसान और जानवर के खूबसूरत रिश्ते की कहानी में "ऑस्कर"है स्टार

ऑस्कर फिल्म की कहानी का असल हीरो है. पर्दे पर जब तक वह नज़र आता है. किसी और पहलू पर ध्यान नहीं जाता है.

फ़िल्म - ओह माय डॉग

निर्माता - सना वारसी,अमित राय और राजेश भरद्वाज

निर्देशक - अमित राय

कलाकार -पंकज त्रिपाठी,राजेश कुमार,बुल्लू कुमार,श्रीधर दुबे और एनी

प्लेटफार्म - सिनेमाघर

रेटिंग -तीन

इंसान और श्वान का रिश्ता दुनिया का सबसे पुराना, वफादार और गहरा रिश्ता माना जाता है. इसी रिश्ते की कहानी आज रिलीज हुई फिल्म ओह माय डॉग से निर्देशक और लेखक अमित राय ने कही है. यह ड्रामा थ्रिलर फिल्म कुछ खामियों की वजह से परफेक्ट भले ना हो लेकिन पूरे परिवार के साथ देखी जाने वाली फिल्म है. यह एंटरटेन करने के साथ साथ इंसान और जानवर के रिश्ते को बहुत ही प्यार से परिभाषित भी कर जाती है.

ये है कहानी

फिल्म की कहानी मुंबई पुलिस हेडक्वाटर में एक श्वान (सेनापति )के राजकीय सम्मान के साथ विदाई से शुरू होती है. जिसने अपने जीवन में बीस से ज्यादा साहसिक मिशन को अंजाम दिया था. इस अंतिम विदाई के दौरान सेनापति के बच्चों का जिक्र होता है और कहानी असम और बिहार में पहुंच जाती है . दोनों कहानियां एक साथ समानांतर चलती है .असम की कहानी लड़के ओपो (माही राय) की कहानी है जो अपने अचानक से गायब हुए स्वान मोमो को खोज रहा है, और बिहार की कहानी स्वान ऑस्कर की है ,जो अपने गायब हो चुके मालिक प्रिंस को खोज रहा है, जो दिहाड़ी मज़दूर है.क्या इनकी खोज पूरी हो पाएगी. क्या ओपो, मोमो से मिल पाएगा.क्या ऑस्कर प्रिंस को ढूंढ पाएगा यही आगे की कहानी है.

फिल्म समाज को आइना है दिखाती

फिल्म के लेखक और निर्देशक अमित राय ने अपनी पिछली फिल्म ओह माय गॉड के शीर्षक को उलटा कर दिया है लेकिन एक बार फिर वह एक प्यारी सी कहानी लेकर आये हैं.वह समाज को आइना दिखाना दिखाना भी नहीं भूलते हैं. अमित राय की इस फिल्म में दो अलग-अलग सामाजिक सच्चाइयों को दिखाती है. एक कहानी कुत्तों की गैर-कानूनी तस्करी के बारे में है, जबकि दूसरी मानव अंगों की तस्करी का। फिल्म की यह दोनों कहानी हाशिए में रह रहे वर्ग की है. जिनकी परवाह सिस्टम और समाज दोनों को नहीं है. जब ये दोनों एक दूसरे की रक्षा करने का फैसला करते हैं तो वफादारी और अपनेपन की प्यारी कहानी इंसान और जानवर के बीच देखने को मिलती है. जो दिल को छूती है.कई बार आँखों को नम भी कर देती है खासकर ऑस्कर को पुलिस द्वारा पटना की सड़कों पर दौड़ाने वाला पूरा सीक्वेंस. फिल्म में दो पैरेरल कहानियां हैं लेकिन ये जिस तरह से एक साथ चलती हैं.दोनों एक सी लगती है. उसके लिए अमित राय की तारीफ बनती है. इसके साथ ही उन्होंने कुत्ते से उम्दा काम करवाया है और उसे हीरो की तरह परदे पर प्रस्तुत किया है. फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है तो सिनेमेटोग्राफी में असम और पटना दोनों को बखूबी जोड़ा है। फिल्म की शूटिंग ज्यादातर रियल लोकेशन पर हुई है, जो फिल्म को रिअलिस्टिक टच देता है.

इन पहलुओं पर थोड़ा और काम करने की थी जरूरत

फ़िल्म की फिल्म की नीयत तो बहुत अच्छी है, लेकिन इसकी लम्बाई अखरती है है. फिल्म आसानी से 15 से 20 मिनट तक कम की जा सकती थी.जिस वजह से फिल्म कई जगहों पर खींची हुई जान पड़ती है. इसके साथ ही कुछ सीन में लॉजिक की कमी भी है.फिल्म के गीत संगीत में असमिया और भोजपुरी संगीत सुनने को मिलता है , जो रियलिस्टिक टच को बढ़ाता है लेकिन गीत संगीत में कुछ ख़ास नहीं जोड़ पाता है।

सभी कलाकार कमाल

फ़िल्म के मुख्य किरदार ऑस्कर और मोमो हैं. दोनों ही कुत्ते बहुत शानदार रहे हैं खासकर ऑस्कर फिल्म की कहानी का असल हीरो है. इसके साथ ही बाल कलाकार माही राय की भी तारीफ़ बनती है.पंकज त्रिपाठी और श्रीधर दुबे अपनी सीमित भूमिका में छाप छोड़ते हैं तो राजेश कुमार ने करप्ट पुलिस ऑफिसर की भूमिका में अच्छा परफॉर्म किया है. बुल्लू कुमार,विजय विद्याधर ,गीता अग्रवाल, सुलक्षणा बरुआ,पवन मल्होत्रा सहित दूसरे एक्टर्स ने भी अपनी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.गौरतलब है कि फिल्म में लोकल आर्टिस्ट्स को तवज्जो दी गयी है.


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लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.
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