BPSC Success Story: बिहार की प्रज्ञा सचान ने BPSC 70वीं CCE परीक्षा में 453वीं रैंक के साथ सफलता हासिल कर ली. अब उन्हें BDO का पद मिलेगा. प्रज्ञा की जर्नी इतनी आसान नहीं थी. उनका सिविल सर्विस का सफर 2017 से शुरू हुआ था और इस साल उन्हें सफलता मिली. इस बीच उन्होंने कई सारी परीक्षाएं दी, कुछ में सेलेक्शन भी हुआ लेकिन मनचाहा रैंक नहीं मिलने के कारण वे बार-बार परीक्षा देती रहीं. गोद में रोती हुई बच्ची को लेकर रात भर पढ़ाई करती थीं. C-Section की पीड़ा के बाद भी UPSC, UPPCS और BPSC तीनों परीक्षाएं दीं.
पहली बार परिवार में कोई सिविल सेवा के लिए चुना गया
प्रज्ञा सचान एक साधारण परिवार से आती हैं. उनके परिवार में अभी तक कोई भी सिविल सेवा में नहीं गया है. वे अपने घर से पहली हैं, जिन्होंने इस सर्विस में कदम रखा है. दूर-दूर के रिश्तेदार बैंकिंग की तैयारी का सोच सकते थे, लेकिन कभी किसी ने सिविल सेवा की तैयारी नहीं की. ऐसे में प्रज्ञा के लिए ये सफर काफी मुश्किल था. शुरुआत में उन्हें इस सर्विस के बारे में कोई खास जानकारी भी नहीं थी.
यूपीएससी से की थी शुरुआत, पहले अटेंप्ट में मिली असफलता
प्रज्ञा ने 2016 में UPSC से शुरुआत की थी. पहले अटेंप्ट में उनका प्रिलिम्स क्लियर नहीं हुआ था. ऐसे में 2017 में उन्होंने UPSC से ब्रेक लेकर स्टेट UPPCS की तैयारी शुरू की.
2018 में UPPCS प्रीलिम्स परीक्षा क्रैक किया, लेकिन परीक्षा का पैटर्न बदल गया
अगले साल यानी कि 2018 में उन्होंने फिर से UPPCS की परीक्षा दी और इस बार प्रीलिम्स परीक्षा में उनका सेलेक्शन भी हो गया. प्रज्ञा इस बात से बेहद खुश थीं. लेकिन उन्हें धक्का तब लगा जब अचानक आयोग ने मेन्स का पैटर्न बदल दिया.
कोविड फेज में TB की शिकार, डॉक्टर ने बोला कैसे जिंदा हो?
इस दौरान प्रज्ञा एक्स्ट्रापुलमोनरी ट्यूबरकुलोसिस का शिकार हो गई थीं. जब एक जान पहचान के डॉक्टर ने उनका इलाज किया तो उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि वे कैसे ठीक-ठाक अपनी डेली रूटीन फॉलो कर लेती हैं. प्रज्ञा को टीबी के कारण रोज बुखार आता था. इसी बीच प्रज्ञा का UPPCS मेन्स परीक्षा का रिजल्ट आया और उन्होंने बीमारी की हालत में ही इंटरव्यू की तैयारी शुरू कर दी. हालांकि, उनका इंटरव्यू में चयन नहीं हुआ. वे काफी निराश हो गई थीं.
लगातार कई प्रीलिम्स और मेन्स देने के बाद निकला UPPCS
बीमारी से लड़ते हुए 2018 से 2021 तक, प्रज्ञा ने प्रीलिम्स और मेन्स की कई परीक्षाएं दीं. 2021 में उन्होंने जी-जान लगा दी और उनका चयन हुआ लेकिन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ. पहली बार सफलता मिलने से वे खुश तो थीं. लेकिन इतने सालों की मेहनत के बाद भी जब प्रज्ञा का चयन SDM पद के लिए नहीं हुआ तो उन्हें काफी निराशा हुई.
बार-बार असफलताओं के बीच माता-पिता ने करा दी शादी
ऐसा नहीं कि प्रज्ञा ने एग्जाम नहीं क्लियर किया था. लेकिन उन्हें SDM का पद चाहिए था. लेकिन बार-बार असफलता मिल रही थी. इस बीच माता-पिता ने उनकी शादी करा दी और वे मां भी बन गईं.
C Section के 25वें दिन बाद दी BPSC की परीक्षा
प्रज्ञा कई बार निराश हुईं, लेकिन उन्होंने पूरी तरह हार कभी नहीं मानी. उन्होंने एक बार फिर UPSC की तैयारी शुरू की, जो उन्होंने इससे पहले छोड़ दी थी. एक वक्त ऐसा आया कि जब वे UPSC की भी परीक्षा दे रही थीं और UPPCS, BPSC की भी. C Section के 25वें दिन बाद प्रज्ञा ने BPSC परीक्षा दी थी.
हमेशा बड़े सपने देखें
प्रज्ञा की ये कहानी बताती है कि हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करनी चाहिए. कई बार हमें सफलता तक पहुंचने में चुनौतियों, असफलताओं और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन धैर्य, निरंतर प्रयास और खुद पर भरोसा रहे तो हर लड़ाई में जीत हासिल की जा सकती है.
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