Bharti Singh को कंबल की खुशबू और मशीनों की आवाज से है नफरत, कारण जानकर आप भी हो जाएंगे इमोशनल

लोकप्रिय कॉमेडियन भारती सिंह यूं तो अपनी कॉमेडी से हर किसी का दिल जीत लेती हैं, लेकिन एक वक्त था, जब उनके पास दो वक्त की रोटी नहीं होती थी. एक इंटरव्यू में कॉमेडियन ने खुलासा किया था, कि बासी खाना खाकर किसी तरह जीते थे.

भारती सिंह की कॉमेडी की आज पूरी दुनिया फैन है. कॉमेडियन इन-दिनों अपने बेटे संग लाइफ को एंजॉय कर रही हैं. लेकिन एक वक्त था, जब वह काफी गरीब हुआ करती थी और उनके पास एक खाने तक के लिए पैसे नहीं होते थे. एक डिजिटल मीडिया द्वारा पॉडकास्ट में बात करते हुए भारती सिंह ने इस बारे में बात की कि कैसे वह और उनका परिवार गरीबी में था. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे कपिल शर्मा और सुदेश लेहरी के साथ अचानक उनकी मुलाकात हुई और पूरी जिंदगी ही बदल गई.

गरीबी पर रोना आता है

भारती सिंह ने कहा, मुझसे पहले भी कॉमेडियन थे, लेकिन लोगों ने उन्हें आगे नहीं आने दिया. लोग उन्हें यह कहते हुए चुप करा देते थे, ‘तुम्हारा दुपट्टा कहां है? अंदर जाओ’. अगर हमें अपने आपको अंदर ही छुपा कर बैठना था, तो आपने हमें जन्म क्यों दिया? ये चीजें पहले बहुत होती थीं, लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है. मैं दो साल की थी, जब मेरे पिता का निधन हो गया. मेरे भाइयों और बहनों ने अपनी नौकरी छोड़ दी. वे एक फैक्ट्री में काम करते थे, वे भारी कंबल ले जाते थे, कंबल जो हम कभी इस्तेमाल नहीं कर सकते थे. वे उन्हें रात-रात भर सिलते. कभी-कभी मेरी मां दुपट्टे सिल देती थीं. मुझे अब भी उन कम्बलों की गंध और मशीन की आवाज से नफरत है. मैंने अपने परिवार के साथ काफी गरीबी देखी है और मैं इसे अब और नहीं देखना चाहती.

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दूसरों का बासी खान हमारे लिए होता था ताजा

भारती सिंह ने कहा, मैंने कितनी गरीबी देखी है, बता नहीं सकती. अगर मैं लोगों को आधा खाया हुआ सेब फेंकते देखती तो सोचती कि उस व्यक्ति को खाना बर्बाद करने के लिए श्राप मिलेगा. मैं इसे उठाकर और इस तरह से टुकड़ा करने के बारे में भी सोचूंगी ताकि मैं इसे खा सकूं. मैं त्योहारों के दौरान उदास हो जाती थी. मेरी मां के काम से मिठाई का डिब्बा आने के बाद हम लक्ष्मी पूजा करेंगे. मैं पटाखे फोड़ने वाले दूसरे बच्चों के पास जाकर खड़ी हो जाती, ताकि दूसरे यह सोचें कि मैंने पटाखे फोड़े. जब मेरी मां लोगों के घरों में काम करती थी तो मैं दरवाजे के पास बैठ जाती थी. वह शौचालय साफ करती थी. जाते समय वे उन्हें बचा हुआ खाना दे देते. उनका बासी खाना हमारा ताजा खाना बन जाएगा और वह हमारा दिन बन जाता था. आज मैं अपनी मां से कहती हूं, मुझे अपने 10 महीने के बेटे से जितना प्यार है, उससे कहीं ज्यादा मैं अपनी मां से प्यार करती हूं.

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Author: Ashish Lata

आशीष लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के साथ एंटरटेनमेंट हेड के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया इंडस्ट्री में करीब 7 साल का अनुभव रखने वाली आशीष ने एंटरटेनमेंट से लेकर देश-दुनिया और विभिन्न राज्यों की खबरों पर गहराई से काम किया है. बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से जुड़ी खबरों के कंटेंट प्रोडक्शन में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है. वह खबरों को आसान, रोचक और पाठकों की रुचि के अनुसार पेश करने के लिए जानी जाती हैं. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में आशीष की खास दिलचस्पी सिनेमा और सितारों की दुनिया से जुड़ी खबरों में रही है. वह बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS अपडेट्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, टीवी शोज, वेब सीरीज और स्टार इंटरव्यू जैसे विषयों पर लगातार लिखती रही हैं. इसके अलावा स्पेशल और प्रीमियम न्यूज कंटेंट तैयार करने में भी उनकी खास विशेषज्ञता मानी जाती है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, एंटरटेनमेंट वैल्यू और रीडर्स फर्स्ट अप्रोच का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. आशीष लता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्लस न्यूज से की थी. यहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स कीं. इस दौरान उन्होंने अशोक चौधरी और नगर निगम अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख नेताओं के इंटरव्यू भी किए. शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज्म के अनुभव ने उनकी लेखन शैली और न्यूज प्रेजेंटेशन को और मजबूत बनाया. इसके बाद आशीष ने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में रहते हुए उन्होंने न्यूज कवरेज, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग के कई अलग-अलग फॉर्मेट्स पर काम किया. लगातार बदलते डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स को समझते हुए उन्होंने अपने कंटेंट को हमेशा ऑडियंस फ्रेंडली और SEO ऑप्टिमाइज्ड बनाए रखा. पटना में जन्मी आशीष लता की शुरुआती पढ़ाई पटना सेंट्रल स्कूल, सीबीएसी से हुई. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किया. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया अनुभव उन्हें हिंदी पत्रकारिता के उन मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ प्रदान करते हैं, जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल 5Ws+1H यानी पर आधारित न्यूज राइटिंग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

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