12 बार फेल, पत्नी बनीं सबसे बड़ी ताकत, BPSC 70वीं में बक्सर के अजीत को मिली 726वीं रैंक

Buxer BPSC Success Story: बक्सर के रहने वाले अजीत कुमार ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा को रैंक 726 लाकर क्रैक कर लिया है. उनका चयन ग्रामीण विकास पदाधिकारी (Rural Development Officer) के पद पर हुआ है. अजीत ने एक या दो नहीं बल्कि 12 बार असफलताओं का सामना किया है.

Buxer BPSC Success Story: कहते हैं कि अगर सपना बड़ा हो तो रास्ते में ठोकरें भी बड़ी मिलती हैं. लेकिन जो इंसान ठान ले कि मंजिल लेकर ही लौटेगा, उसे कोई नहीं रोक सकता. ऐसी ही कहानी है बक्सर के रहने वाले अजीत कुमार की, जिन्होंने 70वीं BPSC में रैंक 726 हासिल कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी यानी Rural Development Officer बनने का सपना पूरा कर लिया. आइए उनकी जर्नी को करीब से जानते हैं.

Buxer BPSC Success Story: कौन हैं अजीत कुमार?

इस सफलता की शुरुआत साल 2013 से मानी जा सकती है. उस समय सहरसा से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई करने के दौरान उनका चयन बिहार सैन्य पुलिस-4, डुमरांव (बक्सर) में सिपाही के पद पर हुआ. नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने अपने सपनों को पीछे नहीं छोड़ा.

ड्यूटी की थकान के बाद भी किताबों से दोस्ती जारी रही. विभागीय अनुमति लेकर नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से इतिहास विषय में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और BPSC की तैयारी में जुट गए. कई बार नींद से समझौता किया, कई त्योहार छोड़ दिए, लेकिन सपना नहीं छोड़ा.

इन परीक्षाओं में मिली असफलता

  • 63वीं BPSC में PT नहीं निकला.
  • 64वीं और 65वीं मेंस में बाहर हो गए.
  • 66वीं में फिर PT ने रोक दिया.
  • 67वीं में फाइनल मेरिट से नाम गायब था.
  • 68वीं में फिर PT नहीं निकला.
  • 69वीं में परीक्षा ही नहीं दे पाए.
  • 71वीं में फिर PT ने निराश कर दिया.

इसके अलावा 11वीं से 13वीं JPSC में अंतिम मेरिट सूची से बाहर हो गए. BPSC CDPO 2018 और 2022 में पीटी पास नहीं कर सके. BPSC ASO में दो बार पीटी में असफल रहे. झारखंड SI 2018 में मेंस परीक्षा में सफलता नहीं मिली. बिहार SI की चार कोशिशों में दो बार पीटी और दो बार मेंस में असफलता हाथ लगी. बिहार SSC, रेलवे और कई अन्य परीक्षाओं में भी निराशा मिली.

पत्नी ने किया सपोर्ट

अजीत एक पोस्ट शेयर कर कहते हैं कि इस पूरे सफर में माता-पिता का आशीर्वाद हमेशा सिर पर रहा. शिक्षकों ने रास्ता दिखाया और पुलिस विभाग के अधिकारियों व साथियों ने हौसला बढ़ाया. लेकिन सबसे खास भूमिका उनकी पत्नी की रही.

जब लोग असफलता गिन रहे थे, तब पत्नी उनके हौसले गिन रही थीं. घर की जिम्मेदारियां संभालना, फूल सी बेटी की परवरिश करना और हर मुश्किल वक्त में उनका साथ देना, यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया.

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Published by: Ravi Mallick

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