Mardaani 3: शिवानी शिवाजी रॉय एक बार फिर वर्दी पहनकर पर्दे पर लौट आई हैं. और जब-जब रानी मुखर्जी पुलिस की यूनिफॉर्म में नजर आती हैं, तब सिर्फ अपराधी ही नहीं, दर्शकों की धड़कनें भी तेज हो जाती हैं. ‘मर्दानी’ और ‘मर्दानी 2’ की जबरदस्त कामयाबी के बाद ‘मर्दानी 3’ को लेकर एक्साइटमेंट आसमान पर था. अब जब फिल्म रिलीज हो चुकी है, तो रानी ने फिर साबित कर दिया कि उन्हें यूं ही ‘लेडी सिंघम’ नहीं कहा जाता.
फिल्म दर्शकों को बांधकर रखती है और बॉक्स ऑफिस पर भी ठीक-ठाक चल रही है, लेकिन कुछ कमियां ऐसी हैं जो इसे एक अच्छी फिल्म से आगे बढ़कर यादगार मास्टरपीस बनने से रोक देती हैं. आइए, समझते हैं वो 5 बातें, जहां ‘मर्दानी 3’ थोड़ी चूक जाती है.
1. विलेन में वो खौफ नहीं
मर्दानी सीरीज की सबसे बड़ी ताकत उसके विलेन रहे हैं. पहले पार्ट में ताहिर राज भसीन और दूसरे में विशाल जेठवा ने जो डर पैदा किया था, वो इस बार थोड़ा कम महसूस होता है. विलेन की चुनौती बड़ी है, लेकिन उसका मकसद जल्दी समझ आ जाता है. दिमागी खेल और डर का वो लेवल नहीं बन पाता.
2. सेकंड हाफ की धीमी रफ्तार
शुरुआत जबरदस्त है और क्लाइमेक्स भी दमदार, लेकिन बीच का हिस्सा थोड़ा खिंचता है. कुछ सीन हटाए जाते तो फिल्म और टाइट हो सकती थी.
3. जरूरत से ज्यादा तेज बैकग्राउंड म्यूजिक
कई सीन में बैकग्राउंड स्कोर इतना तेज है कि इमोशन्स दब जाते हैं. थ्रिलर में सन्नाटा भी बहुत कुछ कहता है, जो यहां कुछ जगह मिस हो जाता है.
4. एक्शन थोड़ा ओवर द टॉप
मर्दानी की पहचान रॉ और रियल फाइट्स रही है, लेकिन इस बार कुछ स्टंट्स जरूरत से ज्यादा फिल्मी लगते हैं, जो किरदार की सच्चाई से ध्यान भटका देते हैं.
5. कहानी का जाना-पहचाना पैटर्न
शिवानी का सस्पेंड होना, अकेले लड़ना और अंत में विलेन को सबक सिखाना, ये सब पहले भी देख चुके हैं. कुछ नया ट्विस्ट होता तो मजा और बढ़ जाता.
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