2 Interval Movie: आज के समय में ओटीटी पर वेब सीरीज के 7–8 एपिसोड एक ही रात में देख लेना कोई बड़ी बात नहीं रह गई है. 4–5 घंटे कब निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता. लेकिन जैसे ही थिएटर में बैठकर साढ़े तीन या चार घंटे की फिल्म देखने की बात आती है, तो हम घड़ी भी देखते हैं और टिकट के पैसे भी सोचने लगते हैं. वजह साफ है, ट्रैवल, पॉपकॉर्न की लाइन और बीच का 15 मिनट का इंटरवल. कई बार तो लोग इंटरवल तक पहुंचते-पहुंचते यही सोचने लगते हैं कि “भाई, अब ये फिल्म खत्म कब होगी?”
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा में एक दौर ऐसा भी था, जब दर्शकों को एक नहीं बल्कि दो-दो बार अपनी सीट छोड़कर ब्रेक लेना पड़ता था? जी हां, आज हम आपको उसी दौर और डबल इंटरवल वाली फिल्मों की कहानी बता रहे हैं.
राज कपूर ने डबल इंटरवल का कॉन्सेप्ट दिया
यह किस्सा है साल 1964 का. तब न मोबाइल था, न फास्ट-फॉरवर्ड का ऑप्शन और न ही कोई दूसरा डिस्ट्रैक्शन. दर्शक बस फिल्म और बड़ी स्क्रीन पर टिके रहते थे. लेकिन कुछ फिल्में इतनी लंबी होती थीं कि लगातार बैठे रहना मुश्किल हो जाता था. ऐसे में शोमैन राज कपूर ने भारतीय सिनेमा को पहली बार डबल इंटरवल का कॉन्सेप्ट दिया.
संगम के नाम पहला रिकॉर्ड
अक्सर लोग सोचते हैं कि ‘मेरा नाम जोकर’ पहली डबल इंटरवल वाली फिल्म थी, लेकिन असल में यह सम्मान जाता है फिल्म ‘संगम’ को. 1964 में रिलीज हुई ‘संगम’ का रनटाइम करीब 3 घंटे 58 मिनट था. उस जमाने में चार घंटे की फिल्म देखना किसी लंबे सफर से कम नहीं था. इसी वजह से थिएटर मालिकों ने फिल्म में दो इंटरवल रखने का फैसला किया.
मेरा नाम जोकर में भी दो इंटरवल
हालांकि ‘संगम’ में यूरोप की शानदार शूटिंग और दमदार कहानी थी, इसलिए दर्शक खुशी-खुशी दो-दो ब्रेक झेलने को तैयार हो गए. बाद में 1970 में आई राज कपूर की ही फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ भी करीब 4 घंटे 15 मिनट लंबी थी और उसमें भी दो इंटरवल रखे गए. ‘संगम’ की कहानी सुंदर, राधा और गोपाल के लव ट्रायंगल के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां पहले दोस्ती की गहराई दिखती है, फिर शादी और आखिर में सच्चाई व घर वापसी की इमोशनल कहानी सामने आती है.
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