10 सितंबर को अनुराग कश्यप के 54वें बर्थडे पर जानिए उस डायरेक्टर की कहानी जिसने सड़कों पर रातें बिताईं और पर्सनल लाइफ में सब कुछ गंवाया. जानिए कैसे एक कमरे में बंद रहकर शराब में डूबने वाला बंदा आगे चलकर ओटीटी और सिनेमा का सबसे बड़ा 'मास्टरमाइंड' बना. हिंदी सिनेमा में जब भी रूल्स तोड़ने वाले डायरेक्टर्स का नाम आता है, तो अनुराग कश्यप की लिस्ट सबसे ऊपर होती है. 10 सितंबर को 'गैंग्स ऑफ वासेपुर', 'देव डी' और 'सेक्रेड गेम्स' जैसे आइकॉनिक प्रोजेक्ट्स देने वाले अनुराग अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं. आज भले ही पूरी दुनिया उनके सिनेमा की दीवानी हो, लेकिन एक टाइम ऐसा था जब उनके पास न घर था, न काम और न ही रहने का ठिकाना.
फुटपाथ पर रात बिताने के लिए दिए ₹6
साल 1993 में जब अनुराग बॉलीवुड में किस्मत आजमाने मुंबई आए, तो उनके पास रहने की जगह तक नहीं थी. शुरुआती दिनों में वे पृथ्वी थिएटर में सुबह अपना बैग रखते थे और वहीं का वॉशरूम यूज करते थे. रात को सोने के लिए वे वर्सोवा लिंक रोड के फुटपाथ पर जाते थे. उस टाइम उस फुटपाथ पर लाइन से सोने के लिए भी हर रात ₹6 देने पड़ते थे.
'सत्या' से मिली पहचान, फिर लगा फ्लॉप्स का झटका
राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'सत्या' के को-राइटर के तौर पर अनुराग को पहला बड़ा ब्रेक मिला. लेकिन इसके बाद बतौर डायरेक्टर उनकी किस्मत ने साथ छोड़ दिया. उनकी पहली फिल्म 'पांच' कभी थिएटर्स में कमर्शियल रिलीज ही नहीं हो पाई. इसके बाद 1993 ब्लास्ट्स पर बनी 'ब्लैक फ्राइडे' भी लंबे टाइम के लिए बैन और लीगल लफड़ों में अटक गई.
शराब की लत, पत्नी ने घर से निकाला और बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर
एक के बाद एक फिल्में अटकीं तो अनुराग बुरी तरह टूट गए. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वे खुद को एक कमरे में बंद करके करीब डेढ़ साल तक सिर्फ शराब पीते रहे. हालात इतने बिगड़ गए कि उनकी पहली वाइफ आरती ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया. उस वक्त उनकी बेटी महज 4 साल की थी. इसी बीच उन्हें 'तेरे नाम' और 'कांटे' जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से भी बाहर कर दिया गया. लगा कि उनका करियर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है.
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से कांस तक मचाया तहलका
मुश्किलों के बावजूद अनुराग ने हार नहीं मानी. 'देव डी' से उन्होंने बॉलीवुड को एक नया मॉडर्न फ्लेवर दिया. लेकिन असली धमाका हुआ 2012 में, जब आई 'गैंग्स ऑफ वासेपुर'. नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मनोज बाजपेयी और पंकज त्रिपाठी स्टारर इस फिल्म ने देसी स्वैग और डायलॉग्स से इंटरनेट पर तहलका मचा दिया. 2012 के कांस फिल्म फेस्टिवल के 'Directors' Fortnight' सेक्शन में जब इस 5 घंटे लंबी फिल्म की स्क्रीनिंग हुई, तो इंटरनेशनल ऑडियंस ने खड़े होकर तालियां बजाईं.
'सेक्रेड गेम्स' से ओटीटी पर भी दिखाया असली स्वैग
फिल्मों के बाद अनुराग ने डिजिटल स्पेस पर कदम रखा. भारत की पहली सबसे बड़ी हिट वेब सीरीज 'सेक्रेड गेम्स' का डायरेक्शन करके उन्होंने साबित कर दिया कि वे हर फॉर्मेट के किंग हैं. 'उगली', 'रमन राघव 2.0' और 'मुक्काबाज़' जैसी फिल्मों से उन्होंने लगातार अपने सिनेमा का लोहा मनवाया. फुटपाथ पर ₹6 देकर सोने वाले दिन से लेकर ग्लोबल लेवल पर पहचान बनाने तक, अनुराग कश्यप का यह सफर दिखाता है कि असली 'मास्टर' वही है जो गिरने के बाद दोबारा खड़ा होना जानता है.
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