Mirzapur The Movie :मिर्जापुर की ये अभिनेत्री कभी एक वक्त खाना खाकर करती थी गुजारा

अभिनेत्री अनंग्शा बिस्वास बताती हैं कि परिवार का फिल्मों से कुछ लेना देना नहीं था.ऐसे में हमारी जर्नी थोड़ी लम्बी हो जाती है. मैं मिडिल क्लास परिवार से आती हूँ इसलिए कम संसाधन में जीना मुझे आता है. जब मैंने मुंबई में पांच साल थिएटर किया था. उस दौरान ऐसे अनगिनत दिन थे जब मैंने एक टाइम खाना खाकर निकाला था. मैं पीजी में रही थी.मैंने जरूरतों को बहुत कम रखा था .

mirzapur the movie :मिर्जापुर द मूवी सिनेमाघरों में आज दस्तक दे चुकी है. इस फिल्म में अभिनेत्री अनंग्शा बिस्वास एक बार फिर जरीना की भूमिका नजर आएंगी. वह दावा करती हैं कि वेब सीरीज से एक हजार गुना भौकाल फिल्म में देखने को मिलेगा. वेब सीरीज से फिल्म की इस जर्नी, ट्रोलिंग, संघर्ष सहित करियर के दूसरे पहलुओं पर उर्मिला कोरी की हुई बातचीत

फिल्म में मेरा होना बड़ी बात

मुझे डायरेक्टर गुरमीत सिंह का कॉल आया था. उन्होंने मुझे कहा मिर्जापुर पर फिल्म बनने जा रही है और आप उसमें हो. जब मुझे मालूम पड़ा कि फिल्म में मिर्जापुर सीरीज के बहुत अच्छे अच्छे किरदार नहीं हैं इसलिए मेरा फिल्म में होना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी.वैसे यह भारत में पहली बार हुआ है कि जब किसी सीरीज पर कोई फिल्म बनी हो तो यह मिर्जापुर की पूरी टीम के लिए गर्व की बात है.

लगा नहीं था कि चार सीन में दर्शक मुझे नोटिस करेंगे

मैं थिएटर से आती हूँ. मैंने पांच साल थिएटर किया फिर मुझे लगा कि अभिनय की थोड़ी और पढाई करनी चाहिए. मैं ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में पढ़ाई के लिए गयी.वहां से वापस आयी और मैंने मिर्जापुर का ऑडिशन दिया. सीरीज मुझे मिल गयी. पहले सीजन में मेरे चार सीन ही थे. मुझे लगा दर्शकों के लिए आयी गयी वाली बात होगी लेकिन दर्शकों ने जरीना के किरदार को कल्ट किरदार बना दिया. मेरा डांसिंग वाला सीक्वेंस दर्शकों को बहुत पसंद आया. मुझे जो भी पहचान मिली है. वो मिर्जापुर की वजह से मिली है.


ट्रॉल्लिंग से सहम गयी थी

पहले सीजन में दिब्येंदु और पाठक जी के साथ मेरे सेंसुअस सीन थे. जिसकी वजह से मुझे ट्रोल किया गया. मुझे गंदे मेसेज आये. मैं बहुत सहम गयी थी.उस वक़्त मेरी फॅमिली ने मुझे सपोर्ट किया. उन्होंने मुझे कहा कि कोई अभिनय की तारीफ़ करें तो उसे सर पर मत लो और कोई बुराई करे तो डिप्रेशन में मत जाओ.बस अपने काम पर फोकस करो. मैं बताना चाहूंगी कि मैं अपने काम को सरस्वती की साधना की तरह लेती हूँ.जो भी किरदार मुझे मिलता है. मैं परदे पर उसे पूरी शिद्द्त के साथ निभाना चाहती हूँ. मैं उसे जज नहीं करती हूँ क्योंकि वो मेरा काम नहीं है

इंटिमेट कोच नहीं थे सेट पर

इंटिमेट कोच सेट पर होना बहुत अच्छी बात है लेकिन मिर्जापुर के सेट पर नहीं थे. अच्छी बात ये थी कि वहां का माहौल बहुत अच्छा होता है . डायरेक्टर गुरमीत इंटिमेट सीन से पहले बात करते हैं. कम्फर्टेबल कितने हम हैं. किस सीन में हम सहज हैं , किसमें नहीं. सेट पर कम लोगों के बीच ये सीन शूट हुए थे. ड्रेसिंग डिपार्टमेंट या मेकअप डिपार्टमेंट की लड़कियों के साथ मैं सहज हूँ तो वो सेट पर होती थी. मैं दिब्येंदु और प्रमोद पाठक की भी तारीफ़ करुँगी.वो भी मेरे कम्फर्ट का बेहद ख्याल ऐसे सीन में रखते हैं.

