Aamir khan, Aamir khan in turkey: बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. सोशल मीडिया और टीवी डिबेट से लेकर गली चौराहों तक वो बहस का मुद्दा बने हुए हैं. कारण है आमिर खान का तुर्की की प्रथम महिला एमीन एर्दोगन ( राष्ट्रपति की पत्नी) से मिलना. वैसे तो ये मुलाकात एक निजी मुलाकात है लेकिन सवाल पूछा जा रहा है कि आमिर खान का भारत विरोधियों से कैसा दोस्ताना है?
इस मामले को लेकर देश की सियासत में भी उबाल आ गया है. तुर्की के राष्ट्रपति के साथ आमिर खान का मेलजोल भाजपा, आरएसएस और विहिप से जुड़े बहुत लोगों को रास नहीं आया है. हालांकि कांग्रेस इस पूरे हंगामे को फिजूल बताने की कोशिश कर रही है.
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आखिर पूरा माजरा क्या है?
आमिर खान इस वक्त अपनी आगामी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग के सिलसिले में तुर्की में हैं. इस दौरान उन्होंने रविवार को तुर्की के राष्ट्रपति ) की पत्नी एमीन एर्दोगन से मुलाकात की है. इस्तांबुल स्थित राष्ट्रपति भवन हुबेर मैंशनमें हुई इस मुलाकात की तस्वीर को तुर्की की प्रथम महिला एमीन ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है.
इस ट्वीट में उन्होंने खुशी जताई की आमिर खान अपनी फिल्म की शूटिंग तुर्की के अलग-अलग इलाकों में करना चाहते हैं. वहीं इस मुलाकात के बाद आमिर खान ट्रोल हो रहे हैं. हालांकि एक ओर जहां आमिर खान का विरोध हो रहा है तो दूसरी ओर उनके बचाव में भी लोग खड़े हैं. दलील दी जा रही है कि वो किसी से भी मिलें क्यों फर्क पड़ना चाहिए?
विरोध किस बात का
गौरतलब है कि एर्दवान एक इस्लामिक देश के राष्ट्रपति हैं और लगातार भारत विरोधी बयानों के लिए भी सुर्खियों में रहते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह भारत और तुर्की के रिश्ते हैं. इस रिश्ते में पाकिस्तान की अहम भूमिका है. भारत-पाकिस्तान मामलों में तुर्की हमेशा पाकिस्तान का समर्थन करता है. जब भारत ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाया था, तब तुर्की ने पाकिस्तान के साथ-साथ भारत का विरोध किया था.
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इस्लामिक देश होने की वजह से तुर्की भारत के विरोध में पाकिस्तान के हर गतिविधियों को समर्थन करता है. पिछले महीने ही बकरीद के मौके पर भी तुर्की के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और राष्ट्रपति आरिफ अल्वी से बात की और कश्मीर मामले पर पाकिस्तान का समर्थन करने का आश्वासन दिया था.
आमिर खान पहले भी रहे हैं निशाने पर
आमिर खान का विवादों से पुराना नाता है. वो कम फिल्में करते हैं, लेकिन फिल्मों से ज्यादा विवाद उनके साथ चल पड़ते हैं. आमिर कभी अवार्ड्स फंक्शन में नहीं जाते. कभी अमिताभ और शाहरुख पर टिप्पणी करके आमिर फंस जाते हैं तो कभी फिल्मों के पब्लिसिटी स्टंट की वजह से वो चर्चा में आ जाते हैं. आमिर खान इससे पहले भी निशाने पर रहे हैं.
आमिर खान के ‘असहिष्णुता ‘ से जुड़े बयान ने देश भर में बवाल करवा दिया था. फिल्म पीके को लेकर भी हिंदूवादी संगठनों ने उन पर खूब हल्ला बोला था. जनवरी 2018 में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बॉलीवुड के इवेंट में तमाम सितारों से मुलाकात की थी. लेकिन इस इवेंट में आमिर खान ने हिस्सा नहीं लिया था, इसको लेकर वो सवालों के घेरे में आए थे.
कांग्रेस-भाजपा आमने सामने
भाजपा नेता मनोज तिवारी और सुब्रमण्यम स्वामी सहित कई भाजपा नेताओं ने आमिर खान की इस मुलाकात पर सवाल उठाए. वहीं कई विहिप नेताओं ने भी फिल्म अभिनेता पर कई आरोप लगाए. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोमवार सुबह एक ट्वीट किया था. इस ट्वीट में लिखा था- एर्दवान खलीफा बनने के कोशिश कर रहे हैं. वो हमेशा भारत विरोधी रहे हैं और टर्की भारत में चरमपंथ की फंडिंग कर रहा है. तुर्की भारत का सबसे बड़ा अदृश्य खतरा है. एर्दवान या उनके किसी परिचित पर भरोसा नहीं कर सकते. लेकिन जब उनके ट्वीट को आमिर खान से जुड़े विवाद से जोड़कर देखा जाने लगा तो उन्होंने एक ट्वीट के जरिए स्पष्ट किया कि मेरे पिछले ट्वीट का आमिर खान से कोई जुड़ाव नहीं था. न मैंने उन्हें मेंशन किया है न ही टैग किया .
Posted By: Utpal kant
