हवाई यात्रा के छिपे राज, जानें Flight से जुड़े 5 Amazing Facts

Amazing Facts: क्रू मेंबर से लेकर फ्लाइट की विंडो तक, Aeroplane में अजीब होती हैं ये चीजें. क्या कभी आपने सोचा कि आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या आपके पास इसका जवाब है? दरअसल, फ्लाइट में हर चीज के पीछे साइंस होता है. ऐसे में आज हम ऐसी ही 5 अजीब चीजों के बारे में जानेंगे जो फ्लाइट में बैठने से पहले आपका जानना जरूरी है.

Amazing Facts: हवाई जहाज की यात्रा सभी के लिए रोमांच से भरी होती है. आप में से कई लोग होंगे जिन्होंने कभी न कभी प्लेन में यात्रा की होगी और नहीं भी की है तो कई चीजें ऐसी हैं जिसे लेकर आपके मन में सवाल आता होगा कि ऐसा क्यों है? फ्लाइट की सभी चीजें विज्ञान और तकनीक से जुड़ी है. ऐसे में आज फ्लाइट से जुड़े ऐसे 5 सवालों के जवाब जानेंगे.

Crew Member के सीट बेल्ट में फर्क क्यों होता है? 

क्रू मेंबर की सीट पर चार- प्वॉइंट सीट बेल्ट होते हैं (जो कि क्रॉस शेप में होता हैं), ऐसा इसलिए ताकि तेजी से लगने वाले झटकों या दुर्घटना की स्थिति में उन्हें सीट बेल्ट से ज्यादा सुरक्षा मिल सके और वे गिरने से बच सकें. क्रू मेंबर सुरक्षित रहेंगे तभी वे यात्रियों को सुरक्षित रख सकेंगे. 

क्या फ्लाइट में स्मोकिंग बैन है? 

जी हां, फ्लाइट में स्मोकिंग (Smoking Ban In Flight) पूरी तरह बैन है. लेकिन वॉशरूम (Flight Washroom) में ऐशट्रे रखे हुए होते हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि जब पूरी तरह से स्मोकिंग बैन है तो ऐशट्रे क्यों रखा होता है? दरअसल, ये सुरक्षा की दृष्टिकोण से रखा होता है. कई बार पैसेंजर छुप छुपाकर सिगरेट पी लेते हैं. ऐसी स्थिति में वे सिगरेट पीने के बाद इसे यहां-वहां न फेंक दें बल्कि ऐशट्रे में डालें.  

एयरप्लेन की गेट हमेशा बाईं ओर ही क्यों होती है?

आपने गौर किया होगा कि फ्लाइट में चढ़ते समय गेट हमेशा बाईं ओर होता है. ऐसा एविएशन इंडस्ट्री के लेआउट और ग्राउंड सर्विसिंग सिस्टम की वजह से है. दरअसल, दाईं ओर से सामान और ईंधन की लोडिंग होती है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए गेट बाईं ओर ही बनाया जाता है.

फ्लाइट की खिड़कियां Curved क्यों होती हैं?

हवाई जहाज की खिड़कियां कर्व्ड डिजाइन में होती हैं ताकि हवा का दबाव और बहाव बराबर बना रहे. इससे क्रैक या टूटने का खतरा काफी कम हो जाता है. पहले प्लेन में स्क्वायर विंडो होती थीं, लेकिन उनकी वजह से दुर्घटनाएं बढ़ीं, जिसके बाद कर्व्ड खिड़कियों का इस्तेमाल शुरू किया गया.

Take Off और Landing के समय लाइट्स डिम क्यों होती हैं?

रात के समय फ्लाइट टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान कैबिन की लाइट्स डिम कर दी जाती हैं. इसका मकसद यह है कि इमरजेंसी की स्थिति में यात्रियों की आंखें अंधेरे की आदत डाल लें और वे तुरंत रिएक्ट कर सकें.

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लेखक के बारे में

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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