विश्वरुप टू से अभिनेता कमल हासन एक बार फिर रुपहले परदे पर दस्तक देने वाले हैं. वह इस फिल्म के निर्माता निर्देशक और लेखक भी हैं. कमल हासन की उनकी यह फिल्म, राजनीति और कैरियर पर हुई उर्मिला कोरी की बातचीत के प्रमुख अंश.
-विश्वरूप 2 में की कहानी क्या है?
यह विश्वरूपम का सीक्वल और कई दृश्यों के जरिए प्रिक्कल भी होगी. यह मेजर वसीम अहमद कश्मीरी की बैक स्टोरी पर फोकस करेगी कि किस तरह से वह रॉ एजेंट बना. हम इस सीक्वल पर 6 साल से प्लान कर रहे हैं. पिछली बार की तरह इस बार भी हमारी कोशिश ज्यादा से ज्यादा रियल रहने की है. एक हार्ड कोर एक्शन फिल्म है.
-विश्वरुपम के पहले पार्ट को लेकर काफी विवाद हुआ था?
कंट्रोवर्सी कोई नहीं थी. ये तो वहीं बात होती अगर कोई ये कहे कि अमर अकबर एंथोनी में मुस्लिमों का अपमान हो रहा है. अगर आप किसी भी फिल्म को आप टारगेट करना चाहोगे तो आप मौका ढूंढ ही लेंगे. फिल्म रोटी कपड़ा और मकान में पंजाबियों का अपमान मान लेंगे क्योंकि प्रेमनाथ सरदार बनें थे. शोर फिल्म को देखकर आप कह सकते हैं कि यह उन लोगों का अपमान है. जो लोग सुन नहीं सकते हैं. हिंदी फिल्मों का नहीं बता सकता लेकिन मुझे नहीं लगता कि तमिल में हाल के समय में मुस्लिम किरदार को फिल्म का नायक बनाया है.
-आपकी हर फिल्म में एक मैसेज होता है. मैसेज को फिल्मों में होना कितना जरूरी मानते हैं?
इंटरटेंमेट होना ही चाहिए हर फिल्म में. फिल्में सिर्फ धंधा करने का माध्यम नहीं है. मुझे लगता है कि हमारी एक जिम्मेदारी भी बनती है बड़े गुलाम अली साहब, के आसिफ, सत्यजीत रे ऐसे नाम हैं जिन्होंने ये जिम्मेदारी बखूबी निभायी है. हम कैटालिस्ट हैं समाज को अनुभव करवाने का उनके खुद के महत्व को. हम कोर्ट के अनाउंसर जैसे हैं. जो बताते हैं कि क्या आ रहा है. अच्छे दिन आ रहे हैं या बुरे दिन. ये सिर्फ पॉलिटिशनय ही क्यों कहें. आर्टिस्ट को भी बताना चाहिए. मैं बताना चाहूंगा एक दूजे के लिए जब रिलीज हुई और लोग आत्महत्या करने लगें तो मैं और बालचंद्र बिल्कुल शॉक्ड रह गए थे. हमें लगा कि लोगों तक गलत मैसेज जा रहा है. उसके बाद हमने तमिल में एक फिल्म बनायी. जो एक दूजे की सोच के विपरित थी. हम हिंदी में भी बनाना चाहते थे लेकिन बनी नहीं.
-इस बार भी आपने पंडित बिरजू महाराज की सेवाएं अपनी फिल्म में ली हैं उनके साथ एसोसिएशन कैसा रहा
मेरे घर में कला का माहौल रहा है. मेरी बहनें बहुत अच्छी डांस टीचर थी. मैं उन्हें डांस करते हुए बहुत देखता था. जब उनकी शादी हुई तो मैं डांस को बहुत मिस करने लगा था. इसलिए मैंने डांस सीखने का फैसला किया. मैंने कथक सीखा फिर थोड़ी कुचीपुड़ी भी, भरतनाट्यम भी सीखा. हमेशा से मेरी ख्वाइश उदय शंकर साहब और बिरजू महाराज का शागिर्द बनने की थी, लेकिन वो हो नहीं पाया. मैंने 40 साल पहले वाईज़ेक में बिरजू महाराज का परफॉर्मेंस देखा था लगा कि मेरी किस्मत में क्यों नहीं इनसे सीखना लिखा है. विश्वरूपम ने जब मौका दिया तो मैं पहुंच गया मैंने उनसे कुछ ट्रेनिंग भी ली.
