NEET Success Story: स्मृतिलेखा ने केंद्रीय सरकारी नौकरी छोड़कर डॉक्टर बनने का सपना चुना. यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन आज उनकी मेहनत रंग लाई है. NEET 2026 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 9065 हासिल कर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती.
NEET Success Story: कौन हैं स्मृतिलेखा?
स्मृतिलेखा पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पाउशी गांव की रहने वाली हैं. वह एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं और 12वीं तक की पढ़ाई बंगाली माध्यम से की. स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने दो रास्ते थे.
एक तरफ डॉक्टर बनने का सपना था और दूसरी तरफ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी. उन्होंने पहले परिवार को प्राथमिकता दी. डाक विभाग में केंद्रीय सरकारी नौकरी मिली और उन्होंने वहां काम शुरू कर दिया. करीब 1 से 2 साल तक नौकरी करते हुए उन्होंने अपने परिवार का साथ दिया.
डॉक्टर बनने का फैसला
सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी उनके मन में डॉक्टर बनने की चाह खत्म नहीं हुई. नौकरी करते-करते उन्हें महसूस हुआ कि उनका असली लक्ष्य MBBS करना है. इसके बाद उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया.
स्मृतिलेखा ने सुरक्षित सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह NEET की तैयारी में जुट गईं. यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन उन्होंने अपने सपने पर भरोसा बनाए रखा.
गांव से सिलिगुड़ी तक
स्मृतिलेखा के गांव में NEET की तैयारी के लिए अच्छी कोचिंग की सुविधा नहीं थी. ऐसे में उन्होंने गांव छोड़कर सिलिगुड़ी का रुख किया और वहां PW विद्यापीठ में दाखिला लिया. यह उनका ड्रॉप ईयर था. इस दौरान उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई की.
91 हजार रैंक से AIR 9065 तक
स्मृतिलेखा का सफर बताता है कि लगातार मेहनत कभी बेकार नहीं जाती. NEET 2025 में उनकी ऑल इंडिया रैंक 91,941 थी. लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और अगले ही साल NEET 2026 में रैंक 9065 हासिल कर ली.
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