मुंबई : विलेन की भूमिका से सिनेमाजगत में कदम रखने वाले विनोद खन्ना कब हीरो बनकर लोगों के दिल में बस गये पता नहीं चला. आज विनोद खन्ना की पुण्यतिथि है. लंबी बीमारी के बाद उनका निधन कैंसर से हो गया था. निधन के वक्त उनकी उम्र 70 वर्ष थी. मरनोपरांत विनोद खन्ना को दादा साहब फाल्के अवार्ड मिला.
ना सिर्फ फिल्मों में बल्कि राजनीति में भी विनोद खन्ना ने ऊंचा मुकाम हासिल किया. जिस वक्त उनकी मृत्यु हुई उस वक्त वह पंजाब के गुरुदासपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद थे. विनोद खन्ना वाजपेयी की राजग सरकार में केंद्रीय मंत्री भी बने थे. उनके काम को काफी सराहा गया था.
विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 पेशावर (पाकिस्तान) में हुआ था. विनोद खन्ना के पिता टेक्सटाइल, डाई और केमिकल का कारोबार करते थे. विनोद खन्ना पांच भाई बहन ( 2 भाई, 3 बहनें) थे. बटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से मुंबई आ गया. पिता नहीं चाहते थे कि बेटा फिल्मों में काम करे. विनोद खन्ना जिद कर बैठे तो पिता ने सिर्फ दो सालों का वक्त दिया. इन दो सालों में उन्होंने फिल्म में अपनी पहचान बना ली.
विनोद खन्ना साल 2015 में शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले में नजर आये थे इसके बाद फिल्म एक थी रानी रिलीज हुई. यह उनकी आखिरी फिल्म थी. फिल्म राजमाता विजय राजे सिंधिया पर बनी थी जिसे गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने लिखा था.
