RAGHU RAI : भारत की आधी सदी है रघु राय की तस्वीरों में...

वर्ष 1965 के बाद के भारत के राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को अपने कैमरे में कैद कर तस्वीरों में हमेशा के लिए जीवंत करने वाले दिग्गज फोटोग्राफर रघु राय का 26 अप्रैल को  83 वर्ष की आयु में निधन हो गया. लगभग आधी सदी से अधिक समय के अपने फोटोग्राफी करियर में फोटो पत्रकारिता की एक नयी इबारत लिखने वाले रघु राय के जीवन के कुछ अनछुए पहलू...

RAGHU RAI : इंजीनियरिंग की पढ़ाई करनेवाले रघु राय को उनके फोटो जर्नलिस्ट भाई के काम ने आकर्षित किया और वे उनके नक्शेकदम पर चल पड़े, लेकिन अपने काम से फोटोग्राफी की एक अलहदा और लंबी इबारत लिखी. रघु राय की लिखी गयी फोटो जर्नलिज्म की यह लंबी इबरात कई पीढ़ियों के लिए बीते दौर को जानने समझने का एक जीवंत दस्तावेज है. भोपाल गैस कांड हो, संजय गांधी प्लेन क्रैश या भिंडरावाले की तस्वीर या फिर भारतीय शास्त्रीय गायकों की तस्वीरें या सड़क का आम जनजीवन, रघु राय ने सबकुछ को अपने कैमरे में कैद किया.

एक गधे की तस्वीर लेने से हुई शुरुआत

पिता, जो पंजाब के सिंचाई विभाग में प्रमुख सचिव थे और उनके बॉस चीफ इंजीनियर थे, वह चााहते थे कि उनका बेटा रघु इंजीनियर बने. उस दौर में अपनी मर्जी से पढ़ने या नौकरी करने के विकल्प चुनने की आजादी नहीं हुआ करती थी. लिहाजा रघु राय ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और एक साल सिंचाई विभाग में नौकरी भी की. लेकिन मन नहीं लगा, तो अपने बड़े भाई एस पॉल के पास दिल्ली चले आये, जो एक बेहतरीन फोटो जर्नलिस्ट थे. यहां आने के बाद भाई का दिया हुआ एक छोटा सा कैमरा लेकर फोटोग्राफी सीख रहे एक युवक के साथ उसके गांव चले गये. दो-तीन दिन उसके साथ वहां रहे, गांव घूमे और उसे बच्चों और खेतों की तस्वीर लेते देखते रहे, इस दौरान उनकी नजर सामान ढोने वाले एक गधे पर पड़ी और जो उन्हें बहुत प्यारा लगा. उन्होंने तस्वीर लेने की कोशिश की, तो गधा वहां से भागने लगा और वहां मौजूद बच्चे यह देखकर हंसने लगे. रघु को इसमें मजा आया और वह गधे के पीछे चल पड़े और इस तरह उन्होंने अपनी पहली तस्वीर ली. रघु के भाई ने जब यह तस्वीर देखी, तो वे उसकी फ्रेमिंग से बहुत प्रभावित हुए. इस तस्वीर को उन्होंने अपनी एक-दो तस्वीरों के साथ  ‘द टाइम्स’ (लंदन) को भेज दी, जहां न सिर्फ इस तस्वीर को प्रकाशित किया गया, बल्कि इसके लिए रघु को पुरस्कार राशि भी मिली. यही वो समय था, जब रघु को लगा कि ‘मुझे भी तस्वीरें खींचना है’.

‘द स्टेट्समैन’ से शुरू हुआ फोटो जर्नलिज्म करियर

वर्ष 1966 में रघु राय ने ‘द स्टेट्समैन’ समाचार पत्र में मुख्य फोटोग्राफर के रूप में जॉब शुरू की. किशोर पारिख और एस पॉल जैसे धाकड़ फोटोग्राफरों के बीच काम करते हुए युवा रघु ने महज 23 साल की उम्र में फोटो जर्नलिज्म के करियर को आगे बढ़ाना शुरू किया और बहुत कम इक्विपमेंट के साथ फोटो जर्नलिज्म को फोटो आर्ट के स्तर पर पहुंचाया. वे कहते थे -‘एक अच्छी तस्वीर वह है, जो आपको ठहरकर सोचने पर मजबूर कर दे और आपके भीतर एक संवेदना जगाये.’ स्टेट्समैन के बाद रघु तकरीबन एक दशक तक इंडिया टुडे के फोटो एडिटर रहे और फोटो जर्नलिज्म की अनूठी शैली विकसित की. रघु ने दुनिया की कई महानतम हस्तियों के ऐतिहासिक क्षणों को अपने कैमरे में कैद किया, जिनमें मदर टेरेसा,दलाई लामा जैसे धर्म गुरु हैं, तो उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित रविशंकर और एम एस सुब्बुलक्ष्मी जैसे शास्त्रीय संगीत के दिग्गज भी. राय की ली गयी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तस्वीरें भारत में राजनीतिक सत्ता के सबसे स्थायी दृश्य अभिलेखों में से एक मानी जाती हैं. 

वैश्विक पटल पर हासिल की ख्याति

वर्ष 1971 में पेरिस में एक प्रदर्शनी के दौरान विश्व के महान फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसों ने रघु राय के काम को देखा और उन्हें दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफी एजेंसी ‘मैग्नम फोटोज’ के लिए नामांकित किया. इससे भी अधिक खास बात हुई 1977 में, जब वे ‘मैग्नम फोटोज’ के सदस्य बने. यह किसी भी भारतीय फोटोग्राफर के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि मैग्नम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फोटो जर्नलिस्टों का समूह माना जाता है. एक सही क्लिक के इंतजार में घंटों का धैर्य रखनेवाले रघु राय ब्लैंक एंड व्हाइट तस्वीरों के उस्ताद माने जाते थे.

राजनीति से लेकर आम जन जीवन तक रघु की तस्वीरों में 

आपको अगर एक बार फिर रघु राय की तस्वीरों के जादू से गुजरना है, तो किसी चित्र प्रदर्शनी का इंतजार करने की जरूरत नहीं. आप ‘मैग्नम फोटोज’ की वेबसाइट में रघु राय का पेज देख सकते हैं. उनके जीवन और काम को जान सकते हैं. ‘मैग्नम फोटोज’ फोटोग्राफी की दुनिया का वो मकाम है, जिसे पूरी दुनिया बेहद सम्मान की नजर से देखती है. इसे अक्सर ‘फोटोग्राफी का माउंट एवरेस्ट’ भी कहा जाता है. वर्ष 1971 में पद्मश्री से सम्मानित किये गये रघु राय का काम बहुत व्यापक था. उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी से पीड़ित लोगों पर विस्तृत वृत्तचित्र  बनाया, तो नेशनल ज्योग्राफिक के लिए ‘भारत में वन्य जीवों और मनुष्यों के बीच का संबंध’ शीर्षक कवर स्टोरी भी की. उनकी 50 से अधिक किताबें भी प्रकाशित हुई. ऐसी अनगिन उपलब्धियां हैं, जो उन्होंने हासिल की और जो उनके बाद भी उनके नाम-काम के साथ नये लोगों को प्रेरित करती रहेंगी. उनकी तस्वीरों में भारत की एक आधी से अधिक सदी अपने वक्त की बात कहती है और कहती रहेगी.

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लेखक के बारे में

By Preeti Singh Parihar

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