Success Story: बिहार के किसान की बेटी बनी IFS अफसर, 9 घंटे की नौकरी करते हुए की पढ़ाई

Success Story: जानें बिहार की अन्नपूर्णा सिंह की कहानी जिन्होंने 9 घंटे की नौकरी करते हुए यूपीएससी परीक्षा में 99 वीं रैंक हासिल किया है.

Success Story: अफसर बनने का सपना तो हर कोई देखता है, लेकिन इसके लिए मेहनत और संघर्ष करना कोई आसान काम नहीं है .इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन कहते हैं कि जिनके अंदर जुनून और दृढ़ संकल्प होता है, वही इसे पास कर सफलता प्राप्त करते हैं बिहार के बांका जिले से ताल्लुक रखने वाली अन्नपूर्णा सिंह जिन्होंने 2023 में हो रहे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 99 वीं रैंक हासिल कर पूरे बिहार का रोशन किया है. इनकी सफलता कहानी बहुत ही प्रेरणादायक रही है .साथ ही आपको बता दें कि इनका चयन इंडियन फॉरेन सर्विस यानी IFS के लिए हुआ है .

नौ घंटे नौकरी के साथ की यूपीएससी की तैयारी

अन्नपूर्णा सिंह प्राइवेट कंपनी में 9 घंटे नौकरी करने के साथ साथ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा की तैयारी करती रहीं और आपको बता दें कि नौकरी के साथ साथ उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पूरे देश में 99 वीं रैंक हासिल की .

अन्नपूर्णा सिंह की प्रारंभिक शिक्षा

अन्नपूर्णा सिंह ने अपनी स्कूलिंग पटना से की है साथ ही बता दें कि यह शुरू से ही पढ़ाई में होनहार रही हैं .पटना में स्कूलिंग के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए बेंगलुरु चली गई, जहां से उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की .
इंजीनियरिंग के बाद, कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से उनका चयन एक प्राइवेट कंपनी में हो गया और उन्होंने वहां काम करना शुरू कर दिया हालांकि, उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और नौकरी के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी भी शुरू कर दी.

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बीपीएससी परीक्षा में भी हुआ था चयन

अन्नपूर्णा सिंह ने 66 वीं बीपीएससी परीक्षा में 222 वीं रैंक हासिल कर चुकी हैं इनकी सफलता की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए है जिन्होंने IAS बनने का सपना देखा इनकी यह सीखती है कि आप हर उस कठिनाइयों को पार कर सकते हो जब आप अपने सपने से प्रेम करते हैं.

पिता थे किसान

अन्नपूर्णा सिंह बिहार के बांका जिले के लाहौरिया गांव से ताल्लुक रखने वाली हैं. उनके पिता मुकेश सिंह एक किसान हैं, और उनकी माता गृहिणी है. अन्नपूर्णा सिंह एक किसान परिवार से हैं. उनके पिता का कहना है कि उनकी बेटी शुरू से ही पढ़ाई को प्राथमिकता देती रही है.

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Author: Kashaf Ara

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