दस किलो वजन किया कम

मिर्जापुर फिल्म के लिए मिर्जापुर के पहले सीजन में जाना मेंटली और इमोशनल हमारे लिए टफ नहीं था क्योंकि उसका सेट हमारे लिए घर जैसा हो गया है. बीते नौ सालों में तीन सीजन किये हैं,लेकिन फिजिकली टफ था. मिर्जापुर के बाद मैंने बस्तर फिल्म की थी.उसकी शूटिंग के दौरान मैं गिर गयी थी और मुझे सर्विकल पर चोट आयी थी. उसकी वजह से मेरा वजन बढ़ गया था तो सीजन थ्री में मेरा वजन ज्यादा था जबकि मिर्जापुर के पहले सीजन में मेरा वजन कम था. डायरेक्टर ने हमें दस किलो कम करने बोला था तो चार महीने में दस किलो कम करने में हालत ऐसी हो गयी कि मैं अस्पताल पहुंच गयी थी क्योंकि मैं बॉइल डाइट ले रही थी. (हँसते हुए )दस किलो कम किया लेकिन अस्पताल भी गयी.

रवि किशन और मैं भगवान शिव पर बहुत बात करते थे

इस फिल्म में पुराने चेहरों के साथ साथ नए चेहरे भी हैं. जिनमें रवि किशन के साथ मेरे कुछ सीन्स हैं. सेट पर मैं और वो सबसे ज्यादा बात भगवन शिव पर करते थे. मैं शिव की भक्त हूँ. मेरा जन्म शिवरात्रि को ही हुआ है. रवि जी भी शिव भक्त हैं तो हम भगवन शिव के बारे में बहुत बातें करते थे. रवि जी नेता हैं और सीनियर एक्टर भी लेकिन सेट पर वह बहुत ही ज़मीं से जुड़े हुए इंसान थे. हमेशा सभी को मोटिवेट करते थे. वैसे मिर्जापुर के सारे एक्टर्स की खासियत यही है. वह स्टार्स नहीं बल्कि जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं. आपको किसी से बात करने के लिए सोचना नहीं पड़ता है चाहे वह पंकज जी हो या अली फज़ल या फिर एक्ट्रेसेज

मैंने जरूरतों को कम रखा

परिवार का फिल्मों से कुछ लेना देना नहीं है .ऐसे में हमारी जर्नी थोड़ी लम्बी हो जाती है. मैं मिडिल क्लास परिवार से आती हूँ इसलिए कम संसाधन में जीना मुझे आता है. जब मैंने मुंबई में पांच साल थिएटर किया था. उस दौरान ऐसे अनगिनत दिन थे जब मैंने एक टाइम खाना खाकर निकाला था. मैं पीजी में रही थी.मैंने जरूरतों को बहुत कम रखा था ताकि मैं एक्टिंग को अच्छे से सीख पाऊं. आगे बाढ़ पाऊं. मैं कोलकाता से आती हूँ. जो रविंद्र नाथ टैगोर, सत्यजीत रे की भूमि है. आगे भी मेरी कोशिश अपने शहर और लोगों को अच्छा काम करके प्राउड करने की होगी.मैं बताना चाहूंगी कि अभी आर्थिक रूप से सक्षम हो गयी हूँ लेकिन घरवालों को मुंबई में अपना घर देना चाहती हूँ. यह जिम्मेदारी अभी तक पूरी नहीं हुई है इसलिए मन कभी कभी कचोटता है।

परिवार शुरुआत में एक्टिंग के खिलाफ था

मेरा परिवार पढ़े लिखे वालों का है. मेरे दादाजी प्रिंसिपल थे.मेरी माँ सरकारी हॉस्पिटल में ईएनटी ओटी इंचार्ज है. मेरी फॅमिली प्रोग्रेसिव है. मैंने ग्रेजुएशन किया है. उसके बाद एक्टिंग में डिप्लोमा की बात की तो परिवार खिलाफ हो गया था. वो चाहते थे कि आईएएस, इंजिनयर बनूं. म्यूजिक, डांस और अभिनय मैं स्कूल से करती आयी हूँ लेकिन घरवाले उसे हॉबी की तरह ही देखते थे .करियर की तरह नहीं इसलिए शुरुआत में वह नहीं मानें थे, लेकिन जब उन्होंने पृथ्वी थिएटर में मेरा एक प्ले देखा तो उन्हें यकीं हो गया कि माँ सरस्वाति का मुझ पर हाथ है.

जरीना जैसे किरदारों को लगातार रिजेक्ट किया है

मिर्जापुर में जरीना का किरदार हिट होने के बाद उससे मिलते जुलते किरदार दर्जनों ऑफर हुए लेकिन मैंने सबको मना किया। मैं पैसे छापने नहीं आयी हूँ। एक तरीके का रोल करके एक्टर मर जाता है।मुझे टाइपकास्ट करने की कोशिश चल रही है और मैं उस कोशिश पर पानी डाल रही हूँ। बॉक्स में हम औरतों को डालने की कोशिश की जाती है। हर इंडस्ट्री ये करती है।हम तो विद्रोही हैं। औरत होकर जन्म लिया है तो लड़ाई तो करनी पड़ेगी। लड़ेंगे और लड़कर अपने लिए जगह बनाएंगे।मेरे अभिनय का तीस प्रतिशत भी लोगों ने नहीं देखा है। कॉमेडी करना है। पपी लव रोमांस करना है. मधुबाला और स्मिता पाटिल मेरी आदर्श रही हैं.

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लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.
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