Government Schools AI Learning: इस प्रोग्राम का नाम है ‘संपूर्ण शिक्षा कवच’ यानी SSK. यह पहल राज्य सरकारों और Filo Official Website नाम के AI एजुकेशन प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर चलाई जा रही है. इसका मकसद सिर्फ टॉपर्स तैयार करना नहीं, बल्कि कमजोर छात्रों को भी पढ़ाई में आगे लाना है.
पर्सनल टीचर का सपोर्ट
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छात्रों को 24×7 लाइव पर्सनल टीचर सपोर्ट मिलता है. यानी अगर किसी छात्र को रात 10 बजे भी कोई सवाल समझ नहीं आता, तो वह तुरंत मदद ले सकता है.
प्लेटफॉर्म पर AI और लाइव टीचर दोनों की मदद से पढ़ाई कराई जाती है. खास बात यह है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों और उनके परिवारों को इसके लिए कोई फीस नहीं देनी पड़ती.
Government Schools के रिजल्ट में बड़ा बदलाव
इस पहल का असर अब बोर्ड रिजल्ट्स में भी साफ दिखने लगा है. कई स्कूलों में सिर्फ एक साल के अंदर फेलियर रेट में 70 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है.
झारखंड के गुमला जिले का पास प्रतिशत 87% से बढ़कर 99.3% तक पहुंच गया. वहीं लातेहार जिला, जो पहले पिछड़े जिलों में गिना जाता था, अब राज्य की साइंस रैंकिंग में पहले नंबर पर पहुंच चुका है.
दुमका में SSK से जुड़े स्कूलों का रिजल्ट बाकी स्कूलों से करीब 20 प्रतिशत बेहतर रहा. वहीं रामगढ़ जिले के कमजोर माने जाने वाले स्कूलों में भी रिकॉर्ड सुधार देखने को मिला.
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी दिखा असर
महाराष्ट्र के सांगली जिले में जिन स्कूलों के छात्रों ने AI ट्यूटरिंग प्लेटफॉर्म का ज्यादा इस्तेमाल किया, वहां रिजल्ट बाकी स्कूलों की तुलना में काफी बेहतर रहा.
वहीं मध्य प्रदेश के विदिशा में शुरू हुए पायलट प्रोजेक्ट में हजारों लाइव सेशंस हुए और कई छात्रों ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए. हिमाचल प्रदेश, मेघालय और राजस्थान में भी इस मॉडल को तेजी से लागू किया जा रहा है.
सरकार से भी मिल चुके हैं कई बड़े अवॉर्ड
इस AI आधारित शिक्षा मॉडल को भारत सरकार की तरफ से कई बड़े सम्मान भी मिल चुके हैं. SSK को नेशनल अवॉर्ड फॉर ई-गवर्नेंस में गोल्ड अवॉर्ड दिया गया. इसके अलावा नीति आयोग ने भी इसे शिक्षा कैटेगरी में देश की सर्वश्रेष्ठ पहल बताया.
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