Sharda Sinha: घर-घर में बजते हैं इस बिहार कोकिला के गीत, कभी उसी की गायकी पर सास ने रख दी थी ऐसी शर्त...

बिहार कोकिला शारदा सिन्हा की आवाज आज भी हर दिल पर राज करती है. हाल ही में 'पनिया के जहाज' गाने का एक वायरल वीडियो उनके इसी संगीत विरासत की याद दिलाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 20 साल की उम्र में शादी के बाद उन्हें संगीत के लिए सास के कड़े विरोध और भूख हड़ताल की धमकी का सामना करना पड़ा था? जानिए उनके 'बिहार कोकिला' बनने के संघर्ष की पूरी कहानी.

Sharda Sinha: भोजपुरी और मैथिली लोकगीतों की मशहूर गायिका शारदा सिन्हा आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और संगीत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है. हर कोई उनके आवाज और गीत का कायल हैं.  हाल ही में एक कॉलेज स्टूडेंट ने उनका लोकप्रिय गीत ‘पनिया के जहाज’ गाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा हैं। उसने एक बार फिर शारदा सिन्हा की संगीत विरासत को चर्चा में ला दिया। 

हालांकि, बिहार की लोक संगीत की बड़ी आवाज बनने तक का उनका सफर आसान नहीं था. उन्हें अपने करियर की शुरुआत में परिवार के विरोध का भी सामना करना पड़ा था. एक पुराने इंटरव्यू में शारदा सिन्हा ने बताया था कि करीब 20 साल की उम्र में शादी के बाद ससुराल में उन्हें गाने को लेकर काफी विरोध झेलना पड़ा.

Sharda Sinha's Mother-in-Law Opposed Her Singing: सास को नहीं पसंद था शारदा सिन्हा का गाना 

एक पुराने इंटरव्यू के दौरान  शारदा सिन्हा ने बताया था कि शादी के बाद भी उनका मन संगीत से दूर नहीं हुआ था. वह लगातार गाना चाहती थीं, लेकिन उनकी सास को उनका सार्वजनिक रूप से गाना पसंद नहीं था.

शारदा सिन्हा के मुताबिक, उनकी सास का मानना था कि घर में भजन गाना ठीक है, लेकिन बाहर जाकर गाने गाना सही नहीं है. उन्होंने इस बात का विरोध करते हुए कहा था कि यहां-वहां जाकर गाना ठीक नहीं है.

विरोध इतना बढ़ गया था कि उनकी सास ने धमकी दी थी कि अगर शारदा सिन्हा ने गाना जारी रखा तो वह खाना-पीना छोड़ देंगी. इसके बावजूद शारदा सिन्हा ने संगीत को छोड़ने का फैसला नहीं किया.

Husband Supported Sharda Sinha: पति ने दिया शारदा सिन्हा का साथ 

शारदा सिन्हा के पति ने उनका पूरा साथ दिया. उन्होंने धीरे-धीरे अपनी मां को समझाया और शारदा सिन्हा को संगीत जारी रखने का मौका मिला. उनके ससुर को भी कीर्तन और संगीत में रुचि थी, जिससे घर का माहौल धीरे-धीरे उनके पक्ष में होने लगा.

समय के साथ शारदा सिन्हा की आवाज लोगों तक पहुंचने लगी. उनके गाने लाउडस्पीकर पर बजाए जाते थे और दूर-दूर तक उनकी आवाज सुनाई देती थी.

Sharda Did Not Even Heard Her Song: शारदा के पास नहीं थे रिकॉर्ड प्लेयर 

शारदा ने एक वाकया बताते हुए कहा कि, अपने गाने सुनने तक के लिए उनके पास उस समय रिकॉर्ड प्लेयर नहीं था. उन्होंने बताया था कि जब उन्हें पहली बार पैसे मिले तो उन्होंने सबसे पहले एक रिकॉर्ड प्लेयर खरीदा, ताकि वह अपने गाने खुद सुन सकें.

Everything Changed After Her Song Went Viral: बदल गया था ससुराल का माहौल 

शारदा सिन्हा की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी सास का नजरिया भी बदलने लगा. उन्हें महसूस हुआ कि जब घर से बाहर के लोग उनकी बहू की तारीफ करते हैं, तो उस बात का असर अलग होता है.

शारदा सिन्हा ने अपने अनुभव को याद करते हुए बताया था कि घर के लोगों की बात को कई बार हम गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन जब वही बात बाहर के लोग कहते हैं तो लगता है कि शायद उसमें सच्चाई है.

Sharda Sinha Got Popularity from Chath and Marriage Song: छठ गीत से मिली अलग पहचान 

आज भी झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के हर घर में शारदा सिन्हा के छठ गीत बजते ही  हैं.  शारदा सिन्हा ने अपने परिवार की सीमाओं से आगे बढ़कर बिहार के लोक संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई. विवाह गीत और छठ गीत उनकी खास पहचान बने. उनकी गीतों के कारन और  उनकी मधुर आवाज ने उन्हें ‘बिहार कोकिला’ का सम्मान दिलाया. आज उनकी आवाज नई पीढ़ी तक पहुंच रही है और खूब सराही जा रहीं हैं.

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By Asha Kumari

आशा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में एंटरटेनमेंट कंटेंट राइटर हैं. वह बॉलीवुड, साउथ सिनेमा, OTT, बॉक्स ऑफिस, टीवी शोज और सोशल मीडिया पर वायरल एंटरटेनमेंट अपडेट्स कवर करती हैं. उनकी कोशिश यही रहती है कि हर बड़ी एंटरटेनमेंट खबर पूरी फैक्ट-चेकिंग, सटीक जानकारी और आसान भाषा के साथ सबसे पहले पाठकों तक पहुंचाई जाए.

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शिक्षा (Education)

झारखंड की रहने वाली आशा ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC), दिल्ली से इंग्लिश जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है.

पत्रकारिता की शुरुआत 

आशा को कंटेंट राइटिंग में ढाई साल का अनुभव है. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ‘द पैम्फलेट’ (The Pamphlet) में न्यूज राइटर के तौर पर की थी. इसके बाद उन्होंने आउटलुक (Outlook) में लाइफस्टाइल कंटेंट राइटर के तौर पर काम किया. इसके साथ ही, आशा ने ईटीवी भारत (ETV Bharat) और हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में इंग्लिश कंटेंट राइटर के रूप में अपना योगदान दिया है.

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