Aarya 2 review : दूसरे सीजन में भी सुष्मिता सेन कर गयी हैं कमाल, यहां पढ़ें रिव्यू

Aarya 2 सीरीज का पहला सीजन खत्म हुआ था जब आर्या (सुष्मिता सेन) सबकुछ छोड़कर अपने बच्चों के साथ ऑस्ट्रेलिया जा रही है. दूसरे सीजन में कहानी एक साल आगे बढ़ गयी है. आर्या और उसके तीनों बच्चे राजस्थान आ गए हैं.

Aarya 2 review

वेब सीरीज -आर्या 2

निर्देशक- राम माधवानी

प्लेटफार्म – डिज्नी प्लस हॉटस्टार

कलाकार-सुष्मिता सेन,विकास कुमार, अंकुर भाटिया, जयंत कृपलानी,माया सरोव, और अन्य

रेटिंग – तीन

प्रतिष्ठित एमी नॉमिनेटेड आर्या का दूसरा सीजन दस्तक दे चुका है. सीरीज का पहला सीजन जबरदस्त कामयाब रहा था इसलिए इस सीजन से उम्मीदें बढ़नी लाजमी थी. दूसरे सीजन भी निर्देशक राम माधवानी और अभिनेत्री सुष्मिता सेन की जोड़ी ने स्क्रीनप्ले की कुछ कमज़ोरियों के बावजूद इस सीरीज को मनोरंजन की कसौटी पर सफल बना दिया है. यह वेब सीरीज शुरू से अंत तक आपको बांधे रखती है.

सीरीज का पहला सीजन खत्म हुआ था जब आर्या (सुष्मिता सेन)सबकुछ छोड़कर अपने बच्चों के साथ ऑस्ट्रेलिया जा रही है. दूसरे सीजन में कहानी एक साल आगे बढ़ गयी है. आर्या और उसके तीनों बच्चे राजस्थान आ गए हैं. आर्या की वापसी पिता जोरावर राठौड़ ,भाई संग्राम राठौड़ और शेखावत के खिलाफ गवाही देने के लिए हुई है लेकिन आर्या अदालत में मुकर जाती है. जिससे आर्या के खिलाफ उसका भरोसेमंद पुलिस अफसर खान भी हो जाता है जो उसकी और उसके बच्चों सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध था.

आर्या का भाई संग्राम आर्या की वजह से जेल से निकल गया है लेकिन फिर भी वह अपनी बहन को मारना चाहता है. क्या वह आर्या को नुकसान पहुंचा पाएगा या खुद का नुकसान कर बैठेगा. शेखावत अपने बेटे की मौत का बदला आर्या से लेना चाहता है. कहानी में सिर्फ यही ट्विस्ट नहीं बल्कि रशियन माफिया भी है. जिन्हें अपने 300 करोड़ की ड्रग्स चाहिए. इन सब से आर्या खुद को और अपने बच्चों को कैसे बचाएगी? हर कोई उसके खिलाफ है. लालच,बदला,पछतावा जैसे जैसे अलग अलग मानवीय भावनाओं के ज़रिए आठ एपिसोड्स में इस कहानी को दर्शाया गया है.

सीरीज अपनी शुरुआत से ही एंगेज कर देती है. हर एपिसोड में कहानी में आया ट्विस्ट आर्या को मुसीबत में डाल जाता है तो सीरीज के रोमांच को बढ़ा जाता है खासकर शुरुआती और आखिर के दो एपिसोड अच्छे बन पड़े हैं.

खामियों की बात करें तो ज़रूरत से ज़्यादा सिनेमैटिक लिबर्टी ली गयी है. पुलिस की मौजूदगी के बावजूद क्या पब्लिक प्रोसेक्यूटर्स एक क्रिमिनल से पूछताछ कर सकता है. कई दृश्यों को ज़रूरत से ज़्यादा खिंचा गया है. संपत के किरदार का अचानक हृदय परिवर्तन अखरता है तो अरु के किरदार से जुड़ी घटनाओं में दोहराव दिखता है. रशियन माफिया वाला सीक्वेंस आखिर में जबरदस्ती खींचा सा लगता है. सीरीज के आखिर में तीसरे सीजन की दस्तक है.

अभिनय की बात करें तो पिछले सीजन की तरह इस सीजन भी सुष्मिता ही इस सीरीज की जान है. वह आर्या के किरदार में वह अपने किरदार से जुड़े हर इमोशन को बखूबी जीती हैं चाहे वो एक मां के डर को दिखाना हो या बच्चों की रक्षा के लिए उनकी सशक्त ढाल बनकर उठ खड़ा होना . उन्होंने किरदार के अलग अलग परतों को बखूबी उकेरा है.

विकास कुमार एसीपी खान की भूमिका में एक बार फिर छाप छोड़ने में कामयाब हैं. आर्या के तीनों बच्चों के किरदार में तीनों ही कलाकारों ने उम्दा अभिनय का परिचय दिया है. आकाश खुराना, अंकुर भाटिया, विश्वजीत प्रधान, सिकन्दर खेर, दिलनाज़ ईरानी, सुगंधा गर्ग ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है. गीतांजलि कुलकर्णी की प्रतिभा के साथ यह सीरीज न्याय नहीं कर पाती है. उन्हें बहुत कम स्पेस मिला है.

सीरीज का गीत संगीत कहानी के अनुरूप हैं.इस सीजन भी पुराने हिंदी गानों का उम्दा तरीके से इस्तेमाल किया गया. संवाद अच्छे बन पड़े है. ज़िन्दगी किस्मत से नहीं फैसलों से बनती है. कुलमिलाकर कुछ खामियों के बावजूद यह सीजन मनोरंजन की कसौटी पर खरा उतरता है.

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लेखक के बारे में

Author: कोरी

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