#MeToo के समर्थन में अभिनेता यशपाल, बोले- मी-टू कैंपने बढ़िया, लोग कुछ गलत करने से पहले कई बार सोचेंगे

यशपाल शर्मा से बातचीत लगान, गंगाजल, अपहरण, वेल्कम टू सज्जनपुर, अनवर, मुंबई से आया मेरा दोस्त, हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, चमेली, पुकार जैसी फिल्मों में उम्दा अभिनय के जरिये सिनेमा प्रेमियों के दिल में जगह बनाने वाले शानदार अभिनेता हैं यशपाल शर्मा ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि आजकल फिल्मों में कंटेंट चेंज हो […]

यशपाल शर्मा से बातचीत

लगान, गंगाजल, अपहरण, वेल्कम टू सज्जनपुर, अनवर, मुंबई से आया मेरा दोस्त, हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, चमेली, पुकार जैसी फिल्मों में उम्दा अभिनय के जरिये सिनेमा प्रेमियों के दिल में जगह बनाने वाले शानदार अभिनेता हैं यशपाल शर्मा ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि आजकल फिल्मों में कंटेंट चेंज हो गया है. बताइए पैड मैन या ट्वायलेट एक प्रेमकथा में कौन विलेन है? सिचुएशन व परिस्थतियां ही विलेन हैं. इसमें जो बुराई है वो विलेन है, न कि कोई आदमी. हीरो-विलेन सिस्टम ही नहीं होना चाहिए. हम गलत दिखाते हैं. देखिये हर आदमी में ग्रे शेड होता है. थोड़ा ब्लैक होता है, थोड़ा ह्वाइट होता है. साउथ इंडिया की जो कॉपी होती है, हीरो-विलेन वाली वह ज्यादा दिनों तक चलने वाली नहीं है. आज सूई-धागा, अंधाधुन, ए वेडनेस डे जैसी फिल्में आ रही हैं. ये चलेंगी. ऐसी फिल्मों से हर आदमी खुद को कनेक्ट करता है.

फिल्मों में डूबने का मौका नहीं मिलता

मैं हर फिल्म में अच्छाई देखता हूं. बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं. जिसमें डूब जाना होता है आपको. नहीं तो ट्रेनिंग इतनी ले चुका हूं कि ज्यादा अंतर नहीं होता. चंडीगढ़, दिल्ली से, रिपेट्री में काम कर चुका हूं. वर्तमान में गुलजार, नादिरा बब्बर, रजत कपूर, मकरंद देशपांडे आदि के साथ नाटक कर रहा हूं. बढ़िया सिनेमा के जरिये समाज को शिक्षा देकर, आइना दिखाकर प्रॉब्लम को सामने रखा जाना चाहिए़ मैं हरियाणा से हूं. वहां जात-पात की प्रॉब्लम है, हिंदू-मुस्लिम की प्रॉब्लम है, पार्टियों की प्रॉब्लम है, लड़कियों की प्रॉब्लम है. हर तरह की प्रॉब्लम को सार्थक फिल्म बनाकर दूर की जा सकती है.

बिरसा मुंडा जैसी शख्सियत पर फिल्म बननी चाहिए
मैं अभी एक फिल्म डायरेक्ट कर रहा हूं. पंडित लक्ष्मीनाथ. ये हरियाणा के फोक आर्टिस्ट हैं. पिछले तीन साल से रिसर्च कर रहा हूं. अब जाकर बना रहा हूं. ऐसे ही झारखंड की प्रॉब्लम सिनेमा में आये. सिनेमा में लोक संस्कृति आये. यहां की कहानियां, फोक स्टोरी फिल्मों में आये. यहां के जो दिग्गज लोग रहे हैं, जैसे बिरसा मुंडा. ऐसे लोगों के बारे में फिल्म के जरिये बच्चों को बतायें. ताकि बच्चे संस्कृति से जुड़ सकें.

मी-टू बढ़िया है, लोग संभलेंगे

मी-टू कैंपने बढ़िया है. इससे लोग संभलेंगे और कुछ गलत करने से पहले कई बार सोचेंगे. तब है कि लड़कियां नाजायज फायदा भी उठा सकती हैं. अगर लड़कियां कह दे कि डॉन्ट टच मी तो कोई माई का लाल नहीं कि उसे हाथ लगा दे. लड़कियां भी शॉटकर्ट अपनाती हैं. बाद में कुछ हुआ या पैसे नहीं मिले तो केस कर दिया. इसका मिसयूज नहीं होना चाहिए.

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