गिरीश कर्नाड का निधन : कर्नाटक में तीन दिनों का राजकीय शोक

बेंगलुरु : प्रसिद्ध नाटककार, अभिनेता, निर्देशक एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गिरीश कर्नाड का सोमवार को यहां उनके आवास पर निधन हो गया. वह 81 वर्ष के थे. अपने विचारों को खुल कर प्रकट करने को लेकर निशाने पर रहे बहुआयामी व्यक्तित्व और बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्नाड के परिवार में पत्नी सरस्वती, बेटे रघु […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

बेंगलुरु : प्रसिद्ध नाटककार, अभिनेता, निर्देशक एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गिरीश कर्नाड का सोमवार को यहां उनके आवास पर निधन हो गया. वह 81 वर्ष के थे. अपने विचारों को खुल कर प्रकट करने को लेकर निशाने पर रहे बहुआयामी व्यक्तित्व और बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्नाड के परिवार में पत्नी सरस्वती, बेटे रघु कर्नाड (पत्रकार एवं लेखक) और बेटी राधा हैं.

कनार्ड के परिवार से जुड़े सूत्रों ने बताया, ‘ उन्होंने सुबह करीब आठ बजे आखिरी सांस ली. वह लंबे समय से श्वास संबंधी तकलीफ सहित कई बीमारियों से पीड़ित थे.” सूत्रों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार आज राजकीय सम्मान के साथ ‘कल्पली विद्युत शवदाहगृह’ में किया जाएगा.

उनकी इच्छानुसार परिवार ने किसी भी रीति-रिवाज का पालन नहीं करने का निर्णय लिया है. परिवार ने प्रशंसकों और गणमान्य हस्तियों से भी सीधे शमशान पहुंच कर कर्नाड को अंतिम विदाई देने की अपील की है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने कर्नाड के सम्मान में सोमवार को छुट्टी का ऐलान करते हुए तीन दिन का शोक भी घोषित किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि कर्नाड को राजकीय सम्मान दिया जाएगा, जो ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लोगों को दिया जाता है.

कर्नाड के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि हमने एक सांस्कृतिक दूत खो दिया. उन्होंने ट्वीट किया, ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार, प्रतिष्ठित अभिनेता एवं फिल्म निर्माता गिरीश कर्नाड के निधन की खबर सुन कर मैं दुखी हूं.’

उन्होंने कहा, ‘‘ साहित्य, थिएटर और फिल्मों में उनके बहुमूल्य योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. उनके निधन से हमने एक सांस्कृतिक दूत खो दिया. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे.’ पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देव गौड़ा ने भी कर्नाड के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कन्नड़ भाषा को उन्होंने ही सातवां ज्ञानपीठ दिलाया था. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी एस येदियुरप्पा ने एक ट्वीट कर कहा, ‘ जाने-माने अभिनेता-नाटककार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गिरीश कर्नाड के निधन की खबर सुन कर दुखी हूं. उनके परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं हैं.”

बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्नाड का जन्म डॉ. रघुनाथ कर्नाड और कृष्णाबाई के घर 1938 में हुआ था. कर्नाड ने अनेक नाटकों और फिल्मों में अभिनय किया जिनकी काफी सराहना हुई. ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके कर्नाड को 1974 में पद्म श्री और 1992 में पद्म भूषण सम्मान से भी सम्मानित किया गया. वह 1960 के दशक में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रोहड्स स्कॉलर भी रहे. उन्होंने वहां से दर्शनशास्त्र, राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र में ‘मास्टर ऑफ आर्ट्स’ की डिग्री हासिल की. उनके कन्नड़ भाषा में लिखे नाटकों का अंग्रेजी और कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया.

वे ‘नव्या’ साहित्य अभियान का हिस्सा भी रहे. उनके नाटक ‘‘नागमंडल”, ‘‘ययाति” और ‘‘तुगलक” ने उन्हें काफी ख्याति दिलाई। कर्नाड सलमान खान की ‘‘टाइगर जिंदा है” और अजय देवगन अभिनीत ‘‘शिवाय” जैसी व्यावसायिक फिल्मों में भी दिखाई दिए. राजनीति की बात करें तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाजपा का एकमात्र चेहरा होने की काफी आलोचना करते थे.

कर्नाड रंगमंच के उन 600 कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने लोगों से लोकसभा चुनाव में भाजपा और उनके सहयोगियों को सत्ता से बाहर करने की अपील करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. कर्नाड ने नोबेल पुरस्कार विजेता वी एस नायपॉल की, उनके मुस्लिमों को लेकर विचार पर भी काफी आलोचना की थी. कर्नाटक सरकार के टीपू जयंती मनाने के निर्णय के बाद उत्पन्न विवाद पर कर्नाड ने कहा था कि 18वीं सदी के शासक अगर मुस्लिम की जगह हिंदू होते तो उन्हें भी छत्रपति शिवाजी की तरह सम्मान मिलता. कर्नाड की इस पर खासी आलोचना हुई थी.

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