IAS Divya Mittal: जिंदगी में हर मेहनत का नतीजा तुरंत सफलता के रूप में मिले, यह जरूरी नहीं है. कई बार पूरी कोशिश के बावजूद असफलता हाथ लगती है. ऐसे समय में निराश होकर रुक जाने के बजाय यह समझना जरूरी है कि उस असफलता से क्या सीखा जा सकता है. पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल जो इन दिनों अपने इस्तीफे को लेकर चर्चा में है, उन्होंने अपने क्लास का एक एक्सपीरियंस शेयर किया है. वो बताती हैं कि क्लास में वो कभी फर्स्ट नहीं आईं. लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी.
क्लास 6 में कम नंबर के कारण नहीं हुआ था चयन
पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने अपने स्कूल के दिनों का अनुभव शेयर करते हुए बताया कि जब वह छोटी बच्ची थीं, तब उनके स्कूल में क्लास 6 में एक 'एबिलिटी सेक्शन' बनाया जा रहा था. कम नंबर होने की वजह से उनका उस सेक्शन में चयन नहीं हो पाया. इतना ही नहीं, वह कभी क्लास के फर्स्ट आने वाले छात्रों की लिस्ट में भी शामिल नहीं हुईं.
अगर मार्क्स के हिसाब से देखा जाता तो IIT, IIM और IAS अधिकारी भी मुझे नहीं बनना चाहिए था. लेकिन मुझे वो सब मिला. जानते हैं क्यों? क्योंकि असफलता मनुष्य को परिभाषित नहीं करती. हां उस असफलता के प्रति हम कैसे रिएक्ट करते हैं, वो जरूरी लाइफ को प्रभावित करती है.
ये भी पढ़ें: एंटी माफिया चलाने वाली सीतामऊ SDM शिवानी का धाकड़ अंदाज, पहले प्रयास में PCS क्रैक
असफलता के बाद करें ये 3 काम: पूर्व दिव्या मित्तल
- असफलता में अपनी सीख तलाशें
पूरी मेहनत के बाद भी अगर सफलता नहीं मिली है, तो सबसे पहले उसे केवल असफलता के तौर पर न देखें. यह समझने की कोशिश करें कि इस एक्सपीरियंस से आपने क्या सीखा. अपनी गलतियों और कमियों को पहचानें और उस सीख को आगे के लिए अपने साथ रखें.
- सोचें कि क्या बेहतर किया जा सकता है
दूसरा कदम यह है कि खुद से ईमानदारी से सवाल करें कि अगली कोशिश में क्या बदला जा सकता है. कौन सी चीज आपकी तैयारी या प्रदर्शन को बेहतर बना सकती है? अपनी स्ट्रैटजी में जरूरी बदलाव करें और दोबारा प्रयास की तैयारी करें.
- खुद को समय दें और फिर नए जोश से शुरुआत करें
असफलता के बाद मन दुखी होना या थकान महसूस करना स्वाभाविक है. ऐसे समय में खुद को थोड़ा समय देना भी जरूरी है. मन ज्यादा भर आए तो रो लें और थक गए हैं तो आराम कर लें. लेकिन इसके बाद खुद को दोबारा संभालें और याद करें कि आपने अपना सपना क्यों चुना था.
अगर वह सपना आपके लिए सच में महत्वपूर्ण है, तो एक बार फिर मेहनत शुरू करें. लेकिन इस बार गुस्से, कुंठा या खुद को साबित करने के दबाव में नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य के प्रति लगाव और विश्वास के साथ मेहनत करें.
सफलता की राह में असफलता भी एक पड़ाव
दिव्या मित्तल का अनुभव बताता है कि किसी परीक्षा में कम नंबर आना या किसी मौके पर चयन न होना आपकी पूरी क्षमता का प्रमाण नहीं है. सफलता की राह में कई बार असफलताएं आती हैं, लेकिन उनसे मिली सीख अगली कोशिश को मजबूत बना सकती है.
कौन हैं दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं. उन्होंने IIT और IIM जैसे संस्थान से पढ़ाई की थी. इसके बाद विदेश में नौकरी भी की. लेकिन उनका मन देश में आकर खुद के लोगों के लिए कुछ करने का था. यही कारण है कि उन्होंने विदेश की नौकरी छोड़ दी और भारत आकर सिविल सेवा की तैयारी शुरू. बिना किसी कोचिंग के उन्होंने पहले प्रयास में UPSC CSE परीक्षा क्रैक किया. हालांकि, पहले प्रयास में उन्हें IPS सेवा मिली. इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और IAS के लिए सेलेक्ट हुईं. उत्तर प्रदेश के मिर्जापूर और देवरिया में अपनी सेवा दी. हाल ही में उन्होंने 13 साल के कार्यकाल के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
ये भी पढ़ें: पंजाब यूनिवर्सिटी में ABVP की जीत, अंकित बिधान बने अध्यक्ष
