Budget 2026: इस बार का केंद्रीय बजट 2026-27 सिर्फ नंबर और आंकड़ों की कहानी नहीं है. ये बजट साफ तौर पर ये बताता है कि सरकार अब शिक्षा को भविष्य की तैयारी मान रही है. रेवा यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ पी श्यामा राजू का कहना है कि यह बजट भारत की शिक्षा यात्रा में लोगों को सबसे आगे रखता है. बजट का फोकस साफ है. मजबूत यूनिवर्सिटीज, डिजिटल नॉलेज की आसान पहुंच और ऐसे स्टूडेंट्स तैयार करना जो आने वाले कल की जरूरतों को समझते हों. यही सोच इस बजट को पिछले कई बजटों से अलग बनाती है.
Budget 2026 में रिसर्च और इंडस्ट्री पर बात
डॉ श्यामा राजू के मुताबिक, यूनिवर्सिटीज को मजबूत करने का मतलब सिर्फ नई इमारतें खड़ी करना नहीं है. असली मकसद है ऐसी जगह बनाना जहां पढ़ाई, रिसर्च और इंडस्ट्री एक साथ चलें. बजट 2026-27 में यूनिवर्सिटीज को अपग्रेड करने पर जो जोर दिया गया है, उससे स्टूडेंट्स को क्लासरूम के बाहर सीखने का मौका मिलेगा. इससे ग्रेजुएट्स सिर्फ डिग्री लेकर नहीं निकलेंगे, बल्कि उनके पास काम करने लायक स्किल्स भी होंगी.
क्रिएटर लैब्स और डिजिटल लर्निंग
डिजिटल नॉलेज तक पहुंच बढ़ाने का मतलब ये भी है कि गांव और छोटे शहरों के स्टूडेंट्स को अब बड़े शहरों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी. डॉ श्यामा राजू मानते हैं कि डिजिटल लर्निंग एजुकेशन गैप को कम करने में बड़ी भूमिका निभाएगी. आज के स्टूडेंट्स सिर्फ पढ़ना नहीं चाहते, बल्कि बनाना और एक्सप्लोर करना चाहते हैं. इसी सोच के साथ क्रिएटर लैब्स जैसी पहल सामने आई है.
यूनिवर्सिटी टाउनशिप
डॉ पी श्यामा राजू का मानना है कि बजट में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव शिक्षा को और आसान बनाएगा. पढ़ाई, हॉस्टल, रिसर्च और बाकी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मिलने से स्टूडेंट्स का समय और एनर्जी दोनों बचेंगे. इसके साथ ही लड़कियों के हॉस्टल की सुविधा बढ़ाकर STEM लर्निंग को मजबूत करने की बात भी कही गई है. इससे ज्यादा लड़कियां साइंस और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर में आगे आएंगी.
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