नयी दिल्ली: शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने ‘नानक शाह फकीर’ फिल्म की शुक्रवार को रिलीज रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय में आज दो असफल कोशशि की. यह फिल्म 13 अप्रैल पूरे देश में रिलीज हो रही है. एसजीपीसी ने रिलीज रोकने के लिए दायर अपनी एक याचिका सुबह खारिज होने के बाद दोपहर में दूसरी अर्जी दाखिल की थी.
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए . एम . खानविलकर और न्यायमूर्ति डी . वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने दूसरी बार एसजीपीसी का यह अनुरोध ठुकरा दिया कि इस मामले की सुनवाई तत्काल आधार पर आज या कल की जानी चाहिए क्योंकि ‘ नानक शाह फकीर ‘ शुक्रवार को रिलीज होने वाली है.
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि एसजीपीसी की याचिका पर वह 16 अप्रैल , सोमवार को सुनवाई करेगी. वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस . पटवालिया द्वारा इस याचिका पर आज या कल ही सुनवाई पर जोर देने पर पीठ ने कहा , ‘हमें प्रमाणन से मतलब है और प्रमाणपत्र मिला है.’ पीठ ने हालांकि यह अनुरोध ठुकरा दिया.
इससे पहले, आज दिन में उच्चतम न्यायालय ने फिल्म ‘नानक शाह फकीर” के देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शन की अनुमति देने वाले आदेश में संशोधन की मांग करने वाली शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) की यचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया था.
पीठ ने एसजीपीसी के वकील सतेन्दर सिंह गुलाटी ने अर्जी दी थी कि किसी को भी सिख गुरूओं, उनके परिवार और ‘पंच प्यारे’ को पर्दे पर दिखाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए. पीठ ने कहा कि फिल्म को एक बार केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ( सेंसर बोर्ड ) से प्रमाणपत्र मिलने के बाद उसके प्रदर्शन को सिर्फ कानूनी तरीके से रोका जा सकता है. पीठ ने मामले की सुनवाई सोमवार के लिए नियत की है.
गौरतलब है कि न्यायालय ने फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ पर शर्ते थोपने के लिये सिखों की शीर्ष धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी की 10 अप्रैल को आलोचना करते हुये इसके प्रदर्शन का मार्ग प्रशस्त कर दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि एक बार केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से फिल्म को प्रमाण पत्र मिल जाने के बाद इसके प्रदर्शन में किसी भी तरह की बाधा नहीं डाली जा सकती.
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि सेन्सर बोर्ड के प्रमाणन के बाद कोई भी समूह , संस्था , एसोसिएशन या व्यक्ति फिल्म के प्रदर्शन में किसी भी तरह का अड़्ंगा नहीं लगा सकता है.
याचिकाकर्ता नौसेना के पूर्व अधिकारी और फिल्म निर्माता हरिन्दर सिंह सिक्का ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दावा किया था कि सेन्सर बोर्ड द्वारा 28 मार्च को इसे मंजूरी दिये जाने के बावजूद शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने हाल ही में इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है. याचिका के अनुसार यह फिल्म सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव के जीवन और उनके उपदेशों पर आधारित है.
पीठ ने कहा कि सेन्सर बोर्ड द्वारा एक बार प्रमाण पत्र दिये जाने के बाद फिल्म निर्माता या वितरक को सिनेमाघर में इसका प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है बशर्ते किसी उच्च प्राधिकार ने इसमें सुधार अथवा इसे अमान्य नहीं किया हो। पीठ ने कहा कि यदि इस तरह की गतिविधियों को बढा़वा दिया गया तो इसमें अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार को बाधित करने और अराजकता लाने की क्षमता है.
पीठ ने केन्द्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी करने के साथ ही निर्देश दिया कि जहां भी फिल्म का प्रदर्शन होता है वहां कानून व्यवस्था बनाये रखी जाये और किसी को भी गड़बड़ी पैदा करने की अनुमति नहीं दी जाये. इसके साथ ही न्यायालय ने सिक्का की याचिका नौ मई को आगे सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दी.
सिक्का ने अपनी याचिका में अपने बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार की रक्षा करने और अपने धार्मिक दृष्टिकोण के प्रचार को संरक्षण प्रदान करने का अनुरोध किया है. इस फिल्म् को शुरू में सेन्सर बोर्ड ने 30 मार्च , 2015 को मंजूरी दी थी और इसका प्रसारण अप्रैल 2015 में होना था लेकिन व्यापक विरोध के कारण पंजाब में इस पर दो महीने के लिये प्रतिबंध लगा दिया गया था.
सिक्का के अनुसार फिल्म से संबंधित विभिन्न मूद्दों पर एसजीपीसी के सुझावों के अनुसार सुधार के बाद सेन्सर बोर्ड ने 28 मार्च , 2018 को इसे फिर से मंजूरी दी लेकिन एक बार फिर एसजीपीसी ने एक पत्र के माध्यम से फिल्म को दिया गया अपना समर्थन वापस ले लिया है.