-इस फिल्म में वहीदा रहमान भी हैं उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा था?
वह हमारे सेट पर सबसे युवा अभिनेत्री थीं. वह दिल से अभी भी बहुत यंग हैं. उनके साथ काम करना मेरा सौभाग्य है. सबसे खूबसूरत वो पल थे जब मैंने अपनी पसंदीदा फिल्म कागज के फूल उनके साथ डिसकस की. उन्होंने मेरे बारे में ऐसा कुछ कहा जो मेरे लिए किसी बहुत बड़ी उपलब्धि से कम नहीं. उन्होंने मुझे कहा कि मेरी कुछ चीजें उन्हें गुरूदत्त साहब की याद दिलाती हैं.
-आपकी फिल्मों में एक अलग देशभक्ति की परिभाषा गढ़ी गयी है निजी जिंदगी में आपकी देशभक्ति की क्या परिभाषा है?
मेरे लिए देशभक्ति काम से जुड़ी है. मैं इसे एक गांव या देश तक सीमित नहीं रख सकता हूं. मैं मॉडर्न वर्ल्ड का नागरिक हूं. यही वजह है कि मैं समझता हूं और आदर भी करता हूं कि गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन के बारे में बारे में क्यों इतना कुछ कहा था. वह सही मायनों में एक इंटरनेशनल सिटिजन थे. मैं भी वैसा ही बनना चाहता हूं. मेरी देशभक्ति नहीं भूगोलभक्ति है.
-आप एक्टर भी हैं और अब आप पॉलिटिशयन बनने जा रहे हैं दोनो में किस पेशे को आप चुनौतीपूर्ण करार देंगे.
अब जो मैं रोल निभाने जा रहा हूं मतलब पॉलिटिशियन का. मुझे लगता है कि वही रोल सबसे चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि बहुत लोगों ने खुद को इस रोल में आजमाया है. वह हारे हैं कभी तो कभी जीते हैं. यहां तक गांधीजी के लिए यह रोल प्ले करना आसान नहीं था. मुझे पता है कि मेरे जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण रोल मैं अब निभाने वाला हूं.
-आप बहुत ही बड़े कलाकार हैं क्या आपको लगता है कि राजनीति में जाने से सिनेमा आपके बिना अधूरा होगी.
ये सवाल आपने गावस्कर से नहीं पूछा? मुझे लगता है कि स्पेस भर ही जाता है. मैं अब जो करने जा रहा हूं अगर वो नहीं करूंगा तो एक इंसान के तौर पर मैं हार जाउंगा. हम सड़क पर गड्ढों की शिकायत करते हैं. मैं आज जिस होटल में बैठा हूं. उसके सामने जो समुद्र है. उसकी क्या हालत हमने कर दी है. तीस साल पहले लोग उसमे नहाते थे. यही बात हमारी पॉलिटिक्स के साथ भी हो रहा है और मैं उसे साफ करने के इरादे से उतर रहा हूं. मुझे पता है कि दुनिया एक दिन में नहीं बदलेगी, लेकिन बदलाव की शुुरुआत तो होगी.
-क्या आप नेशनल पॉलिटिक्स का भी हिस्सा बनेंगे.
मेरे लिए कोई भी चीज क्षेत्रीय नहीं है. भारत के किसी भी कोने में आप हों. वह नेशनल ही होगा. कश्मीर मेरे देश का हिस्सा है. तमिलनाडु भी मेरे देश का हिस्सा है. तुतुकोडी में फायरिंग हो या कश्मीर में फायरिंग. दोनों ही देश को प्रभावित करते हैं. बिहार और तमिलाडु दोनों की इकोनॉमी देश को प्रभावित करती है. महाराष्ट्र में बंद पूरे देश को प्रभावित करता है. मैं नेशनल पॉलिटिक्स से हूं.
-रजनीकांत भी राजनीति में आ रहे हैं, उनसे यहां भी प्रतिस्पर्धा होगी क्या?
पब्लिक सर्विस में क्या प्रतिस्पर्धा. अगर वह मुझसे अच्छा कर सकते हैं तो यह अच्छी बात है.
